बरेली: उसे देखा ताे देखते ही रह गया… एक प्रोफाइल पिक्चर ने बनाया दीवाना

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रजनेश सक्सेना, बरेली। सोशल मीडिया पर तमाम तरह की ब्लैकमेलिंग, फ्रॉड जैसे किस्से आपने जरूर सुने होंगे। अब तो सोशल मीडिया पर यह एक आम बात हो गई है। आए दिन कोई न कोई साइबर क्राइम करने वालों का शिकार बन जाता है। अगर आपसे कहा जाए कि इसी सोशल मीडिया की वजह से दो …

रजनेश सक्सेना, बरेली। सोशल मीडिया पर तमाम तरह की ब्लैकमेलिंग, फ्रॉड जैसे किस्से आपने जरूर सुने होंगे। अब तो सोशल मीडिया पर यह एक आम बात हो गई है। आए दिन कोई न कोई साइबर क्राइम करने वालों का शिकार बन जाता है। अगर आपसे कहा जाए कि इसी सोशल मीडिया की वजह से दो अंजान 4 सालों में ही एक दूजे के हो गए। तो शायद आपको हैरानी न हो। मगर आज की कहानी जिसकी है उनका किस्सा थोड़ा सा अलग है। आज की कहानी है पीलीभीत में रहने वाले बरेली में तैनात खंड शिक्षा अधिकारी अवनीश प्रताप और बरेली में रहने वाली शीतल की। किस तरह से ये दोनों सोशल मीडिया पर मिले और आज जन्मों जन्मों के लिए एक दूजे के हो गए। चलिए जानते हैं यह कहानी अवनीश की ही जुबानी…

यह बात है वर्ष 2013 की…उस समय मैं बीएड की पढ़ाई कर रहा था। 9 सितंबर का दिन था। मैं फेसबुक पर पोस्ट देख रहा था। उसी समय मेरे पास एक नोटिफिकेशन आया। जिसमें शीतल को फेसबुक ने फ्रेंड बनाने के लिए सजेस्ट किया था। सजेशन देखकर मैंने शीतल का प्रोफाइल देखना शुरू कर दिया। सबसे पहले मेरी नजर शीतल के प्रोफाइल पिक्चर पर पड़ी। कुछ देर तक तो मैं शीतल का फोटो देखते ही रह गया। मगर फिर मैंने शीतल का आगे का प्रोफाइल चैक करना शुरू किया। तो पता लगा कि शीतल बरेली की रहने वाली है और इन दिनों ग्रेजुएशन कर रही है। बस फिर क्या…मैंने लगे हाथों शीतल को फ्रेंड रिक्वेस्ट भेज दी। मगर शीतल 14 दिनों तक मेरी रिक्वेस्ट एक्सेप्ट नहीं की। 15वें दिन जब शीतल ने मेरी रिक्वेस्ट एक्सेप्ट की तो मेरी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। रिक्वेस्ट एक्सेप्ट होते ही मैंने तुरंत Hii का मैसेज छोड़ दिया। इसके बाद उधर से भी Hello में रिप्लाई आया। इसके बाद धीरे-धीरे हम लोगों की बात शुरू हो गई। मैंने अपने बारे में शीतल को सब कुछ बताया और शीतल ने अपने बारे में मुझे पूरी जानकारी दी। इस तरह हमें बात करते-करते करीब दो साल बीत चुके थे। और अब आ चुकी थी 2015। अब तक हमारी दोस्ती काफी गहरी हो चुकी थी। मगर अभी तक एक भी बार हमारी बात कॉल पर नहीं हुई थी। इस बीच में एक दो बार शीतल से नंबर मांग चुका था। मगर उसने नहीं दिया। इसी बीच शीतल ने भी बीएड करना शुरू कर दिया था।

नंबर मिलने के चार महीने बाद सुनी आवाज
अवनीश बताते है कि दो साल बात करने के बाद शीतल मुझे नंबर देने के लिए तैयार हुई। इसके बाद हम लोग फेसबुक छोड़ व्हाट्सएप पर बात करने लगे। मगर हकीकत यह है कि नंबर मिलने के चार महीने बाद तक मेरी और शीतल की बात कॉल पर नहीं हुई थी। हम दोनों ने अभी तक किसी की आवाज तक नहीं सुनी थी। पूरे चार महीने के बाद नवंबर में हमारी पहली बार कॉल पर बात हुई। वो भी एक असाइनमेंट को समझाने के लिए। दरअसल, हम दोनों की बीएड के एक असाइनमेंट को लेकर बात हो रही थी। चूंकि मैं बीएड पहले ही कर चुका था इसलिए मैं अक्सर उसे असाइनमेंट के बारे में बताता रहता था। उस दिन भी असाइनमेंट को लेकर बात चल रही थी। मगर चैट पर शीतल उसे समझ नहीं पा रही थी। इसलिए मैंने उस दिन पहली बार कॉल की। जब शीतल की पहली आवाज मेरे कानों में पड़ी तो एक अलग सा सुकून मिला। इसके बाद आए दिन कॉल पर हमारी बातें होने लगीं।

लेखपाल में सिलेक्शन हुआ तो किया प्रपोज
इन्हीं सब बातों के बीच एक साल और बीत चुका था। 10 मार्च 2016 को मेरा लेखपाल का रिजल्ट आया। जिसमें मेरा सिलेक्शन हो गया था। इस खुशी को शीतल के साथ शेयर करने के लिए मैंने उसे फोन किया। फोन उठाते ही शीतल बोली- क्या बात है? आज बहुत खुश लग रहे हो। मैंने कहा बात ही कुछ ऐसी है…इसके बाद मैंने शीतल को बता दिया कि मेरा सिलेक्शन लेखपाल के लिए हो गया है। जिसके बाद शीतल भी बहुत खुश हुई। रिजल्ट आने के 10 दिन बाद यानि 20 मार्च को मैंने शीतल के लिए सीधे शादी के लिए प्रपोज किया। तो पहले वो अचानक से कुछ सहमी…फिर बाद में बोली- मां से बात कर लो। मगर मैं भी अपनी जिद पर था। मैंने कहा कराओ मां से बात।

मां से बात हुई तो बोली- तुमसे मिलना चाहते हैं
शीतल को शादी के लिए प्रपोज करने के करीब आठ दिन बाद मैंने उनकी मां से बात की। इससे पहले ही शीतल हम दोनों के बारे में मां को बता चुकी थी। मां से बात करने पर उन्होंने कहा कि वो मुझसे मिलना चाहती हैं। उन्होंने घर आने की इच्छा जताई। इस पर मैंने भी उन्हें घर आने के लिए बोलकर अपने परिवार में पूरी बात बता दी। इसके बाद मैंने शीतल से मिलने के लिए कहा। सोचा अब जब बात दोनों परिवारों को पता चल ही गई है। तो क्यों न अब शीतल से मिल ही लिया जाए। फिर हमने एक दिन मिलने का फैसला लिया और तारीख चुनी गई 30 अप्रैल।

जब पहली नजर पड़ी, तो दिल टूट सा गया
पहली बार हम लोग महात्मा ज्योतिवा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय में मिले। उस वक्त मेरे साथ मेरा छोटा भाई गया था। और शीतल के साथ उसकी दोस्त यति आई थी। जब मेरी और शीतल की पहली नजर मिली तो मेरा दिल अचानक से टूट सा गया। सोचा कि जो सोचकर आए थे, शीतल वैसी नहीं है… चेहरा वही था, जो मैंने 2013 में देखा था। मगर शीतल की हाईट मुझसे काफी कम थी। मगर ये बात मैंने शीतल को नहीं बताई। सोचा कि कहीं वो बुरा न मान जाए। यूनिवर्सिटी में मुलाकात के बाद हम लोग फिनिक्स मॉल घूमने गए। इसके बाद मैंने शीतल की दोस्त यति से अपने दिल की बात कह दी। उसने बाद में शीतल को बताया। मगर शीतल को मेरी हाईट से कोई दिक्कत नहीं थी। वह मुझसे शादी करने के लिए तैयार थी। इसी बात को लेकर तीन महीने बीत चुके थे। यति और छोटे भाई ने मुझे काफी समझाया। मगर मुझे यह बात समझ नहीं आ रही थी। इसके बाद किसी ने मुझसे कहा कि बेटा कोई भी लड़की तुम्हें एकदम परफेक्ट तुम्हारे हिसाब से नहीं मिल सकती। जिंदगी उसी के साथ बितानी चाहिए जो तुम्हें और तुम्हारे परिवार को बेहतर समझे। तब मुझे कुछ बात समझ में आई।

जसौली स्कूल में हुई मुलाकात के बाद मैं हो गया तैयार
उस व्यक्ति की बात समझने के बाद हम दोनों ने एक बार फिर से मिलने का फैसला लिया। उस समय शीतल की बीएड की जसौली स्कूल में ट्रेनिंग चल रही थी। मैं उससे मिलने के लिए वहीं पर चला गया। हम दोनों ने बैठकर काफी देर तक बातचीत की और दोनों शादी के लिए तैयार हो गए। वहां से फिर से मेरा दिल और तेजी से शीतल के लिए धड़कने लगा था। अब बात आई परिवारों की… तो वो दिन भी अब करीब आ चुका था जब शीतल के परिवार वाले मेरे घर आने वाले थे।

दो महीने बाद परिवार वाले आए घर
जसौली स्कूल में हुई हमारी बात के करीब दो महीने बाद 10 अक्टूबर, 2017 को शीतल के परिवार वाले हमारे घर आए। मेरे परिवार वालों से बातचीत हुई। तो दोनों फैमलियां तैयार हो गईं। मगर शीतल की मां ने शीतल से पूछा कि बेटी… जहां तूने जाने का फैसला लिया है, वहां पर आबादी कम और जंगल ज्यादा है। क्योंकि मेरे घर के आस-पास का क्षेत्र पेड़ पौधों से ज्यादा घिरा हुआ था। इस पर शीतल ने जबाव दिया कि वो मुझे जहां भी रखेंगे मैं रह लूंगी। इसके बाद शीतल के परिवार वाले भी मान गए। उनके मेरे घर आने के छह दिन बाद यानि 16 अक्टूबर को हमारा परिवार शीतल के घर बरेली आया। तो वहीं पर उन्होंने मेरा तिलक कर दिया। इसके बाद 25 अक्टूबर, 2017 को हमारी इंगेजमेंट हुई। और 19 जनवरी को हमारी शादी हो गई। इस तरह से हमारी फेसबुक से शुरू हुई कहानी अब जन्मों जन्मों का साथ बन चुकी है। अब हमारे एक बेटा भी है। जिसकी उम्र अभी महज 3 वर्ष है। इस तरह से यह कहानी एक मुकाम तक पहुंचती है।

 

 

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