उन्नाव: दिलचस्प मोड़ पर सदर सीट का चुनाव, प्रचार में जुटे दस उम्मीदवार
उन्नाव। विधानसभा चुनाव को लेकर तमाम राजनैतिक दलों के बीच रस्साकस्सी तेज हो गई है। वहीं प्रत्याशी भी पूरी ताकत से चुनावी समर में कूद गए हैं। नामांकन प्रक्रिया के बाद अब 59 प्रत्याशी अपने अपने पक्ष में माहौल बनाने के लिए क्षेत्रीय जनता के बीच में जा रहे हैं। ऐसे में सबसे दिलचस्प सीट …
उन्नाव। विधानसभा चुनाव को लेकर तमाम राजनैतिक दलों के बीच रस्साकस्सी तेज हो गई है। वहीं प्रत्याशी भी पूरी ताकत से चुनावी समर में कूद गए हैं। नामांकन प्रक्रिया के बाद अब 59 प्रत्याशी अपने अपने पक्ष में माहौल बनाने के लिए क्षेत्रीय जनता के बीच में जा रहे हैं। ऐसे में सबसे दिलचस्प सीट इस बार चुनाव में सदर विधानसभा की है।
यहां दस उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं। इसी सीट पर कांग्रेस उम्मीदवार माखी कांड की पीडिता की मां आशा हैं। वहीं पीडिता के पैरोकार देवेंद्र सिंह बसपा से अपनी दावेदारी कर रहे हैं।
सदर सीट पर समाजवादी पार्टी का रहा है दबदबा
बता दें कि सदर सीट पर लंबे समय तक समाजवादी पार्टी का दबदबा रहा है। यहां पूर्व मंत्री मनोहर लाल उनके बेटे दीपक कुमार व भाई रामकुमार ने सपा से विधानसभा तक सफर तय किया है, जब कि मोदी लहर में 2014 उपचुनाव में पंकज गुप्ता भाजपा से विधायक बनें। अबकी वह तीसरी बार विधानसभा में भाजपा से उम्मीदवार हैैं।
वहीं पिछले 53 वर्षों से कांग्रेस इस सीट पर अपना खाता नहीं खोल पाई है। वहीं बसपा से माखी कांड से जुडे पीडिता के पैरोकार देवंेद्र सिंह और सपा से दीपक कुमार के बेटे डा0 अभिनव चुनावी मैदान में हैं। सरकारी आंकडों के अनुसार सदर सीट पर 3,81,370 मतदाता हैं। जिनमें पुरूष मतदाताओं की संख्या 2,09,832 है, जब कि 1,70,920 महिला वोटर हैं। 21 थर्ड जेंडर लोग भी चुनाव में वोटिंग करेंगे।
उन्नाव सदर सीट का इतिहास
सदर विधानसभा सीट को सपा का गढ़ माना जाता है, लेकिन मोदी लहर के बाद लगातार दो बार सपा को हार का मंुह देखना पडा। इस सीट पर पहली बार कांग्रेस के लीलाधर विधायक बने थे।
1957 के चुनाव में पीएससी पार्टी से चैधरी खजान सिंह, 1962 और 1967 में कांग्रेस के जियाउर रहमान अंसारी, 1969 में भारतीय क्रांति दल से अनवर अहमद, 1974 में बीकेडी पार्टी से सहदेव पाल, 1977 में जनता पार्टी से चंद्रपाल सिंह, 1980 में जनता पार्टी से सहदेव पाल, 1985 में लोकदल से मनोहर लाल, 1989 में जनता दल से मनोहर लाल, 1991 में बीजेपी से शिवपाल सिंह यादव, 1993 में सपा से मनोहर लाल, 1996 के चुनाव में मनोहर लाल के बेटे दीपक कुमार, वर्ष 2000 में सदर सीट पर उपचुनाव में दीपक कुमार के भाई राम कुमार, 2002 में बीएसपी के कुलदीप सिंह सेंगर, 2007 में सपा से दीपक कुमार, 2012 में दीपक कुमार, 2014 उपचुनाव में बीजेपी से पंकज गुप्ता, 2017 के चुनाव में पंकज गुप्ता फिर भाजपा से जीते।
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