तलाकशुदा महिलाओं के गुजारा भत्ता को लेकर ऑल इण्डिया मुस्लिम महिला पर्सनल लॉ बोर्ड की अध्यक्ष ने दिया बड़ा बयान, जानें क्या कहा?

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लखनऊ। मुस्लिम महिलाओं के हक में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने अहम फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने दिए फैसले में कहा है कि तलाकशुदा मुस्लिम महिलाओं को भी गुजारा भत्ता पाने का पूरा अधिकार है, तलाकशुदा मुस्लिम महिलायें तबतक गुजारा भत्ता पाने का अधिकार रखती हैं,जब तक वह दुसरी शादी नहीं कर लेती। कोर्ट …

लखनऊ। मुस्लिम महिलाओं के हक में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने अहम फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने दिए फैसले में कहा है कि तलाकशुदा मुस्लिम महिलाओं को भी गुजारा भत्ता पाने का पूरा अधिकार है, तलाकशुदा मुस्लिम महिलायें तबतक गुजारा भत्ता पाने का अधिकार रखती हैं,जब तक वह दुसरी शादी नहीं कर लेती। कोर्ट के इसी फैसले पर ऑल इण्डिया मुस्लिम महिला पर्सनल लॉ बोर्ड की अध्यक्ष शाइस्ता अम्बर ने इसे नाइंसाफी बताया है।

उन्होंने कहा कि तलाक होने के बाद भी तलाकशुदा महिला को गुजरा भत्ता पाने का अधिकार,उस व्यक्ति के साथ न इंसाफी है,जिसने महिला को तलाक दिया है। उन्होंने कहा कि साल 2008 में एक मुस्लिम महिला की तरफ से दाखिल एक याचिका पर हाईकोर्ट ने यह फैसला सुनाया है। उन्होंने कहा कि एक तलाकशुदा महिला का वह शख्स खर्चा उठाये जिसने तलाक दिया है,उस शख्स के साथ न्याय नहीं है।

उन्होंने कहा कि मुस्लिम लॉ के मुताबिक जन्म लेते ही बेटी अपने पिता के संपत्ति में हकदार हो जाती है। यह कानून बेटियों को आर्थिक रूप से मजबूत करने के लिए बनाया गया है, वहीं जब लड़की की शादी होती है,तो उसे निकाह के समय पति की तरफ से मेहर दी जाती है,यह भी उसके आर्थिक पक्ष को मजबूत करने के लिए होता है। यह सबकुछ इसलिए होता है,जिससे महिला पर या उसके पति पर कोई आर्थिक संकट आए,तो पति की मदद करे, या ख़ुद आत्मनिर्भर होकर अपना जीवन सम्मान व स्वाभिमान के साथ व्यतीत कर सके, भाई या पिता पर बोझ न बने।

उन्होंने कहा कि तलाक से महिला, परिवार, बच्चों का भविष्य बर्बाद होता है, बहुत से पुरूषों ने तलाक को खेल समझ लिया है, वहीं बहुत सी महिलाओं को भी अक्सर देखा गया है कि खुशहाल वैवाहिक गृहस्थी चलाने में ना समझी करती हैं, बेजा ज़ुल्म करती हैं,दोनों में से कोई भी दोषी हो सख़्त सज़ा होना चाहिए,लेकिन किसी एक पर बोझ डाला जाना,न्याया नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि तलाक़शुदा महिलाओं के आश्रय व गुज़ारा भत्ता की व्यवस्था सरकार को करनी चाहिए न कि तलाक देने वाले शख्स को।

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