मुरादाबाद : सैन्य गतिविधियों की भी जानकारी हासिल करेंगे प्रशिक्षु डिप्टी एसपी
मुरादाबाद/अमृत विचार। डॉ. भीमराव पुलिस अकादमी में डिप्टी एसपी को पढ़ाए जाने वाले पाठ्यक्रम में एक और परिवर्तन करने की तैयारी है। योजना के तहत प्रशिक्षु डिप्टी एसपी को अब सैन्य गतिविधियों और जवानों के रहन-सहन की जानकारी दी जाएगी। विषम परिस्थितियों में वह किसी तरह से मोर्चा संभालते हैं, इसका भी प्रशिक्षण दिया जाएगा। …
मुरादाबाद/अमृत विचार। डॉ. भीमराव पुलिस अकादमी में डिप्टी एसपी को पढ़ाए जाने वाले पाठ्यक्रम में एक और परिवर्तन करने की तैयारी है। योजना के तहत प्रशिक्षु डिप्टी एसपी को अब सैन्य गतिविधियों और जवानों के रहन-सहन की जानकारी दी जाएगी। विषम परिस्थितियों में वह किसी तरह से मोर्चा संभालते हैं, इसका भी प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके लिए प्रशिक्षुओं को सीआरपीएफ ग्रुप सेंटर या फिर आर्मी कैंप में भेजा जाएगा।
हालांकि यह कोर्स में शामिल था, लेकिन अमल नहीं किया जाता था। वहीं, महिला प्रशिक्षुओं को बाइक चलाने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। यह दोनों सुझाव पाठ्यक्रम में होने वाले बदलाव में शामिल कर लिए गए हैं। पुलिस की पाठशाला कही जाने वाली डॉ. भीमराव आंबेडकर पुलिस अकादमी में आगामी समय में कई परिवर्तन देखने को मिलेंगे। इसकी शुरुआत वर्षों से डिप्टी एसपी को पढ़ाए जाने वाले पाठ्यक्रम से कर दी गई है। शुक्रवार को अकादमी पहुंचे डीजी ट्रेनिंग डॉ. राजेंद्र पाल सिंह ने पाठ्यक्रम में होने वाले बदलाव के संबंध में जानकारी दी थी।
बताया कि इसी सत्र से प्रशिक्षण पा रहे डिप्टी एसपी को निशानेबाजी में दक्ष बनाया जाएगा। इसके लिए 30 के बजाए 250 कारतूस दिए जाएंगे। यह कारतूस रिवाल्वर, पिस्टल, इंसास, एके-47, कार्बाइन और एलएमजी के होंगे। इसके अलावा विधि विज्ञान विषय में थ्योरी (सैद्धांतिक) की पढ़ाई के साथ प्रैक्टिकल अनिवार्य कर दिया गया है। 22 फरवरी से शुरू होने वाले प्रैक्टिकल के संबंध में विधि विज्ञान प्रयोगशाला में जानकारी दी जाएगी। जहां पर वह फील्ड में जाकर साक्ष्य को कैसे उठाना है, पैक करना, लेबल लगाना, साइबर और कंप्यूटर अपराध में कैसे साक्ष्यों को एकत्र करना, डीएनए, ट्रैप, विस्फोट, रक्त साक्ष्य और हत्या जैसे अपराधों के दौरान सबूत एकत्र करना सिखाया जाएगा।
महिला प्रशिक्षुओं को बाइक चलाने का दी जाएगी ट्रेनिंग
पाठ्यक्रम में हुए दो बदलाव के बाद भविष्य में कुछ अन्य बदलाव करने की भी योजना है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार अब तक प्रशिक्षुओं को चार पहिया वाहन चलाने का प्रशिक्षण दिया जाता है। शासन का मानना है कि पुरुष प्रशिक्षु तो बाइक चलाने में परिपक्य होते हैं, जबकि महिला प्रशिक्षु अधिकतम स्कूटी ही चला पाती हैं। लिहाजा उनको बाइक चलाने का प्रशिक्षण देने की तैयारी है। वहीं, एक साल के प्रशिक्षण के दौरान सभी प्रशिक्षुओं को सैन्य गतिविधियों, जवानों के रहन-सहन, विषम परिस्थितियों में मोर्चा लेने के संबंध में भी जानकारी दी जाएगी। इसके लिए उनको सीआरपीएफ ग्रुप सेंटर या फिर निकट के आर्मी कैंप भेजने की योजना है। अधिकारियों का दावा है कि यह दोनों सुझाव शासन स्तर पर तय कमेटी ने मंजूर कर लिए हैं। आगामी बैच के प्रशिक्षुओं को नए पाठ्यक्रम के अनुसार ही प्रशिक्षण देने की तैयारी है।
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