मुरादाबाद: वाह री पुलिस! चीरहरण करने वाले को ही बना दिया नेपाली किशोरी का हमदर्द
मुरादाबाद, अमृत विचार। दुस्सासन को ही द्रौपदी का हमदर्द बताने की कूवत पुलिस के सिवाय शायद ही किसी के पास हो। यकीन न हो तो यहां पुलिस की वह रोजनामचा पढ़ें, जिसमें दुष्कर्म करने वाले आरोपी को ही पीड़ित नेपाली किशोरी का हमदर्द बताया गया है। पुलिस की संवेदनहीनता को उजागर करने वाली सिविल लाइन …
मुरादाबाद, अमृत विचार। दुस्सासन को ही द्रौपदी का हमदर्द बताने की कूवत पुलिस के सिवाय शायद ही किसी के पास हो। यकीन न हो तो यहां पुलिस की वह रोजनामचा पढ़ें, जिसमें दुष्कर्म करने वाले आरोपी को ही पीड़ित नेपाली किशोरी का हमदर्द बताया गया है। पुलिस की संवेदनहीनता को उजागर करने वाली सिविल लाइन थाने का रोजनामचा पढ़ने के बाद बाल कल्याण समिति का फिर चकरा गया है। पीड़िता के दर्द व पुलिस की रोजनामचा में भारी विरोधाभास ने खाकी के मंसूबे पर ही सवाल खड़ा कर दिया है।
- पुलिस के राजनामचा व पीड़िता के दर्द में विरोधाभास से चकराए सीडब्ल्यूसी के सदस्य
- सिविल लाइंस पुलिस के रोजनामचा ने उठाए खाकी की संवेदनशीलता पर सवाल
महिला अपराध के मामले में त्वरित व निष्पक्ष कार्रवाई का पुलिसिया दावा नया नहीं। पुराने हो चुके पुलिस के इस जुमले की पोल नेपाल की नाबालिग किशोरी से दुष्कर्म की सिलसिलेवार घटना ने खोल दी। चार मई की शाम सिविल लाइन थाने की हरथला पुलिस ने फिजा नगर कॉलोनी में एक मकान में छापेमारी की। पड़ोसियों की सूचना पर पुलिस ने मकान से एक नेपाली किशोरी वह मुरादाबाद के दो आटो चालकों को बरामद किया। पूछताछ में पड़ोसियों ने बताया कि चक्कर की मिलक का रहने वाले एक ऑटो चालक के साथ नशे में धुत नेपाली किशोरी मकान तक पहुंची। पड़ोस में रहने वाली महिलाओं की नजर नेपाली किशोरी व ऑटो चालक पर पड़ गई। महिलाओं ने नेपाली किशोरी को बंधक बनाकर सिलसिलेवार दुष्कर्म करने का आरोप ऑटो चालक पर लगाया।
विदेशी मूल की बेटी से यहां दुष्कर्म की घटना में तब अचानक नया मोड़ आया, जब पीड़िता व आरोपी ऑटो चालक थाने पहुंचे। देर रात तक पुलिस दोनों से पूछताछ करती रही। मोहल्ले की भीड़ भी थाने में जमा रही। देर रात पुलिस ने रोजनामचा बनाकर नेपाली किशोरी को चाइल्ड लाइन के सुपुर्द कर दिया। तब पुलिस ने दावा किया की नेपाली किशोरी दुष्कर्म जैसी कोई घटना अपने साथ होने से इंकार कर रही है। किशोरी पर पुलिस ने अपने बयान लगातार बदलने के भी आरोप लगाए। दूसरे दिन पांच जून को चाइल्डलाइन ने किशोरी को पुलिस की फर्द के साथ बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश किया। पुलिस की फर्द पढने से पहले सीडब्ल्यूसी ने नेपाली किशोरी का बयान दर्ज किया।
किशोरी में बताया कि पहले रामपुर के रहने विरोध सगे भाई इमरान व नजाम ने दुष्कर्म किया। फिर 30,000 रुपए में आरोपियों ने रामपुर के रहने वाले 50 वर्षीय असलम के हाथ नेपाली किशोरी को बेच दिया। हवस के भूखे भेड़िए ने दिल्ली में दस दिनों तक नेपाली किशोरी की आबरू लूटी। दरिंदे की चंगुल से भागकर किशोरी मुरादाबाद जंक्शन पहुंची। वहां चक्कर की मिलक के रहने वाले आटो चालक ने नेपाली किशोरी को अगवा कर लिया। पांच दिनों तक सुनसान मकान व आटो में आरोपी ने नेपाली किशोरी की इज्जत लूटी। किशोरी के अथाह दर्द और वेदना से रूबरू होने के बाद बाल कल्याण समिति ने नजर पुलिस के रोजनामचा पर फेरी। उसे पढ़ते ही सीडब्ल्यूसी के होश फाख्ता हो गए। सिविल लाइंस पुलिस ने फर्द के जरिए दावा किया कि नेपाली किशोरी को नाजिम ने ही थाने के सुपुर्द किया। नेपाली किशोरी के दावे व सिविल लाइन के लिखित के मजमून में भारी विरोधाभास ने सीडब्ल्यूसी के सामने खाकी के स्याह चेहरे को बेनकाब कर दिया। पुलिस की मंशा सवालों के घेरे में खड़ी हो गई।
सिविल लाइन पुलिस को अब यह बताना ही होगा कि आखिरकार किस परिस्थिति में उसने दुष्कर्म आरोपी नाजिम को नेपाली किशोरी का हमदर्द बताया? पुलिस की वह कौन सी मजबूरी रही, जिसके कारण फिजा नगर के बाशिंदों व नेपाली किशोरी के दावों को उसने दरकिनार कर दिया? विदेशी बेटी की अस्मत से खेलने वाले ऑटो चालक नाजिम को अपने ही फर्द में पुलिस ने क्लीनचिट क्यों दी? इन सुलगते सवालों का जवाब पुलिस जब तक आम नहीं करती, तब तक महिलाओं के प्रति पुलिस की संवेदना पर सवाल उठते रहेंगे।
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