लखनऊ: पद्मश्री डॉ. दिगंबर बेहरा ने बताया भारत में क्यों नहीं रुक रहा टीबी का संक्रमण
लखनऊ। दुनिया भर में हर साल 10 मिलियन मामले टीबी के सामने आते हैं, यानी कि 10 मिलियन लोग प्रत्येक वर्ष इस बीमारी की चपेट में आ जाते हैं,जितने लोग पूरी दुनिया में टीबी की चपेट में हर साल आते हैं, उनमें से 25 फीसदी भारत में होते हैं और यह तब हो रहा है …
लखनऊ। दुनिया भर में हर साल 10 मिलियन मामले टीबी के सामने आते हैं, यानी कि 10 मिलियन लोग प्रत्येक वर्ष इस बीमारी की चपेट में आ जाते हैं,जितने लोग पूरी दुनिया में टीबी की चपेट में हर साल आते हैं, उनमें से 25 फीसदी भारत में होते हैं और यह तब हो रहा है जब भारत सरकार लगातार देश से टीबी जैसी गंभीर बीमारी को साल 2025 तक समाप्त करने की बात कह रही है,लगातार इसके लिए प्रयास भी हो रहे हैं। लेकिन नतीजे लक्ष्य के अनुसार सामने नहीं आ रहे हैं। यह कहना है पीजीआई चंडीगढ़ के पूर्व डीन व पलमोनरी मेडिसिन विभाग के पूर्व अध्यक्ष पद्मश्री डॉ दिगंबर बेहरा का।
डॉ. दिगंबर बेहरा मंगलवार को राजधानी स्थित एसजीपीजीआई में क्षय रोग से ग्रसित बच्चों के पोषण व गोद लेने पर आयोजित चिकित्सा शिक्षा कार्यक्रम में हिस्सा लेने पहुंचे थे।
इस अवसर पर डॉ. दिगंबर बेहरा ने अमृत विचार से बात करते हुए चार कारणों पर प्रकाश डाला जिनकी वजह से टीबी रोग पर पूरी तरीके से नियंत्रण नहीं हो पा रहा है, या यह कहा जाए कि चार कारणों के चलते टीबी उन्मूलन कार्यक्रम में बाधा पैदा हो रही है,तो गलत ना होगा।
डॉ. दिगंबर बेहरा ने पहला कारण बताते हुए बताया कि समस्या बड़ी है, जिन कारणों की वजह से टीबी होती है,वह कारण हमारे देश में बहुत पाए जाते हैं, उन्होंने कहा कि हमारे देश की जनसंख्या और देशों के मुकाबले बहुत अधिक है, यहां पर डायबिटीज तथा अन्य बीमारियों के मरीज अधिक है, धूम्रपान का प्रयोग बहुतायत में होता है, इसके अलावा एक बड़ी जनसंख्या टीबी से ग्रसित है,लेकिन इनकी पहचान कर पाना मुश्किल है,वहीं कुछ मामलों में विशेषज्ञ भी समय रहते टीबी की पहचान नहीं कर पाते हैं।
डॉ. दिगंबर बेहरा दूसरे कारण पर प्रकाश डालते हुए कहते हैं कि कई बार टीबी के मरीज लक्षणों को अनदेखा करते हैं, प्राइवेट सेक्टर में चिकित्सक टीबी को डाग्नोस तो कर रहे हैं, लेकिन सारे मामले सिस्टम को नहीं बता रहे हैं।
तीसरे कारण के बारे में डॉ. दिगंबर बेहरा बताते हैं कि तीसरा बड़ा कारण ड्रग रेजिस्टेंट टीबी है। वह बताते हैं कि इसका इलाज थोड़ा लंबा होता है, इस वजह से कुछ लोग इलाज आधे में छोड़ देते हैं।
वहीं चौथा कारण और गंभीर है,इसके पीछे की सबसे बड़ी वजह टीबी की रोकथाम के लिए योजना व नियमों को ठीक तरह से लागू नहीं किया जा रहा है। इसके अलावा मानव संसाधन तथा फाइनेंस की भी दिक्कत आ रही है।
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