ज्ञान व प्रतिभा के बेहतर उपयोग से कृषि को लाभकारी बनाया जा रहा है : नरेंद्र सिंह तोमर

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झांसी। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा है कि देश की आधी से अधिक आबादी की आजीविका कृषि पर निर्भर है, ऐसे में कृषि क्षेत्र में ज्ञान और प्रतिभा का बेहतर उपयोग कर और गंभीरता से चर्चा कर कृषि को लाभकारी बनाया जा सकता है। केंद्रीय मंत्री तोमर ने शुक्रवार …

झांसी। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा है कि देश की आधी से अधिक आबादी की आजीविका कृषि पर निर्भर है, ऐसे में कृषि क्षेत्र में ज्ञान और प्रतिभा का बेहतर उपयोग कर और गंभीरता से चर्चा कर कृषि को लाभकारी बनाया जा सकता है। केंद्रीय मंत्री तोमर ने शुक्रवार को यहां कहा कि इसके लिए केन्द्र सरकार डिजिटल एग्रीकल्चर, माइक्रो इरिगेशन, मृदा स्वास्थ्य कार्ड, सीड सेलेक्शन, एग्रो मार्केट, प्रोडक्शन सेंटर के साथ ही अन्य तकनीकों के प्रयोग के लिए योजनाबद्ध तरीके से कार्य कर रही है।

केंद्रीय कृषि मंत्री ने यहां स्थित भारतीय चरागाह एवं चारा अनुसंधान संस्थान के ऑडीटोरियम में तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कृषि सम्मेलन के उद्घाटन समारोह को ऑनलाइन सम्बोधित करते हुए कहा कि “कृषि विज्ञान और प्रौद्योगिकी- चुनौती एवं सम्भावनायें” विषय पर आयोजित इस सम्मेलन से निश्चित ही कुछ ऐसे सुझाव निकल कर आएंगे जिससे केंद्र सरकार कृषि सतत विकास के लिए नीतिगत निर्णय ले सकेगी।

उन्होंने आयोजकों को बधाई देते हुए कहा कि यह इस प्रकार का पहला ऐसा अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन है जिसे झांसी के सभी संस्थानों के साथ ही कई देश के महत्वपूर्ण संस्थान संयुक्त रूप से आयोजित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हाल ही में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के माध्यम से 20 हज़ार करोड रुपए किसानों को वितरित किए गए है, जिससे देश के लगभग 86 प्रतिशत छोटे किसान सक्षम हो देश के विकास में सहयोग प्रदान कर सकेंगे।

परंपरागत कृषि को व्यावसायिक कृषि में बदलने के लिए नई शिक्षा नीति में भी प्रावधान किए गए हैं जिससे छात्र पाठ्यक्रम की पढ़ाई के साथ ही व्यावहारिक ज्ञान भी प्राप्त करें। कृषि संस्थान छात्रों की मदद से गांव को गोद लेकर कार्य करें, जिससे कृषि को उन्नत क्षेत्र बनाकर जीडीपी में वृद्धि की जा सके। केन्द्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि बुंदेलखंड क्षेत्र में कृषि को लेकर अपार संभावनाएं हैं। वैज्ञानिकों के नवाचार एवं छात्रों की गतिविधियों से इस क्षेत्र को लाभ मिला है लेकिन लक्ष्य अभी दूर है, सतत सामूहिक प्रयास से कृषि आयाम यहां की आर्थिक स्थिति बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि रानी लक्ष्मी बाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर अरविंद कुमार ने कहा कि सरकार के नीतिगत प्रयास के फलस्वरूप खाद्यान्न उत्पादन में भारत आत्मनिर्भर बना है एवं कई फसलों का निर्यात कर रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कि पहल पर 80 करोड़ लोगों को अन्न प्रदान किया गया है जो विश्व में एक अनोखा उदाहरण है।

बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर मुकेश पांडे ने इस मौके पर कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था को तीन ट्रिलियन से पांच ट्रिलियन बनाने में कृषि क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका है। अनुसंधान, नवाचार, आविष्कार, प्रभावी एवं कुशल नीति आदि के माध्यम से उत्पादन को बढ़ाकर रोजगार की समस्या को दूर किया जा सकता है साथ ही प्रधानमंत्री की संकल्पना- आत्मनिर्भर भारत, वोकल फार लोकल, स्किल इंडिया, जीरो बजट फार्मिंग को साकार किया जा सकता है।

भारतीय चरागाह एवं चारा अनुसंधान संस्थान के निदेशक डॉ अरमेश चंद्रा ने इस मौके पर कहा कि इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में युवा शोधार्थियों को वरिष्ठ एवं प्रिंसिपल वैज्ञानिकों के साथ संचार करने एवं उनकी कार्यप्रणाली को जानने का अवसर प्राप्त होगा जिससे निश्चित ही कृषि क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव लाने में सक्षम बन सकेंगे।

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