अमृत विचार अभियान : लोगों ने नहीं देखा पार्षद का चेहरा, ससुर संभाल रहे काम
मुरादाबाद, अमृत विचार। मुरादाबाद स्मार्ट सिटी का वार्ड नंबर एक। मुख्य सड़कें चौड़ी, नई कॉलोनियों में बन रहे मकान को जाने के लिए रास्ते की दरकार। सफाई व्यवस्था बदहाल, नाली के पानी निकासी के इंतजाम न होने से हर दिन आमने-सामने होने की नौबत से वार्ड में शांति व्यवस्था में खलल। यही पहचान है वार्ड …
मुरादाबाद, अमृत विचार। मुरादाबाद स्मार्ट सिटी का वार्ड नंबर एक। मुख्य सड़कें चौड़ी, नई कॉलोनियों में बन रहे मकान को जाने के लिए रास्ते की दरकार। सफाई व्यवस्था बदहाल, नाली के पानी निकासी के इंतजाम न होने से हर दिन आमने-सामने होने की नौबत से वार्ड में शांति व्यवस्था में खलल। यही पहचान है वार्ड नंबर एक शाहपुर तिगरी की। अमृत विचार टीम की पड़ताल में वार्ड के व्यवस्था की आंखों देखी।
24 जुलाई 1994 में नगर निगम में शामिल हुआ वार्ड एक शाहपुर तिगरी। मुरादाबाद-दिल्ली रोड से एक डेढ़ किलोमीटर अंदर जाने पर शुरु हुई वार्ड की सीमा। मुख्य सड़क चौड़ी व साफ सुथरी दिखने से लगा कि वाकई स्मार्ट सिटी की ओर कदम बढ़ा है। मगर मुख्य सड़क छोड़ गलियों में आते ही यह भाव काफूर हो गया। अंदर की गलियों में नाली टूटी, कहीं सड़क पर पसरा नाली का पानी और उससे बदबू से नागरिक की चिंता, ऊपर से इनकी कोई सुनने वाला नहीं। वार्ड के पार्षद के घर से बमुश्किल 300 मीटर अंदर की गली के रहने वालों को पार्षद का नाम तो पता है लेकिन उनका दर्शन नसीब नहीं। पूछने पर पता चला कि कभी उनके बीच आईं ही नहीं। सारा काम देखने वाले उनके ससुर छत्रपाल सिंह ही आते हैं और समस्याओं की जानकारी लेते हैं। निगम प्रशासन के असहयोग से वह भी बेवसी जताते हैं।
सोहनलाल थे यहां के आखिरी प्रधान
शाहपुर तिगरी 24 जुलाई 1994 में नगर निगम में शामिल हुआ। यहां के आखिरी प्रधान सोहन लाल थे। जो केन सोसायटी मुरादाबाद के 2008-12 तक चेयरमैन रहे छत्रपाल सिंह के पिता थे। छत्रपाल के नाम से वर्तमान पार्षद प्रियंका की पहचान है, वह पार्षद के ससुर हैं। वही पार्षद के दायित्वों का निर्वाह कर रहे हैं चाहे वार्ड में नागरिकों से मिलकर उनकी समस्या का समाधान कराना हो या निगम प्रशासन और महापौर से मिलकर वार्ड में विकास कार्यों के न होने का उलाहना देने का। सब कुछ उन्हीं के जिम्मे।
सामने नहीं आईं पार्षद, ससुर ने ही बताया वार्ड का हाल
वार्ड की पार्षद प्रियंका के घर पहुंचने पर वह सामने नहीं आईं। घर के बड़े खुले हाल में उनके ससुर पूर्व चेयरमैन छत्रपाल सिंह मिले। सहजता व शालीनता से उन्होंने वार्ड के सृजन से लेकर परिवार के राजनीतिक जुड़ाव की जानकारी दी। बोले वह स्वयं केन सोसायटी मुरादाबाद में 2008-12 तक चेयरमैन रहे। उनके पिता सोहनलाल निगम के वार्ड में शामिल होने से पहले यहां के ग्राम प्रधान रहे। उन्होंने बताया कि वार्ड की आबादी 25 हजार और मतदाता 10 हजार से अधिक हैं। उनकी पुत्रवधू प्रियंका वर्तमान में बसपा समर्थित पार्षद हैं। इसके पहले कृष्ण कुमार काले पार्षद थे।
भाजपा के बहुमत वाले बोर्ड पर असहयोग का दोष
छत्रपाल सिंह ने बताया कि विकास कार्य में भाजपा के बहुमत वाले बोर्ड में भेदभाव झेलना पड़ता है। उनका कहना है कि वार्ड में कई सड़कों का निर्माण कराया गया। लेकिन पांच शैय्या अस्पताल की डिमांड, दो सुलभ शौचालय बनवाने की मांग महापौर और अधिकारियों के सामने रखी लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
मुख्य सड़क पर हाईमास्ट खराब
वार्ड की मुख्य सड़क पर हाईमास्ट खराब होने की शिकायत आसपास के दुकानदारों ने की। अन्य स्ट्रीट लाइटों में कुछ के जलने कुछ के खराब होने की जानकारी दी।
नहीं लगा गृहकर शिविर
पार्षद के ससुर छत्रपाल सिंह ने बताया कि वार्ड में गृहकर वसूली के लिए शिविर लगवाने की मांग 2019 में की थी लेकिन आज तक नहीं लगा। ऐसे में गृहकर जमा करने में लोगों को असुविधा होती है।
नहीं लगा गृहकर शिविर
पार्षद के ससुर छत्रपाल सिंह ने बताया कि वार्ड में गृहकर वसूली के लिए शिविर लगवाने की मांग 2019 में की थी लेकिन आज तक नहीं लगा। ऐसे में गृहकर जमा करने में लोगों को असुविधा होती है।
वार्ड में दो नाले बनाने का प्रस्ताव
वार्ड में दो नाले बनाने का प्रस्ताव था, लेकिन नहीं बने। एक नाला जो बरूआ अस्पताल से सौदाई मिलक तक की स्वीकृति चुनाव की आचार संहिता लागू होने से ठीक पहले मिली है।
18 सफाई कर्मी, काम एक के भरोसे
वार्ड में कागज में तो 18 सफाई कर्मचारी की तैनाती है। मगर काम का जिम्मा आउट सोर्सिंग से नियोजित सफाई कर्मचारी ओमप्रकाश ही निभाता है। वार्ड के सफाई सुपरवाइजर मुकेश कुमार हैं।
नगर आयुक्त संजय चौहान ने कहा कि सफाई के लिए हर वार्ड में कर्मी तैनात हैं। हमारे सामने वहां के नागरिकों ने शिकायत नहीं की। न पार्षद के स्तर से 18 सफाईकर्मियों में से केवल एक के वास्तविक काम करने की जानकारी मिली। यदि ऐसा है तो इसे देखेंगे। नागरिक नगर निगम के कंट्रोल रूम के नंबर पर सीधे शिकायत दर्ज कराएं।
बोले लोग
सफाईकर्मी नाला साफ करने नहीं आते, झाडू़ लगना तो दूर की बात है। चार साल होने को है पार्षद ने कभी गली में आने तक की जहमत नहीं उठाई। उनके ससुर सफाई में कमी को स्वीकारते हैं लेकिन दोष निगम प्रशासन के माथे पर मढ़ते हैं। -सर्वेश, मिलक शाहपुर तिगरी
सफाईकर्मी का दर्शन कभी ही होता है। नाले की सफाई नहीं होती। दिनभर लोगों के घर का पानी नाली चोक होने के चलते ओवरफ्लो होने पर पूरे सड़क पर पसर जाता है। -जगपाल, निवासी, मिलक शाहपुर तिगरी
सफाई नहीं होती, पथ प्रकाश बदहाल है। पार्षद से समस्या कैसे कहें। आज तक उनका दर्शन ही नहीं होता। उनके परिवार के सदस्य लोग ही सारा कामकाज देखते सुनते हैं, अधिकारी कोई आता नहीं। -रामलाल, वार्ड निवासी
सफाई व्यवस्था की बदहाली से बुरा हाल है। बरसात में तो गली तालाब बन जाती है। यहां की समस्या को सोशल मीडिया पर पोस्ट किया, लेकिन न तो जनप्रतिनिधियों ने सुना और न अधिकारियों ने ध्यान दिया। -अजीत कुमार, वार्ड निवासी
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