रायबरेली-डलमऊ मार्ग का निकला दम, सड़क के नाम पर बचे बजरी और गड्ढे
रायबरेली। केंद्रीय सड़क योजना के तहत आठ साल पूर्व करोड़ों रुपये की लागत से बने रायबरेली-डलमऊ मार्ग की बुरी दशा है। हाल यह है कि इस मार्ग से गर्भवती महिला को इलाज के लिए ले जाना अपने घर आने वाली खुशी से महरूम होना है वहीं श्मशान के लिए अंतिम यात्रा को निकले पार्थिव शरीरों …
रायबरेली। केंद्रीय सड़क योजना के तहत आठ साल पूर्व करोड़ों रुपये की लागत से बने रायबरेली-डलमऊ मार्ग की बुरी दशा है। हाल यह है कि इस मार्ग से गर्भवती महिला को इलाज के लिए ले जाना अपने घर आने वाली खुशी से महरूम होना है वहीं श्मशान के लिए अंतिम यात्रा को निकले पार्थिव शरीरों को चिता के लिए भी इंतजार करना पड़ता है। सड़क के नाम पर बजरी और गड्ढे बचे हैं। भारी वाहनों के बेरोकटोक आवाममन ने पूरी सड़क का दम निकाल दिया है।
रायबरेली-डलमऊ मार्ग जिले की महत्वपूर्ण सड़क में शुमार रखती है। 30 किमी लंबी सड़क फतेहपुर को भी जोड़ती है। वहीं डलमऊ की सबसे व्यस्त सड़क है। इस सड़क का निर्माण केंद्रीय सड़क योजना के तहत हुआ था। सांसद सोनिया गांधी के कोटे से सड़क की कार्ययोजना को अमलीजामा पहनाया गया था। केंद्र की योजना होने के बाद भी सड़क निर्माण में जमकर धांधली हुई। इसका नतीजा है कि आठ साल में ही सड़क उखड़कर गड्ढों में तब्दील हो गई है।
सड़क निर्माण के बाद इसका हस्तांतरण लोक निर्माण विभाग को कर दिया गया था। इस पर चार पहले विभाग ने सड़क की सतही मरम्मत करा अपना काम कागज पर पूरा कर दिया था। ठीक से मरम्मत न होने से सड़क कुछ दिन बाद ही बदहाल हो गई। इस रोड पर मौरंग व गिट्टी लदे ट्रकों का आना जाना लगा रहता है वहीं रोड पर टैक्सी गाड़ियों की भी भरमार रहती है।
पढ़ें- पंजाब में फिर शुरु हुआ नाइट कर्फ्यू का दौर, बढ़ते मामलों की वजह से स्कूल-कॉलेज भी रहेंगे बंद
जिससे सड़क पर लोड अधिक रहता है और दिन प्रतिदिन यह खराब होती जा रही है। मनेहरु से लेकर घुरवारा तक हाल यह है कि सड़क पर एक से डेढ फिट तक गड्डे बने हुए हैं। ऐसे में जब किसी गर्भवती को एंबुलेंस से अस्पताल ले जाया जाता है तो पूरे घर को जच्चा बच्चा की कुशलता के लिए दुआ करनी पड़ती है। वहीं बदहाल सड़क से दोपहिया वाहन सवार हादसों का शिकार होते हैं। रात में इस सड़क से गुजरना खतरे से खाली नहीं होता है। आए दिन दुर्घटनाएं होती रहती हैं।
इस सड़क से ओवरलोड वाहन गुजरते हैं वहीं आरटीओ और पुलिस इन पर नकेल नहीं लगा सकी है। पुलिस के सामने भारी वाहन ओवरलोड गुजरते हैं और सड़क का सत्यानाश करते हैं। इसके बाद भी वाहनों का चालान नहीं किया जाता है। 40 टन से अधिक भार लेकर वाहन सड़क से हर दिन निकलते हैं जिस पर जिम्मेदारों की निगाह नहीं जाती है।
