मुरादाबाद : कांग्रेस और बसपा के विस चुनाव अस्मिता की लड़ाई
विनोद श्रीवास्तव/मुरादाबाद, अमृत विचार। भाजपा और सपा के दिग्गज इस विधानसभा चुनाव में मंडल में शह और मात में लगे हैं। एक दूसरे पर शब्दों के तीर छोड़कर मतदाताओं को रिझाकर वोटों का ध्रुवीकरण कर रहे हैं। वहीं, कांग्रेस और बसपा के लिए यह चुनाव अस्मिता की लड़ाई है। वजह पिछले विस चुनाव में पूरे …
विनोद श्रीवास्तव/मुरादाबाद, अमृत विचार। भाजपा और सपा के दिग्गज इस विधानसभा चुनाव में मंडल में शह और मात में लगे हैं। एक दूसरे पर शब्दों के तीर छोड़कर मतदाताओं को रिझाकर वोटों का ध्रुवीकरण कर रहे हैं। वहीं, कांग्रेस और बसपा के लिए यह चुनाव अस्मिता की लड़ाई है। वजह पिछले विस चुनाव में पूरे मंडल में न तो बसपा के हाथी की चिंघाड़ निकली, न कहीं हाथ का पंजा टिका।
मुरादाबाद मंडल भाजपा और सपा के लिए नाक की लड़ाई है और कांग्रेस और बसपा के लिए अस्मिता की। भाजपा को 2019 लोकसभा चुनाव की हार की टीस अभी भी है। इसकी झलक 30 दिसंबर को बुद्धि विहार के मैदान में भाजपा के चाणक्य केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के संबोधन में दिखी। उन्होने पिछली बार की गलती न दोहराने की जहां जनता से हामी भरवाई।
वहीं हाथ उठवाकर इस चुनाव में मुरादाबाद की सभी छह सीटों पर कमल खिलाने का संकल्प लिया। यही छटपटाहट सपा के लिए भी है। कांग्रेस और बसपा की तो दोनों दलों का पिछले विस चुनाव में पूरे मंडल में सूपड़ा साफ हो गया था। मंडल के छह जिलों में न कांग्रेस का पंजा टिका और न हाथी की चाल।
यूं तो कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव और उत्तर प्रदेश की प्रभारी व मुरादाबाद की बहू प्रियंका गांधी अपने ससुराल में दो दिसंबर को बुद्धि विहार की जनसभा में अपनी प्रतिज्ञा के सहारे कांग्रेस की डूबती नैया को पार लगाने की मनुहार जनता से कर चुकी हैं।
मगर बसपा अभी चुनावी बिसात पर खुलकर सामने नहीं आई है। कार्यकर्ता सम्मेलनों में पार्टी मंडल और जोनल कोआर्डिनेट ही कार्यकर्ताओं में ऊर्जा भर रहे हैं। बसपा प्रमुख की कोई रैली या कार्यक्रम की सुगबुगाहट भी न होने से हाथी के साथी पशोपेश में हैं।
