पी. चिदंबरम ने सीएम योगी पर बोला हमला, कहा- यूपी पर 6.91 लाख करोड़ का कर्ज
लखनऊ। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने कहा कि उत्तर प्रदेश पर 6.91 लाख करोड़ का कर्ज है। उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था को लेकर योगी आदित्यनाथ की समझ शून्य है, इसी वजह से संसाधनों की दृष्टि से बेहद सम्पन्न उत्तर प्रदेश में हर ओर बदहाली है। योगी आदित्यनाथ के शासन का …
लखनऊ। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने कहा कि उत्तर प्रदेश पर 6.91 लाख करोड़ का कर्ज है। उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था को लेकर योगी आदित्यनाथ की समझ शून्य है, इसी वजह से संसाधनों की दृष्टि से बेहद सम्पन्न उत्तर प्रदेश में हर ओर बदहाली है। योगी आदित्यनाथ के शासन का मॉडल तानाशाही, धार्मिक विद्वेष, जातिवाद, महिलाओं के प्रति हिंसा व पुलिसिया उत्पीड़न का सम्मिश्रण है। वह प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि प्रदेश के लोगों को सोचना चाहिए कि वे कैसी सरकार के लिए वोट दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश को बदहाली से सिर्फ कांग्रेस निकाल सकती है। नीति आयोग के आंकड़े पेश करते हुए चिदंबरम ने कहा कि उत्तर प्रदेश के लोग देश में सबसे मेहनती हैं लेकिन वे गरीबी के दलदल में फंसे हुए हैं। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की जीडीपी दर 2016-17 में 11.4 प्रतिशत थी, जो पांच साल में 6.4 प्रतिशत हो गई है।
प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय राष्ट्रीय औसत के आधे से भी कम है। योगी आदित्यनाथ के कार्यकाल में प्रति व्यक्ति आय में 1.9 प्रतिशत की गिरावट है। यूपी पर कर्ज का 40 प्रतिशत हिस्सा योगी आदित्यनाथ कार्यकाल में जुड़ा है। नीति आयोग के गरीबी सूचकांक के अनुसार प्रदेश की 37.9 प्रतिशत आबादी गरीब है। 12 जिलों में यह अनुपात 50 प्रतिशत से अधिक है, वहीं तीन जिलों श्रावस्ती, बहराइच व बलरामपुर में यह 70 प्रतिशत से अधिक है।
चिदंबरम ने कहा कि प्रदेश में बेरोजगारी दर देश में सबसे ज्यादा है। अप्रैल 2018 से 15 से 29 आयु वर्ग के युवाओं में बेरोजगारी दर दो अंकों में रही है जो राष्ट्रीय दर से ऊपर है। अप्रैल 2018 व मार्च 2021 के दौरान शहरी क्षेत्रों में हर चार में से एक युवा बेरोजगार था। सरकार में बड़ी संख्या में रिक्तियां हैं और सरकार पैसे की कमी के कारण उन्हें नहीं भर रही है। यूपी से दूसरे राज्यों में जाने वाले प्रवासियों की संख्या लगभग 12.3 मिलियन है, यानी उत्तर प्रदेश से संबंधित 16 व्यक्तियों में से एक यूपी से बाहर जा रहा है।
छात्र-शिक्षक अनुपात सभी राज्यों से सबसे खराब
प्रदेश सरकार पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि प्रदेश में शिक्षा और स्वास्थ्य दोनों की स्थिति दयनीय है। शिक्षकों की कमी को पूरा करने के लिए 2 लाख 77 हजार शिक्षकों की जरूरत है। यहां का छात्र-शिक्षक अनुपात सभी राज्यों से सबसे खराब है। आठ में से एक छात्र कक्षा 8 तक स्कूल छोड़ देता है। कॉलेज या विश्वविद्यालय स्तर पर सकल नामांकन अनुपात 26.3 प्रतिशत है।
पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश का नवजात मृत्यु दर 35.7 प्रतिशत है, शिशु मृत्यु दर 50.4 प्रतिशत है और पांच साल से कम के बच्चों का मृत्यु दर 59.8 प्रतिशत है जो राष्ट्रीय औसत से काफी ऊपर है। यूपी में एक हज़ार लोगों के लिए एक डॉक्टर भी नहीं है। डॉक्टरों का अनुपात 0.64 है, नर्सों का अनुपात 0.43 है और पैरामेडिकल कर्मियों का अनुपात 1.38 है।
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