इलाहाबाद हाईकोर्ट ने समलैंगिक विवाह को लेकर किया बड़ा फैसला, शादी की मंजूरी देने की याचिका की खारिज

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प्रयागराज। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने एक बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई के दौरान 2 वर्ष लड़कियों को समलैंगिक विवाह करने की अनुमति देने से इंकार कर दिया। यह आदेश हाईकोर्ट जस्टिस शेखर यादव की सिंगल बेंच ने लड़की की मां की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। न्यायमूर्ति शेखर कुमार यादव ने एक युवती की …

प्रयागराज। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने एक बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई के दौरान 2 वर्ष लड़कियों को समलैंगिक विवाह करने की अनुमति देने से इंकार कर दिया। यह आदेश हाईकोर्ट जस्टिस शेखर यादव की सिंगल बेंच ने लड़की की मां की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया।

न्यायमूर्ति शेखर कुमार यादव ने एक युवती की मां अंजू देवी की ओर से दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई करते हुए दोनों युवतियों की याचिका को खारिज किया।

अंजू देवी ने अपनी 23 वर्षीय बेटी को सौंपे जाने का अनुरोध करने संबंधी यह याचिका दायर की थी। उनका आरोप था कि उनकी बेटी को 22 वर्षीय एक दूसरी लड़की ने अवैध रूप से बंदी बना रखा है।

इससे पहले, 6 अप्रैल को अदालत ने राज्य सरकार के वकील को अगले दिन दोनों युवतियों की उपस्थिति सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था।

सरकारी वकील ने अपनी दलील में कहा  कि हिंदू संस्कृति में विवाह एक संस्कार है जो पुरुष और महिला के बीच ही किया जा सकता है। हमारा देश भारतीय संस्कृति, धर्म और भारतीय कानून के हिसाब से चलता है। भारत में विवाह को एक पवित्र संस्कार माना जाता है जबकि अन्य देशों में विवाह एक अनुबंध है।

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