शाहजहांपुर: देश को जरूरत पड़ी तो राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाऊंगी- अनामिका जैन अंबर
शाहजहांपुर,अमृत विचार। विधानसभा चुनाव में यूपी के का बा…गीत का शानदार और दमदार जवाब यूपी में बाबा…गाकर चर्चा में आईं कवियित्री डॉ. अनामिका जैन अंबर ने भविष्य में राजनीति से जुड़ने का संकेत दिया है। उन्होंने कहा कि अगर देश को उनकी जरूरत होगी तो वह इस बारे में जरूर सोचेंगी। एसएस कॉलेज में बृहस्पतिवार …
शाहजहांपुर,अमृत विचार। विधानसभा चुनाव में यूपी के का बा…गीत का शानदार और दमदार जवाब यूपी में बाबा…गाकर चर्चा में आईं कवियित्री डॉ. अनामिका जैन अंबर ने भविष्य में राजनीति से जुड़ने का संकेत दिया है। उन्होंने कहा कि अगर देश को उनकी जरूरत होगी तो वह इस बारे में जरूर सोचेंगी।
एसएस कॉलेज में बृहस्पतिवार को हुए कवि सम्मेलन में विशेष रूप से आमंत्रित डॉ. अनामिका अंबर ने कवि सम्मेलन से पूर्व होटल ग्रैंड आर्क में अमृत विचार के प्रतिनिधि से खास बातचीत की और बेबाकी से अपनी बात रखी। एक सवाल के जवाब में डॉ. अनामिका जैन अंबर ने कहा कि वैसे तो पिछले लोकसभा चुनाव में उन्हें प्रसपा (शिवपाल यादव का राजनीतिक दल) से चुनाव लड़ने का आमंत्रण मिला था, लेकिन उन्होंने मना कर दिया था।
वह कहती हैं कि अगर भविष्य में देश को उनकी जरूरत पड़ती है और आमजन भी इसकी स्वीकृति देता है, तो वह राजनीति में अवश्य सक्रिय भूमिका निभाने को तत्पर रहेंगी। डॉ. अनामिका जैन ने कहा जब-जब राजनीति अपने रास्ते से भटकी है, तब-तब सुधी साहित्यकारों ने उसे पटरी पर लाने का काम किया है और यह काम आज नहीं हो रहा, बल्कि सदियों से होता आया है।
राष्ट्रवादिता हर व्यक्ति में होती है और होनी चाहिए। राजनीति दूषित नहीं होनी चाहिए। राजनीति में पक्ष और विपक्ष दो पहलू होते हैं और उसी के अनुरूप सरकारों और राजनीतिक दलों को निर्णय लेना पड़ता है और उसकी बात के निर्णय का प्रभाव आमजनता पर पड़ता है।डॉ. अनामिका भले ही बुंदेलखंड की हों और विज्ञान की विद्यार्थी रही हों, लेकिन बुंदेलखंडी के साथ हिंदी पर भी उनकी पकड़ बहुत मजबूत है।
वह कहती हैं कि हिंदी कर्णप्रिय भाषा है, हिंदी में लिखा, पढ़ा और गाया जाने वाला श्रृंगार लोगों के हृदय तक पहुंचता है। एक सवाल के जवाब में वह कहती हैं कि कविता कभी भी मंच से दूर नहीं हुई। यदि कविता मंच से दूर हो जाएगी तो साहित्यकार अपनी रचना धर्मिता से मोह त्याग देंगे। उन्होंने उल्टा सवाल किया कि अगर कविता-गीत मंच से रूठ गए होते, तो कवि सम्मेलनों में देर रात तक इतनी भीड़ कभी कैसे जुटती।
बिना संगीत के लोग गीतों का आनंद लेकर झूमते रहते हैं। यह भी देखे बिना कि बैठे कहां हैं। जमीन पर जहां जगह मिल जाती है, वहां बैठकर लोग रात-रात भर कविताएं और गीत सुनकर आनंद लेते हैं, इसलिए यह कहना गलत है कि गीत और कविता मंच से विलुप्त हो गई थी। गीत हमेशा अमर रहे हैं।
वह कहती हैं कि खुशी की बात यह है आजकल टिकटॉक, रील्स के युग में लोग कवि सम्मेलनों को मोह नहीं छोड़ पा रहे हैं, ये बहुत बड़ी बात है। कवियों को चाहिए कि वह श्रृंगार के गीत रचकर अपने श्रोताओं और प्रशंसकों तक पहुंचाएं। अनामिका जैन अंबर ने बताया कि उन्होंने गजल-गीत के साथ गीत आधार मुक्तक का प्रयोग किया है, जो काफी सराहा जा रहा है।
गीत आधार मुक्तक लिखने में शिल्प का विशेष ध्यान रखना होता है। इसमें वह फिल्मी गीतों की चर्चित पंक्तियों को समाहित कर अपना गीत तैयार करती हैं, जिसे प्रशंसक बहुत पसंद कर रहे हैं। एक और सवाल के जवाब में अंबिका अंबर ने बताया कि अभी वह कवि सम्मेलनों का आनंद ले रही हैं, इसलिए फिल्मी गीतों की ओर कोई ध्यान नहीं दिया है। यदि मौका मिला, तो वह फिल्मों के लिए भी जरूर गीत लिखना चाहेंगी।
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