मुरादाबाद : लंबे इंतजार के बाद ‘कवच’ से सुरक्षित होंगी मंडल की ट्रेनें

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 मुरादाबाद अमृत विचार। दुर्घटना रहित रेल संचालन का कवच मुरादाबाद को विलंब से मिलेगा। यानी कि कवच के सफल परीक्षण से हमें फिलहाल इतराने की जरूरत नहीं है। सेंसर आधारित सुरक्षा प्रणाली मेट्रो में सेवा दे रही है। अब इसे लंबी दूरी की रेल सेवा के लिए इस्तेमाल में लाया जाएगा। पहले दक्षिण की ट्रेनों …

 मुरादाबाद अमृत विचार। दुर्घटना रहित रेल संचालन का कवच मुरादाबाद को विलंब से मिलेगा। यानी कि कवच के सफल परीक्षण से हमें फिलहाल इतराने की जरूरत नहीं है। सेंसर आधारित सुरक्षा प्रणाली मेट्रो में सेवा दे रही है। अब इसे लंबी दूरी की रेल सेवा के लिए इस्तेमाल में लाया जाएगा। पहले दक्षिण की ट्रेनों में इसका उपयोग होगा।
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और रेलवे बोर्ड के चेयरमैन वीके त्रिपाठी के ट्रायल में कवच को सफलता तो मिल गई।लेकिन, बेहद खर्चीली इस प्रणाली को मंडल तक पहुंचने में देर लगेगी। देश की राजधानी से सटे मंडल में ऑटोमैटिक सिग्नल प्रणाली से ट्रेनों का संचालन पूरा नहीं हो पाया है। जहां तक मुरादाबाद की बात है तो यह स्टेशन 1837 में स्थापित हुआ। 149 साल पुराने स्टेशन के पास 11 रेल ट्रैक है। सात प्लेटफार्म है और 240 ट्रेनों का रोजाना आवागमन होता है।

वर्ष 2012 में मंडल की मुख्य लाइन विद्युतीकृत हो गई। यानी कि तभी से रेल संचालन में डीजल के अलावा इलेक्ट्रिक इंजन का प्रयोग हो रहा है। गाजियाबाद से आलमबाग तक मंडल क्षेत्र फैला हुआ है। मुरादाबाद से गाजियाबाद में अधिकतम 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से ट्रेनों का संचालन हो सकता है। जबकि मुरादाबाद से बरेली के बीच निधार्रित गति से ट्रेनों का संचालन नहीं हो पाता है, जिसके पीछे पुरानी रेल पटरी और सिग्नल प्रणाली को कारण बताया जाता है। मुरादाबाद से दलपतपुर-रामपुर और बरेली के बीच कई सेक्शन में कॉशन से ट्रेनों को चलाया जाता है। तीन साल पहले रामपुर के नजदीक मरम्मत के लिए लखनऊ जा रही मालगाड़ी रामपुर के नजदीक बेपरी हो गई थी।

वर्ष 2017 में कोसी नदी के नजदीक राज्यरानी एक्सप्रेस के छह डिब्बे में बेपटरी हो गए थे। मुरादाबाद और अमरोहा के बीच दिल्ली फैजाबाद एक्सप्रेस के तीन डिब्बे साल 2018 में पटरी से उतर गए थे। साल 2016 के नवंबर माह में रात के 10 बजे कटघर क्षेत्र में जलियांवाला बाग एक्सप्रेस के दो डिब्बे ट्रैक से उतर गए थे। इन घटनाओं में में रेल पटरी टूटने और कोच की खराबी की बातें प्रमाणित हो चुकी हैं। जबकि साल 2019 के अगस्त माह में मुरादाबाद-रामनगर पैसेंजर के दो डिब्बे गोविंद नगर क्षेत्र में ट्रैक से उतर गए थे। यानी कि मुरादाबाद-बरेली सेक्शन के बीच रेल हादसों की लंबी फेहरिस्त है। ऐसे में ऑटोमेटिक सिग्नलिंग और कवाच जैसी सुरक्षा प्रणाली से रेल सफर और सुरक्षित हो सकता है। लेकिन, इसके लिए मंडल को इंतजार करना पड़ेगा।

ऐसे काम करेगा कवच

  • सामने ट्रेन दिखते ही दोनों के इंजन में ब्रेक प्रभावी हो जाएंगे
  • अधिक गति पर टनल आते ही ट्रेन धीमी हो जाएगी
  • लाल सिग्नल दिखते ही ट्रेन की गति कम होने लगेगी
  • कासन में लाल सिग्नल देखते ही ट्रेन में ब्रेक लगने लगेगा
  • सामने से 35 मीटर पहले ट्रेन में ब्रेक लग जाएगा
  • सिग्नल खराबी में पांच किमी के अंदर सभी ट्रेनों में ब्रेक लग जाएगा

मंडल मुख्यालय से गुजरती हैं प्रमुख ट्रेनें
राजधानी सुपर फास्ट, शताब्दी, जन-शताब्दी, गरीब रथ, महामना एक्सप्रेस, दुरंतों डबल डेकर, नंदा देवी एक्सप्रेस, वंदे भारत (प्रस्तावित)

यह है मुरादाबाद की रेल लाइनें
मुरादाबाद- लखनऊ
मुरादाबाद- अंबाला
मुरादाबाद- दिल्ली
मुरादाबाद- अलीगढ़
मुरादाबाद- रामनगर
मुरादाबाद- ऋषिकेश
मुरादाबाद- संभल

वरिष्ठ मंडल संरक्षा अधिकारी आरके तायल ने कहा कि यह मेट्रो के तर्ज पर काम करने वाली प्रणाली है। सेंसर के जरिये ट्रेनों का संचालन होता है। यह हादसा रोकने की सबसे प्रभावी और आधुनिक प्रणाली है। दिल्ली- मुंबई और दक्षिण भारत के रूटों पर इस लगाया जाएगा। इस का परीक्षण सफल हो चुका है। मुरादाबाद में यह प्रणाली आने में पांच साल से अधिक समय लगेगा।

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