कन्नौज: तीनों सीटों पर लहराया भगवा का परचम, समर्थकों में दिखी खुशी की लहर
कन्नौज। सीएम योगी आदित्यनाथ ने चुनाव की शुरुआत के पहले से ही सपा का गढ़ कन्नौज जीतने का मन बना लिया। पुलिस कमिश्नर कन्नौज निवासी असीम अरुण का त्यागपत्र हुआ और भाजपा की सदस्यता मिली। कन्नौज सदर (सु.) से प्रत्याशी बने और मतगणना के निष्कर्ष में तीन बार विधायक रहे सपा के अनिल दोहरे से …
कन्नौज। सीएम योगी आदित्यनाथ ने चुनाव की शुरुआत के पहले से ही सपा का गढ़ कन्नौज जीतने का मन बना लिया। पुलिस कमिश्नर कन्नौज निवासी असीम अरुण का त्यागपत्र हुआ और भाजपा की सदस्यता मिली। कन्नौज सदर (सु.) से प्रत्याशी बने और मतगणना के निष्कर्ष में तीन बार विधायक रहे सपा के अनिल दोहरे से सीट छीन कर भाजपा को सौंप दी। ये सीट 2014 में मोदी लहर में भी सपा के पास रही थी। इसके साथ ही छिबरामऊ और तिर्वा की सीटों पर पूर्व भाजपा विधायकों ने कब्जा बरकरार रखा।
लगभग डेढ़ माह पूर्व असीम अरुण के त्यागपत्र और भाजपा में शामिल होने की चर्चा हुई। इसके बाद ही उनके तीन साल से सपा के कब्जे वाली सीट कन्नौज सदर पर चुनाव लड़ने की चर्चा ने जोर पकड़ लिया था। इसके बाद उनके अगले ही दिन अपने पैतृक गांव तिर्वा के गौरियनपुरवा खैरनगर पहुंचने से इस चर्चा को और बल मिल गया था। फिर टिकट मिला और सपा का गढ़ ध्वस्त करने की चुनौती भी। इसके बाद अत्यंत शांतिपूर्ण स्थिति में प्रत्याशी के रूप में वह संपर्क में जुट गए।
जहां भी गए, जिससे भी मिले उसे बताया कि मोदी और योगी के निर्देश पर वह जनसेवा के लिए निकल पड़े हैं। उन्होंने स्पष्ट कर दिया था कि पिता, मोदी और योगी के तीन आशीर्वाद पहले ही मिल चुके हैं, अब जनता का आशीर्वाद मिलना है। ऐसा हुआ तो वे पूरे जीजान से सेवा करेंगे। असीम के आने के बाद उनके जीतने पर उपमुख्यमंत्री बनाए जाने की चर्चा जोरों से उठी थी। इस चर्चा से क्षेत्रवासी प्रसन्न थे।
दो दशक पूर्व कन्नौज क्षेत्र सपा का गढ़ बन चुका था। कन्नौज सीट के अलावा तिर्वा सीट पर भी भाजपा और सपा में उठापटक चल रही थी। इसी तरह छिबरामऊ भी सपा का गढ़ माना जाता था। पूर्व केंद्रीय मंत्री स्व.राम प्रकाश त्रिपाठी के निधन के बाद यहां भाजपा की स्थिति बहुत अच्छी नहीं थी। उनकी पुत्री बीता चुनाव जीतीं थीं परंतु इस बार उनकी जीत पर स्पष्ट हां नहीं की जा रही थी।
इसी को साधकर असीम अरुण को कन्नौज भेजा गया कि इस सुरक्षित सीट के साथ जिले की तीनों सीटें भाजपा की झोली में पड़ेंगी। भाजपा के वरिष्ठ नेता अनिल गुप्ता तथा वीर सिंह भदौरिया ने मतदान पूर्व दावा किया था कि असीम आए हैं और ‘असीम’ सीटें लेकर जाएंगे।
तिर्वा में इस बार कैलाश राजपूत को भाजपा का टिकट मिलने से लोगों में गुस्सा था। लग रहा था कि इस बार यह सीट सपा के खाते में जाएगी लेकिन मतगणना खत्म होते-होते ये सीट भी भाजपा के पास ही बनी रही।
पढ़ें- मथुरा: आज बरसाना में खेली जाएगी लट्ठमार होली, सुरक्षा के किए गए कड़े इंतजाम
