मुरादाबाद : दूसरों के पैन, आधार से जालसाज ले रहे लोन, बीते दो साल में 200 से अधिक शिकायतें साइबर थाने को मिलीं
मुरादाबाद,अमृत विचार। दूसरे के पैन कार्ड या आधार कार्ड से लोन लेने की जालसाजी के मामले तेजी से बढ़े हैं। इस तरह के ज्यादातर मामले कस्टमर लोन में देखे जा रहे हैं। जालसाज बैंकिंग संस्थान या मोबाइल फोन ऑपरेटरों के स्टोर से आपके दस्तावेज चोरी कर रहे हैं और विभिन्न दुकान या शोरूम से लोन …
मुरादाबाद,अमृत विचार। दूसरे के पैन कार्ड या आधार कार्ड से लोन लेने की जालसाजी के मामले तेजी से बढ़े हैं। इस तरह के ज्यादातर मामले कस्टमर लोन में देखे जा रहे हैं। जालसाज बैंकिंग संस्थान या मोबाइल फोन ऑपरेटरों के स्टोर से आपके दस्तावेज चोरी कर रहे हैं और विभिन्न दुकान या शोरूम से लोन पर मोबाइल फोन, एसी, फ्रीज, वॉशिंग मशीन आदि की खरीदारी कर लेते हैं। वहीं जब लगातार दो या तीन किश्तें जमा न होने के बाद बैंक कार्ड धारकों से संपर्क करते हैं तो उन्हें इस जालसाजी की जानकारी हो पाती है। बीते दो साल में ही इस तरह के 200 से अधिक शिकायतें साइबर थाने में आईं हैं। इनमें से 37 शिकायतों को दर्ज कर पुलिस ने 16 जालसाजों को गिरफ्तार भी किया है।
साइबर थाने से मिली जानकारी के मुताबिक यह तो वह आंकड़ा है जिसमें ठगी की रकम एक लाख रुपये से अधिक है। एक लाख से कम रकम वाले मामले तो हजारों में होंगे। चूंकि इस तरह के मामले की शिकायत संबंधित थाने में आती है। इसलिए इसका पूरा ब्यौरा मिलना मुश्किल है। साइबर थाने में तैनात विवेचकों के मुताबिक अक्सर लोग सिम कार्ड खरीदने के लिए अपने पैन कार्ड या आधार कार्ड की फोटो प्रतिलिपि पर हस्ताक्षर कर जमा करते हैं। वहीं सत्यापन की औपचारिकता पूरी होने के बाद स्टोर मालिक इन दस्तावेजों को कचरे में डाल देते हैं। यहीं से जालसाज दस्तावेज चोरी कर विभिन्न दुकानों से लोन पर मोबाइल फोन, एसी, फ्रीज, वॉशिंग मशीन आदि की खरीदारी कर लेते हैं।

किश्तें जमा न होने पर होती है जानकारी
जालसाज लोन पर सामान खरीदने के बाद बैंक की किश्तें तो जमा नहीं करते। ऐसे में जब दो से तीन किश्तें लगातार बाउंस होती है तो बैंक प्रतिनिधि लोन के समर्थन में लगाए गए दस्तावेज देखते हैं और उसके जरिए दस्तावेज मालिक का मोबाइल नंबर निकालकर तगादा शुरू कर देते हैं। वहीं जब पीड़ित उन्हें किसी तरह के लोन की बात को खारिज करता है तो उसे धमकी दी जाती है।
सत्यापन की तकनीक के अभाव में दिक्कत
बैंकों ने विभिन्न प्रतिष्ठानों को कस्टमर लोन जारी करने के अधिकार तो दिए हैं, लेकिन उनके पास दस्तावेजों के सत्यापन की कोई तकनीक नहीं है। दुकानदार लोन देने से पहले बैंक के प्रतिनिधि को दस्तावेजों की प्रतिलिपि भेज कर फोन पर बात करते हैं और महज कुछ सेकंड में लोन एकाउंट शुरू हो जाता है। इस दौरान यह भी नहीं देखा जाता कि लोन लेने वाले ने किस व्यक्ति का दस्तावेज जमा कराया है।
दो साल में 37 मामले दर्ज, 23 निस्तारित
साइबर थाने से मिली जानकारी के मुताबिक जनवरी 2020 से अब तक कुल 37 मुकदमे दर्ज हुए हैं। इनमें से पुलिस ने जांच के दौरान 23 मुकदमों का निस्तारण कर दिया है। इसी के साथ पुलिस ने 16 आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके पास से करीब दो करोड़ रुपये बरामद भी किए हैं। इसी क्रम में पुलिस ने विभिन्न बैंकों में खुले आरोपियों के खाते भी फ्रीज कराए हैं। इन खातों में करीब 30 लाख रुपये की रकम जमा हैं।
क्या करें, क्या ना करें
- कहीं भी आधार कार्ड या पैन कार्ड की फोटो प्रतिलिपि जमा ना करें
- बहुत जरूरी होने पर इन दस्तावेजों को अपने सामने ही स्कैन कराएं
- यदि दस्तावेज देना ही पड़े तो उसपर हस्ताक्षर किसी कीमत पर ना करें
- समय समय पर अपना क्रेडिट स्क्रोर चेक करते रहें
- क्रेडिट स्कोर में गिरावट होते ही लोन की स्थिति की जांच कराएं
- अपने साथ ठगी की जानकारी होने पर तत्काल पुलिस से संपर्क करें
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