पीलीभीत: तराई में फैला सूदखोरों का मकड़जाल, सिस्टम बेहाल

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Edited By Amrit Vichar
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 पीलीभीत, अमृत विचार। तराई में सूदखोरों के ब्याज के चक्रव्यूह में फंसकर एक और जान चली गई। इसी के साथ सूदखोरों पर शिकंजा कसने के पुलिस के दावे हवाहवाई साबित हो गए। एक दिन पहले शहर के युवक के खुदकुशी करने की घटना के बाद परिवार ने खुलकर सूदखोर की प्रताड़ना को जिम्मेदार ठहराया है। …

 पीलीभीत, अमृत विचार। तराई में सूदखोरों के ब्याज के चक्रव्यूह में फंसकर एक और जान चली गई। इसी के साथ सूदखोरों पर शिकंजा कसने के पुलिस के दावे हवाहवाई साबित हो गए। एक दिन पहले शहर के युवक के खुदकुशी करने की घटना के बाद परिवार ने खुलकर सूदखोर की प्रताड़ना को जिम्मेदार ठहराया है। इसकी तहरीर भी पुलिस को दी गई। हालांकि ये कोई पहला मामला नहीं। इससे पहले भी कई केस सामने आ चुके हैं। मगर, कार्रवाई को मुकाम नहीं मिल सका।

तराई बेल्ट में लंबे समय से सूदखोरों का तगड़ा नेटवर्क है। शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक सूदखोर सक्रिय हैं। उन्हें किसी तरह का खौफ नहीं है। जरूरतमंदों को कर्ज देने के बाद मनमाना ब्याज वसूलते हैं। आलम ये है कि अगर किसी ने कोई चीज गिरवी रख दी तो शायद ही जिंदा रहते छुड़ा पाए। असल रकम चुकता करना तो दूर की बात।

सिर्फ ब्याज अदा करने में भी उसकी कमर तोड़ दी जाती है। 20 लाख से अधिक आबादी वाले जिले में निर्धारित दर पर ब्याज पर रकम देने वाले तो गिने-चुने साहूकार हैं। मगर, मनमाना ब्याज पर कर्ज देने वाले सूदखोरों का पूरा मकड़जाल फैला हुआ है। आलम ये है कि ब्याज की रकम निर्धारित समय पर नहीं मिल सकी तो उस पर भी ब्याज जोड़ दिया जाता है।

इन सूदखोरों की प्रताड़ना से तंग आकर कई बार पहले भी लोग जान दे चुके हैं। उन पर सख्ती के दावे भी किए गए, लेकिन सब कुछ चंद दिनों तक सीमित रहा। कभी शिकायतकर्ता के खुलकर सामने न आने तो कभी साक्ष्य के अभाव में आसानी से प्रकरण को दबा दिया गया। एक दिन पूर्व मोहल्ला आसफजान के निवासी आकाश शर्मा के खुदकुशी की वजह भी सूदखोर की प्रताड़ना बताई गई है।

बाइक गिरवी रखकर लिए गए 15 हजार रुपये के एवज में 35 हजार की मांग की जा रही थी। यानि उधार ली गई रकम के दो गुना से अधिक। इसी तरह के कई अन्य जरूरतमंद भी शहर से देहात तक ब्याज के फेर में फंसकर सब-कुछ गंवा चुके हैं। मगर, सिस्टम सूदखोरों पर सख्ती नहीं कर सका है।

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