लखनऊ: स्वच्छ विद्यालय पुरस्कार के लिए 85 परिषदीय विद्यालयों ने किए आवेदन, पानी बचाने पर देंगे जोर
लखनऊ। राजधानी के परिषदीय विद्यालयों ने स्वच्छता के साथ जलसंरक्षण की तरफ कदम बढ़ाएं हैं, जो ‘स्वच्छ विद्यालय पुरस्कार’ के तहत इस दिशा में कार्य कर मिसाल बनेंगे। ऐसे 85 परिषदीय विद्यालयों ने आवेदन किए हैं, जिनमें और बेहतरी लाई जाएगी। ‘स्वच्छ विद्यालय पुरस्कार’ योजना परिषदीय विद्यालयों के लिए चलाई गई है। इसके अंतर्गत विद्यालयों …
लखनऊ। राजधानी के परिषदीय विद्यालयों ने स्वच्छता के साथ जलसंरक्षण की तरफ कदम बढ़ाएं हैं, जो ‘स्वच्छ विद्यालय पुरस्कार’ के तहत इस दिशा में कार्य कर मिसाल बनेंगे। ऐसे 85 परिषदीय विद्यालयों ने आवेदन किए हैं, जिनमें और बेहतरी लाई जाएगी।
‘स्वच्छ विद्यालय पुरस्कार’ योजना परिषदीय विद्यालयों के लिए चलाई गई है। इसके अंतर्गत विद्यालयों को पेयजल, जलसंरक्षण, वाटर टेस्टिंग, दिव्यांग शौचालय, हाथ धोने का केंद्र, रखरखाव आदि सुविधाओं से लैस करना है। इसका मकसद इन सुविधाओं से स्वच्छता के साथ जलसंरक्षण को बढ़ावा देना है। इसके लिए विद्यालयों को आवेदन करने होते हैं, जिसमें बेसिक शिक्षा विभाग की तरफ से जिले के 85 परिषदीय विद्यालयों ने आवेदन किए हैं।
इस आधार पर विद्यालयों में यह कार्य संबंधित विभाग कराएंगे, जिसकी मुख्य विकास अधिकारी अश्वनी कुमार पांडे स्तर से योजना बन चुकी है। मनरेगा, पंचायत, लघु सिंचाई समेत अन्य विभागों को जिम्मेदारी भी दी गई है। यह कार्य कायाकल्प के अतिरिक्त होंगे।
पंचायत विभाग को स्वच्छता का काम
पंचायत विभाग की तरफ से विद्यालयों में दिव्यांग शौचालय बनाए जाएंगे। साथ ही कूड़ा फेंकने के लिए डस्टिबन खरीदकर रखी जाएंगी। यह कार्य ग्राम निधि से होंगे। इसी तरह लघु सिंचाई व मनरेगा जलस्तर बढ़ाने का कार्य करेंगे, जो रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के साथ सोखपिट बनाएंगे। इससे बारिश व रोजाना विद्यालय से निकलने वाले पानी को संरक्षित करेगा।
स्वच्छ विद्यालय पुरस्कार के तहत चयनित विद्यालयों में काम कराएंगे, जिसकी कार्ययोजना बन चुकी है। इन कार्यों से विद्यालयों की तस्वीर और बदलेगी। पर्यावरण और जलसंरक्षण दोनों को बढ़ावा मिलेगी।
-शाश्वत आनंद सिंह, जिला पंचायत राज अधिकारी, लखनऊ
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