बदायूं: तो क्या बरेली के श्यामतगंज से जुड़े हैं मिलावट के तार!
बदायूं, अमृत विचार। बदायूं में पकड़े गए तमाम मिलावटी तेल, घी, मसाले आदि बरेली के थोक बाजार से आते हैं। मसाले और खाद्य तेलों का वहां बड़ा थोक मार्केट श्यामतगंज में है। इसलिए यह भी पता करना चाहिए कि कहां से मिलावटी माल आ रहा है। इस पर ध्यान न देकर उन दुकानदारों पर कार्रवाई …
बदायूं, अमृत विचार। बदायूं में पकड़े गए तमाम मिलावटी तेल, घी, मसाले आदि बरेली के थोक बाजार से आते हैं। मसाले और खाद्य तेलों का वहां बड़ा थोक मार्केट श्यामतगंज में है। इसलिए यह भी पता करना चाहिए कि कहां से मिलावटी माल आ रहा है। इस पर ध्यान न देकर उन दुकानदारों पर कार्रवाई हो जाती है जो सस्ता समझकर थोक वालों से ऐसा माल खरीद लाते हैं।
नमूनों की जांच का खुलासा हो या मिलावट का शक हो तो जांच टीम को यह भी पता लगाना चाहिए कि यह माल दुकानदार लाया कहां से है। इसका पता न लग पाने के कारण मिलावट पर रोक नहीं लग पाती। बदायूं में मिलावट के ढेरों मामले सामने आ चुके हैं। अब तक दूध और दूध से बने आइटम, हलवाइयों की दुकानें और घी-तेल की दुकानों पर अक्सर छापामारी चलती रही है।
यहां के नमूने भी बड़ी तादाद में लिए गए हैं, इनमें फेल नमूनों की भी बड़ी संख्या सामने आई हैं। रिफाइंड, घी व तेल के नमूने भी लिए गए हैं। रिपोर्ट भी दर्ज हुई हैं लेकिन किसी जिम्मेदार ने यह पता नहीं लगाया कि व्यापारी ऐसा माल लाते कहां से हैं। व्यापारियों की मानें तो रिफाइंड, घी, तेल व मसाले आदि बरेली के श्यामतगंज के थोक मार्केट से लाए जाते हैं।
जांच टीम ने पकड़े गए लोगों से कभी यह जानकारी नहीं की कि वे मिलावटी सामान कहां से लाते हैं। साफ जाहिर है कि मिलावट का सामान जब बरेली के श्यामतगंज थोक मार्केट से आता है तो उन थोक विक्रेताओं के यहां छापे क्यों नहीं डाले जाते।
होता यह है कि छोटे दुकानदारों को पकड़कर उनका दोहन कर लिया जाता है। मिलावट को जड़ से खत्म करना है तो मिलावट का सामान सस्ते में बेचने वाले थोक दुकानदारों और एजेंसियों के गोदामों पर छापेमारी जरूरी है, अन्यथा मिलावट को रोका जाना मुश्किल है। यही वजह है कि मिलावट के मामले कम नहीं होते। कुछ दुकानदारों को तो पता नहीं होता कि थोक में सस्ता माल देने वाले ही बड़ा खेल कर रहे हैं।
बाजार से रसोई तक मिलावट का खेल जारी है। हाल ही में फारच्यून रिफाइंड के 173 टिन नकली होने के शक में बदायूं शहर और म्याऊं के बाजार बरामद किए गए हैं। यहां बता दें कि जैसे खाद्य सुरक्षा विभाग अथवा आम लोगों को भी पता होता है कि अमुक मार्केट मिलावट को जाना जाता है। ठीक उसी प्रकार थोक में मिलावट का माल कहां मिलता है। इसके लिए भी आसानी से सूत्र लगाए जा सकते हैं। छोटे दुकानदारों के अलावा अगर इन थोक का काम करने वालों के गुप्त गोदामों में छापे पड़ें तब कहीं मिलावट रोकी जा सकती है।
बता दें कि रिफाइंड के बाद सरसों का तेल भी महंगा हो गया है। सरसों का तेल महंगा होते ही इसमें मिलावट का खेल शुरू हो गया है। इसी प्रकार महंगे मसालों में भी जमकर मिलावट हो रही है। अबतक खुले मसालों में मिलावट के ज्यादा मामले मिलते थे लेकिल सील बंद अथवा पैकेट पर जब लोगों ने भरोसा किया है तब से इनमें भी खेल होने लगा है। मसालों में हल्दी, धनिया, गर्म मसाला, जीरा, काली मिर्च आदि में भी मिलावट का खेल जारी है।
जिले में दूध व दूध से बनी चीजों के अलावा अब खाद्य सुरक्षा विभाग को बाजार से लेकर रसोई तक मिलावट का जहर घोलने वालों पर भी निगरानी रखनी पड़ेगी। इनके अधिक से अधिक नमूने भरे जाने चाहिए। जहां के नमूने फेल आएं अथवा जिनमें मिलावट का शक हो तो उन्हें बेचने वालों से पूछना चाहिए कि वे ऐसा माल कहां से लाते हैं।
सर्वविदित है कि मसाले, तेल, रिफाइंड और घी आदि सबसे नजदीक बरेली के थोक मार्केंट श्यामतगंज से ही लाये जाते हैं। इसका मतलब सीधा है कि बदायूं में इन वस्तुओं में मिलावट मिल रही है तो इसके तार वहां से भी जुड़ रहे हैं जहां से माल थोक में आ रहा है। जब अधिकांश ऐसा माल बदायूं के दुकानदार बरेली से लाते हैं तो यह साफ हो जाता है कि मिलावट के तार बरेली के श्यामतगंज मार्केट से कहीं न कहीं अवश्य जुड़े हैं। इसका पर्दाफाश नहीं हो पाता तब तक मिलावटखोरी पर लगाम लग पानी मुश्किल होगी।
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