रायबरेली: कोहरा और गलन से बढ़ी सर्दी, पारा 4 डिग्री के पार…

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Edited By Amrit Vichar
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रायबरेली। उत्तर की हवा का पूरा दबाव एक बार फिर से मैदानी भागों पर बन रहा है। इससे मैदानी भागों में उत्तराखंड से आने वाली बर्फीली हवा से शुक्रवार को कड़ाके की सर्दी पड़ना शुरू हो गई है। मौसम के यू टर्न से लोग फिर से कांप गए। वहीं कोहरा होने से गलन से लोग …

रायबरेली। उत्तर की हवा का पूरा दबाव एक बार फिर से मैदानी भागों पर बन रहा है। इससे मैदानी भागों में उत्तराखंड से आने वाली बर्फीली हवा से शुक्रवार को कड़ाके की सर्दी पड़ना शुरू हो गई है। मौसम के यू टर्न से लोग फिर से कांप गए। वहीं कोहरा होने से गलन से लोग परेशान हैं।

दो दिन तक मौसम बेहतर रहा लोग गुनगुनी धूप का आनंद ले रहे थे। वहीं तापमान भी बढ़ने लगा लेकिन पिछले 24 घंटे में हवा में परिवर्तन से पहाड़ों की सर्दी मैदान पर लौट आई है। इसी का नतीजा रहा कि शनिवार सुबह घना कोहरा होने के साथ गलन रही।

सुबह 6 बजे हाल यह रहा सड़कों पर सन्नाटा दिखा वहीं दृश्यता 10 मीटर रही। बताते हैं कि उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश से आने वाली बर्फीली हवा धीरे-धीरे मैदानी भागों में आने लगी है। अधिकतम तापमान तीन डिग्री गिरकर 14 डिग्री तथा न्यूनतम तापमान 4 डिग्री रहा।

मौसम विभाग के निदेशक जेपी गुप्ता का कहना है कि उत्तर की हवा से सर्दी तेज होगी। इसका दबाव बन गया है। कुछ दिनों में  कोहरा और घना होगा।

कोहरा से गेहूं को फायदा

कोहरा जितना पड़ेगा गेहूं की फसल बेहतर होगी। पिछले साल कम कोहरा  पड़ा था जिस कारण गेहूं का दाना पतला था। इस बार भी कोहरा कम पड़ा है। जिस कारण किसान चिंतित थे, एक बार फिर कोहरा पड़ने से किसानों को राहत है।  जिला कृषि अधिकारी रविचंद्र प्रकाश का कहना है कि अभी कोहरा जिस तरह से पड़ रहा है उससे फसल को लाभ है।

नहीं जलता है अलाव

कड़ाके की ठंड के बाद भी अलाव नहीं जल रहे हैं। अलाव के लिए हर तहसील में 50 हजार का बजट आया था लेकिन उसके बाद भी अलाव नहीं जलवाए गए। हाल यह है कि रेलवे स्टेशन और सुपर मार्केट में अस्थाई रैन बसेरे बनाए गए हैं। यहां पर सुविधाओं के नाम पर सिर्फ खानापूरी की गई। यहां पर सबसे अधिक चहल पहल होती है, लेकिन अभी तक अलाव जलाने की सुध किसी को नहीं आई है।

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