अयोध्या: 28 लाख की आबादी महज 904 निगरानी समितियों के भरोसे, कैसे लड़ेंगे कोरोना से

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
On

अयोध्या। कोरोना की तीसरी लहर की सनसनाहट के बीच यहां जिला प्रशासन की तैयारियां फिलहाल न के बराबर है। स्वास्थ्य विभाग भी तैयारी और बचाव के साथ टेस्टिंग के नाम पर क्वारंटीन भूमिका में दिखाई दे रहा है तो लोग भी नहीं चेत रहे हैं। सीएमओ खुद कोरोना पॉजिटिव आकर होम आइसोलेट हैं। वहीं प्रशासन …

अयोध्या। कोरोना की तीसरी लहर की सनसनाहट के बीच यहां जिला प्रशासन की तैयारियां फिलहाल न के बराबर है। स्वास्थ्य विभाग भी तैयारी और बचाव के साथ टेस्टिंग के नाम पर क्वारंटीन भूमिका में दिखाई दे रहा है तो लोग भी नहीं चेत रहे हैं। सीएमओ खुद कोरोना पॉजिटिव आकर होम आइसोलेट हैं। वहीं प्रशासन के बड़े अफसर चुनावी तैयारियों में मशगूल हैं। हाल यह है कि जिले की करीब 28 लाख की आबादी महज 904 निगरानी समितियों के भरोसे है। यह निगरानी समितियां कितनी जिम्मेदारी निभा रहीं हैं यह जग जाहिर है।

जिले में कोरोना केस की रफ्तार लगातार गति पकड़ रही है। सोमवार तक कुल 625 एक्टिव केसों के साथ जिले में कोरोना का आंकड़ा धीरे-धीरे हजार की ओर बढ़ रहा है। इसके बाद भी पहली और दूसरी लहर जैसी प्रशासनिक सजगता इस बार जमीन पर नहीं दिखाई पड़ रही है। जिला प्रशासन की ओर से रोजाना जारी किए जाने वाले कोरोना बुलेटिन पर ही नजर डाली जाए तो उसमें भी बस प्रतिदिन पॉजिटिव आने वाले केस की संख्या अपडेट रहती है बाकी आंकड़े यथावत दिखाई दे रहे।

बुलेटिन में दिखाया जा रहा है कि वर्तमान में जिले में होम आइसोलेट मरीजों की संख्या 494 हैं जबकि पखवारे भर के दौरान कुल एक्टिव केस 625 हैं। लाख टके का सवाल यह है कि जिन 904 निगरानी समितियों के सक्रिय होने का दावा किया जा रहा है आखिर वे समितियां कहां सक्रिय हैं, जबकि नगरीय और ग्रामीण क्षेत्रों में डोर टू डोर लोगों को किसी समिति के दर्शन नहीं हो रहे हैं।

बुलेटिन में झोल, व्यवस्थाओं की खुल रही पोल

कोरोना बुलेटिन में एक झोल सामने आया है। बुलेटिन में पहली और दूसरी लहर के बाद कुल कोरोना मरीजों की तादाद 17707 दर्शाई गई है, जबकि ठीक होने वाले मरीजों की तादाद 16792 बताई जा रही है। इसे सच मान लिया जाए तो वर्तमान में 915 एक्टिव केस होने चाहिए, जबकि सामने आया आंकड़ा 625 एक्टिव केसों का है। सिर्फ यही नहीं आंकड़ों की बाजीगरी देखनी है तो बुलेटिन खंगाल लीजिए। जो तैयारी का खाका पहली और दूसरी लहर में खींचा गया था वही बरकरार है। इस संबंध में बातचीत करने के लिए जब सीएमओ को फोन किया तो उन्होंने रिसीव ही नहीं किया।

एल टू और एल थ्री के अस्पतालों और सीएचसी के अस्पतालों में दर्ज सुविधाओं में कोई फेरबदल नहीं है। सभी अस्पतालों में आक्सीजन और तैयारी का दावा है लेकिन हकीकत यह है कि एल टू छोड़कर सीएचसी मवई, बीकापुर, पूराबाजार में हाल बेहाल हंै। भरोसेमंद सूत्रों की मानें तो जिला मुख्यालय पर भी अस्पतालों में पहले जैसी तैयारियां नहीं हैं। कोरोना बुलेटिन में जिन चार निजी अस्पतालों को कोविड हॉस्पिटल में तब्दील किए जाने का उल्लेख है अब वहां कोई इंतजाम नहीं है।

इस बार एंटीजेन टेस्ट फिलहाल बंद

जिला अस्पताल के आरडीसी सेंटर को छोड़ दिया जाए तो तीसरी लहर के दौरान अभी तक एंटीजेन टेस्ट की शुरुआत नहीं हुई है। दूसरी लहर में जिला प्रशासन की ओर से बाकायदा रोस्टर बना कर शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में एंटीजेन टेस्ट किया जा रहा था, जिससे बड़ी संख्या में कोरोना केस सामने आ रहे थे। इस बार एंटीजेन टेस्ट की कोई कवायद नहीं शुरू की गई है, जबकि नगर निगम रोजाना निगरानी समितियों की बैठकों का दावा कर निगरानी की बात कर रहा है।

अभी हाल ही में मुख्यमंत्री की ओर से प्रधानों के साथ वर्चुअल संवाद में उन्हें निगरानी के लिए कहा गया। प्रधानों से कहा गया है कि वे बच्चों और बीमार बुजुर्गों के साथ कितनों का गांव में टीकाकरण हुआ कितनों का नहीं सूची बना कर सम्बन्धित एएनएम को सौंपे। फिलहाल चुनावी मौसम में मुख्यमंत्री की यह अपील प्रधान जी पालन करते नही दिखाई दे रहे हैं।

यह भी पढ़ें:-यूपी चुनाव 2022: बागपत में राजनीतिक दलों ने नहीं जताया आधी आबादी पर भरोसा

संबंधित समाचार