इटावा: यात्रियों को करना होगा इंतजार, 31 मई तक ट्रेनों में फुल हुए रिजर्वेशन

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इटावा। उत्तर प्रदेश के इटावा में दिल्ली हावड़ा रेल मार्ग पर संचालित यात्री रेलगाड़ियों में भीषण गर्मी में 31 मई तक नोइंट्री जैसे हालात बन गए है। 31 मई तक किसी भी ट्रेन में रिजर्वेशन की तो कोई संभावना है ही नहीं तत्काल आरक्षण भी खत्म हो गए है। इटावा रेलवे जंक्शन के रेलवे आरक्षण …

इटावा। उत्तर प्रदेश के इटावा में दिल्ली हावड़ा रेल मार्ग पर संचालित यात्री रेलगाड़ियों में भीषण गर्मी में 31 मई तक नोइंट्री जैसे हालात बन गए है। 31 मई तक किसी भी ट्रेन में रिजर्वेशन की तो कोई संभावना है ही नहीं तत्काल आरक्षण भी खत्म हो गए है।

इटावा रेलवे जंक्शन के रेलवे आरक्षण पर्यवेक्षक एम.लाल ने बताते है कि सामान्य आरक्षण तो पूरी तरह से फुल हो ही चुका है, तत्काल में भी कोई सीटें नहीं मिल पा रही हैं। इटावा से दिल्ली और कानपुर की ओर जाने वाली ट्रेनों में 31 मई तक आरक्षित सीटें खाली नहीं हैं।

ज्यादातर ट्रेनों में वेटिंग लिस्ट लंबी है तो कुछ में नोरूम की स्थिति है। जिनको ज्यादा जरूरी है वह बसों में सीटें बुक करा रहे हैं। उन्होंने बताया कि दिल्ली की ओर जाने वाली पूर्वा में 53, वैशाली में 102, कैफियत में 41, कालका एक्सप्रेस में 147, जोधपुर -हावड़ा में 42, मुरी जनरल में 77 व स्लीपर में 130 वेटिंग चल रही है।

गोमती एक्सप्रेस में नो रूम की स्थिति है। इसी तरह कानपुर की ओर जाने वाली पूर्वा और कैफियत और जोधपुर-हावड़ा एक्सप्रेस में नो रूम की स्थित है। वैशाली में 500 और कालका में 150 वेटिंग है।

इटावा से दिल्ली जाने वाली ट्रेन में सर्वाधिक मारामारी गोमती एक्सप्रेस में है। इससे रोजाना लगभग 300 यात्री इस ट्रेन में सफर करते हैं। ट्रेन का स्टॉपेज जंक्शन पर दो मिनट का ही है। जिले के चौगुर्जी निवासी आशुतोष दीक्षित एडवोकेट ने रेलवे बोर्ड के अधिकारियों से ट्रेन का स्टापेज पांच मिनट कराने की मांग की है।

इटावा से दिल्ली और लखनऊ के लिए चार जनरथ बसें हैं

सूत्रों ने बताया कि इटावा से दिल्ली और लखनऊ के लिए चार जनरथ बसें हैं। दो सुबह लखनऊ तो दो दिल्ली जाती हैं। इन बसों में ऑनलाइन सीट बुक कराने की व्यवस्था भी है।

क्षेत्रीय प्रबंधक बी.पी.अग्रवाल ने बताया कि इटावा से रोडवेज की बसों में प्रतिदिन नौ हजार से अधिक यात्री सफर करते हैं। बसें हरिद्वार, बरेली, गोरखपुर, बनारस, लखनऊ, ग्वालियर भी जाती हैं। आगरा, कानपुर, फर्रुखाबाद और दिल्ली के पर्याप्त बसें हैं।

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