लखनऊ: सचिवालय कर्मी ने दहेज के लिए पत्नी को पीट-पीटकर मार डाला
लखनऊ। राजधानी पुलिस लाख कोशिश कर ले लेकिन दहेज के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। ताजा मामला पारा थानाक्षेत्र के पिंक सिटी बुद्धेश्वर का है। यहां पर दहेज की मांग को लेकर सचिवालय कर्मचारी ने परिजनों के साथ मिलकर पत्नी की पीट-पीट कर हत्या कर दी। इस मामले में मायके पक्ष के लोगों ने …
लखनऊ। राजधानी पुलिस लाख कोशिश कर ले लेकिन दहेज के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। ताजा मामला पारा थानाक्षेत्र के पिंक सिटी बुद्धेश्वर का है। यहां पर दहेज की मांग को लेकर सचिवालय कर्मचारी ने परिजनों के साथ मिलकर पत्नी की पीट-पीट कर हत्या कर दी। इस मामले में मायके पक्ष के लोगों ने मृतका सरिता प्रजापति (28) के सचिवालय कर्मी पति विमल सिंह यादव समेत कुल सात ससुराली जनों के खिलाफ पारा थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई है।
शादी के बाद से प्रताड़ित हो रही थी सरिता
मामले पर जानकारी देते हुए मृतका सरिता के पिता श्री दोस्त सिंगार ने बताया कि 21 नवंबर 2021 को सरिता की शादी सचिवालय में चकबंदी विभाग में काम करने वाले विकास सिंह यादव से की गई थी। शादी के दौरान पर्याप्त दहेज भी दिया गया था। पर शादी के कुछ दिनों के बाद से ही दहेज के नाम पर ससुराली परिजन सरिता को प्रताड़ित करने लगे।
प्लॉट खरीदने के नाम पर मांगे जा रहे थे पैसे
प्लॉट खरीदने के नाम पर सरिता से बार-बार 15 लाख रुपये मायके से मांगने को कहा जाता था। मना करने पर सरिता को बुरी तरह पीटा जाता था। गत शनिवार शाम करीब 6:00 बजे सरिता ने फोन करके अपने पिता को बताया कि दहेज के लिए उसे ससुराल पक्ष के लोग बंधक बनाकर पीट रहे हैं।
श्री दोस्त सिंगार जैसे ही सरिता के ससुराल जाने के लिए तैयार हुए तो दोबारा फोन आया कि सरिता की मौत हो गई है और सभी उसे लेकर ट्रॉमा सेंटर जा रहे हैं। इस मामले में श्री दोस्त सिंगार ने सरिता के पति विमत सिंह यादव समेत कपिल सिंह यादव, सुमेंद्र सिंह यादव, निर्मल सिंह यादव, अमरेंद्र सिंह यादव व सास समेत कुल सात लोगों के खिलाफ दहेज हत्या का मामला दर्ज कराया है।
सरकारी कर्मचारी का दहेज लेना गैरकानूनी
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट से तय कोड ऑफ कंडक्ट के तहत किसी भी सरकारी कर्मचारी या पदाधिकारी के लिए दहेज लेना गैरकानूनी है। ऐसे में आरोप सिद्ध होने पर नौकरी से बर्खास्त तक किया जा सकता है। बावजूद इसके विमल ने सरकारी पद पर रहते हुए दहेज लिया। ऐसे में उसपर कानूनी कार्रवाई के साथ-साथ विभागीय कार्रवाई भी हो सकती है।
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