लखीमपुर-खीरी: कार्रवाई की मांग पर अड़े परिजन माने, 24 घंटे बाद शव का किया अंतिम संस्कार
लखीमपुर-खीरी, अमृत विचार। जिला कारागार में निरुद्ध बंदी धर्मेंद्र कुमार की शुक्रवार की रात मौत हो गई थी। परिवार वालों ने पुलिस की पिटाई से मौत होने का आरोप लगाते हुए जमकर बवाल किया था। जैसे तैसे अधिकारियों ने समझा बुझाकर शव का पोस्टमार्टम तो करवा दिया, लेकिन परिवार वाले जब देर शाम शव घर …
लखीमपुर-खीरी, अमृत विचार। जिला कारागार में निरुद्ध बंदी धर्मेंद्र कुमार की शुक्रवार की रात मौत हो गई थी। परिवार वालों ने पुलिस की पिटाई से मौत होने का आरोप लगाते हुए जमकर बवाल किया था। जैसे तैसे अधिकारियों ने समझा बुझाकर शव का पोस्टमार्टम तो करवा दिया, लेकिन परिवार वाले जब देर शाम शव घर लेकर पहुंचे तो वह फिर अपनी मांगों को लेकर अड़ गए और डीएम-एसपी को मौके पर बुलाने की जिद करते हुए मांग पूरी न होने तक शव का अंतिम संस्कार करने से इंकार कर दिया।
आधी रात तक अधिकारी मनाने में जुटे रहे, लेकिन परिजन टस से मस नहीं हुए। अपनी मांगों पर अड़े परिवार वालों ने अधिकारियों की तमाम कोशिशों के बाद रविवार की शाम तहसीलदार के आश्वासन पर परिवार के लोग माने और शव का अंतिम संस्कार किया।
गोला कोतवाली पुलिस ने गांव मूर्तिहा निवासी अनुसूचित जाति के धर्मेंद्र कुमार (30) को पशु वध के आरोप में गिरफ्तार कर 31 मई को जिला कारागार भेजा था।
तीन जून को उसकी हालत बिगड़ गई थी। जेल प्रशासन ने उसे पहले जेल अस्पताल में भर्ती कराया था, लेकिन हालत में कोई सुधार नहीं हुआ। इस पर उसे जिला अस्पताल रेफर किया था। उसी रात में बंदी की मौत हो गई थी। परिवार के लोग जब मोरचरी पहुंचे तो शव पर पड़े नीले निशान देख वह भड़क गए थे और एसपी दफ्तर का घेराव कर मोरचरी से लेकर पोस्टमार्टम तक जमकर हंगामा किया था।
छह घंटे चले बवाल के बाद परिजन कार्रवाई के आश्वासन पर पोस्टमार्टम कराने पर राजी हो गए थे। इससे पुलिस ने राहत की सांस ली थी, लेकिन पोस्टमार्टम के बाद जब शाम करीब छह बजे शव घर पहुंचा तो पुलिस की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गईं। परिवार वालों ने यह कहते हुए शव का अंतिम संस्कार करने से मना कर दिया कि जब तक डीएम-एसपी मौके पर नहीं आते और उनकी मांगे पूरी नहीं करते हैं। वह शव किसी भी कीमत पर शव का अंतिम संस्कार नहीं करेंगे।
यह सुनकर पुलिस के हाथ पांव फूल गए। रात में तहसीलदार, सीओ सहित कई अधिकारी गांव पहुंचे और परिवार वालों से वार्ता की और उन्हें कार्रवाई का आश्वासन दिया, लेकिन परिवार वाले अपनी जिद पर अड़े रहे। आधी रात तक चले जद्दोजहद के बाद भी जब कोई हल नहीं निकला तो अफसर भी वापस लौट गए।
सुबह एक बार फिर तहसीलदार सदर सुशील प्रताप, सीओ गोला सहित कई अधिकारी गांव पहुंचे और गांव के ही कुछ संभ्रांत लोगों के साथ मिलकर परिवार वालों से बातचीत की, लेकिन परिवार के लोग जिद पर अड़े रहे। उन्होंने दो टूक अधिकारियों से कहा कि जब तक उनकी मांगे पूरी नहीं होती हैं। वह शव घर पर ही रखेंगे और अंतिम संस्कार नहीं करेंगे।
पूरे दिन परिवार वालों को मनाने का दौर चलता रहा। शाम करीब पांच बजे जब तहसीलदार ने पारिवारिक लाभ, आवास और विधवा पेंशन देने व बच्चों को फ्री में उच्च शिक्षा दिलाने का आश्वासन दिया तब जाकर परिवार वाले शांत हुए और शव का अंतिम संस्कार करने पर राजी हो गए। परिवार वालों ने मौके पर पहुंचे अधिकारियों को डीएम को संबोधित अपनी मांगों का एक ज्ञापन भी सौंपा।
जिला जज की देखरेख में मौत मामले की न्यायिक जांच की जा रही है। जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई करने का आश्वासन दिया गया है। इसके अलावा पारिवारिक लाभ, आवास, के साथ मृतक की पत्नी को विधवा पेंशन भी दिलाई जाएगी। जिस पर पीड़ित परिवार तैयार हो गया है। शव का अंतिम संस्कार करा दिया गया है— सुशील प्रताप, तहसीलदार सदर।
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