बरेली: तीसरी लहर का खतरा, जंक्शन पर अधूरे इंतजाम
बरेली, अमृत विचार। कोविड संक्रिमतों की तेजी से बढ़ती संख्या से तीसरी लहर की आशंका बढ़ गई है। ओमिक्रान का खतरा भी सता रहा है। जिस कारण स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने कोविड टेस्टिंग की रफ्तार को बढ़ा दिया है। सबसे ज्यादा डर दूसरे राज्यों से आने वाले यात्रियों से है। यही वजह है कि …
बरेली, अमृत विचार। कोविड संक्रिमतों की तेजी से बढ़ती संख्या से तीसरी लहर की आशंका बढ़ गई है। ओमिक्रान का खतरा भी सता रहा है। जिस कारण स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने कोविड टेस्टिंग की रफ्तार को बढ़ा दिया है। सबसे ज्यादा डर दूसरे राज्यों से आने वाले यात्रियों से है। यही वजह है कि बरेली जंक्शन पर कोरोना की जांच बढ़ा दी गई है लेकिन कोरोना से निपटने के लिए इंतजाम अभी जंक्शन पर अधूरे हैं।
बरेली जंक्शन पर रोजाना 400 से अधिक यात्रियों का आरटीपीसीआर और एंटीजन टेस्ट किया जा रहा है। नई दिल्ली, मुंबई, पंजाब, पश्चिम बंगाल, जम्मू कश्मीर आदि राज्यों से आने वाले यात्रियों की संख्या अधिक है। जंक्शन पर हर रोज 15 से 20 हजार यात्रियों की आवाजाही रहती है। सवाल यह भी खड़ा हो गया है कि इतनी संख्या में यात्रियों की आवाजाही के बावजूद स्वास्थ्य विभाग भी महज कोरम पूरा करने में लगा है। जंक्शन पर कई ऐसे राज्यों से ट्रेनें बरेली हर रोज पहुंचती हैं जहां संक्रमण तेजी के साथ फैल रहा है। लेकिन जंक्शन पर कहीं भी सैनेटाइजर की व्यवस्था दिखाई नहीं देगी।
मास्क की अनिवार्यता भी महज औपचारिकता बनकर रह गई है। पहली लहर के दौरान स्टेशन पर सैनेटाइजर रखा गया था। महीनों स्टेशन के मुख्य द्वार पर सैनेटाइजर की बोतल तो रखी रही लेकिन कम ही दिन उसमें सैनेटाइजर भरा गया। एक बार फिर जब तेजी के साथ संक्रमितों की संख्या बढ़ रही है तो सैनेटाइजर की औपचारिकता से भी मुंह मोड़ लिया गया है। दूसरी तरफ जंक्शन के अधिकारियों का कहना है कि सभी कर्मचारियों से अपना सैनेटाइजर साथ लाने को कहा गया है।
यात्री भी अपना सैनेटाइजर साथ लेकर ही चलें। बता दें कि रेलवे द्वारा पूरे जोर के साथ ट्रेनों का संचालन किया जा रहा है तो ऐसे में सोशल डिस्टेंसिंग के बारे में सोचना ही बेमानी होगा। आरक्षण कार्यालय से लेकर सभी फुट ओवर ब्रिज और प्लेटफार्मों पर बना गए पीले घेरें के निशान भी मिटने लगे हैं। स्टेशन अधीक्षक सत्यवीर सिंह ने बताया कि नई गाइड लाइन के संबंध में अभी कोई निर्देश नहीं मिले हैं। निर्देश मिलने के बाद इन पीले गोल घेरों को दोबारा बनवा दिया जाएगा।
