कुरान व उर्दू के अलावा मदरसों में नहीं दी जा रही किसी भी अन्य विषय की शिक्षा : बाल आयोग

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लखनऊ/बहराइच। लखनऊ के गोसाईगंज में स्थित मदरसे में दो किशारों के पैरों में लोहे की जंजीरें बांधकर बंधक बनाने के अमानवीय प्रकरण के बाद राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एससीपीसीआर) ने प्रदेश के सभी जिलों में मदरसों की जांच का अभियान शुरू कर दिया है। अभियान के पहले दिन बाल आयोग की प्रदेश सदस्या एडवोकेट …

लखनऊ/बहराइच। लखनऊ के गोसाईगंज में स्थित मदरसे में दो किशारों के पैरों में लोहे की जंजीरें बांधकर बंधक बनाने के अमानवीय प्रकरण के बाद राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एससीपीसीआर) ने प्रदेश के सभी जिलों में मदरसों की जांच का अभियान शुरू कर दिया है।

अभियान के पहले दिन बाल आयोग की प्रदेश सदस्या एडवोकेट अनीता अग्रवाल व श्याम त्रिपाठी की दो सदस्यीय टीम बहराइच पहुंची। दो मदरसों की जांच के उपरांत अनीता अग्रवाल ने कहा कि कई खामियां मिली हैं। मदरसों में कुरान व उर्दू के अलावा किसी भी अन्य विषय हिंदी, इंग्लिश, गणित आदि की शिक्षा नहीं दी जा रही है।

बच्चों ने अंग्रेजी शब्द ‘दिस’ को ट्रिस और ‘वैन’ को टेन लिखा

अनीता अग्रवाल ने बताया कि दरगाह के ‘दारुलशफा’ मदरसे व सजारगंज के ‘दारुल उलूम मसूदिया मिसवाहिया’ मदरसे में आठवीं कक्षा के बच्चों से अंग्रेजी के शब्द लिखाए गए तो बच्चे एक भी शब्द ठीक से नहीं लिख सके। आठवीं कक्षा के आश मोहम्मद ने अंग्रेजी में दिस को ट्रिस और मो. नासिद ने वैन को टेन लिखा। कुरान और उर्दू के अलावा कोई भी दूसरा विषय बच्चों को नहीं पढ़ाया जा रहा है। प्रत्येक कक्षा में 15-20 छात्र थे। अनीता अग्रवाल ने कहा कि आश्चर्य की बात है कि 15-18 वर्ष उम्र के बच्चे अंग्रेजी तक पढ़ना नहीं जानते।

मदरसों में उर्दू छोड़ दूसरी भाषा की एक भी किताब नहीं, विशेषज्ञ शिक्षक भी नहीं

अनीता अग्रवाल ने बताया कि दोनों मदरसों में जांच के दौरान उर्दू भाषा को छोड़कर किसी भी अन्य भाषा की एक भी किताब तक नहीं मिली। लाइब्रेरी में भी सभी किताबें उर्दू भाषा की थीं। मदरसों में एक भी विशेषज्ञ शिक्षक नहीं मिले। सिर्फ उर्दू में परास्नातक की डिग्री वाले ही शिक्षक हैं। कामिल में आठवीं पास शिक्षकों को इकोलॉजी और सोशियोलॉजी में स्नातक समकक्ष दर्शाया गया है। एक भी शिक्षक बीएड/एमएड नहीं है। प्राइवेट शिक्षकों को वेतन नहीं दिया जाता।

ड्रेस के लिए मिलता है फंड् पर कोई ड्रेस कोड नहीं, खाना भी लकड़ी पर बन रहा

बकौल अनीता अग्रवाल, मदरसों में कोई भी ड्रेस कोड नहीं मिला। जबकि दस्तावेजों की जांच में पाया गया कि सरकार की ओर से मदरसों को बच्चों की ड्रेस के मद में हर बार फंड दिया जाता है। वहीं पाया गया कि खाना भी लकड़ी पर बन रहा है। जबकि मिड डे मील के मद में गैस चूल्हे आदि के लिए भी फंड दिया जाता है।

मदरसों में नहीं होता राष्ट्रगान : अनीता अग्रवाल

अनीता अग्रवाल ने बताया कि बच्चों से पूछताछ में पाया गया कि मदरसों में राष्ट्रगान तक नहीं कराया जाता है। बताया कि अभियान के तहत प्रदेश के सभी जिलों में मदरसों की जांच की जाएगी। प्रत्येक मदरसे की जांच रिपोर्ट तैयार कर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंपी जाएगी।

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