होश वालों को ख़बर क्या बे-ख़ुदी क्या चीज़ है

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** शायरी ** होश वालों को ख़बर क्या बे-ख़ुदी क्या चीज़ है इश्क़ कीजे फिर समझिए ज़िंदगी क्या चीज़ है  ***** कभी किसी को मुकम्मल जहाँ नहीं मिलता कहीं ज़मीन कहीं आसमाँ नहीं मिलता ***** हर आदमी में होते हैं दस बीस आदमी जिस को भी देखना हो कई बार देखना ***** धूप में निकलो …

** शायरी **

होश वालों को ख़बर क्या बे-ख़ुदी क्या चीज़ है

इश्क़ कीजे फिर समझिए ज़िंदगी क्या चीज़ है

 *****

कभी किसी को मुकम्मल जहाँ नहीं मिलता

कहीं ज़मीन कहीं आसमाँ नहीं मिलता

*****

हर आदमी में होते हैं दस बीस आदमी

जिस को भी देखना हो कई बार देखना

*****

धूप में निकलो घटाओं में नहा कर देखो

ज़िंदगी क्या है किताबों को हटा कर देखो

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बच्चों के छोटे हाथों को चाँद सितारे छूने दो

चार किताबें पढ़ कर ये भी हम जैसे हो जाएँगे

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घर से मस्जिद है बहुत दूर चलो यूँ कर लें

किसी रोते हुए बच्चे को हँसाया जाए

*****

दुश्मनी लाख सही ख़त्म कीजे रिश्ता

दिल मिले या मिले हाथ मिलाते रहिए

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कोशिश भी कर उमीद भी रख रास्ता भी चुन

फिर इस के ब’अद थोड़ा मुक़द्दर तलाश कर

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हम लबों से कह पाए उन से हाल-ए-दिल कभी

और वो समझे नहीं ये ख़ामुशी क्या चीज़ है

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कुछ भी बचा कहने को हर बात हो गई

आओ कहीं शराब पिएँ रात हो गई

** निदा फ़ाज़ली **