सोशल मीडिया ने पुलिस की कार्यशैली को पछाड़ा ! जाने पूरा मामला

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Edited By Amrit Vichar
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अमृत विचार, लखनऊ। तकनीकी के दौर में सोशल मीडिया ने गुमशुदा लोगों की तलाश में पुलिस की कार्यशैली को पीछे छोड़ दिया है। पुलिस को भी अपराध नियंत्रण करने के लिए सोशल नेटवर्किंग का सहारा लेना पड़ा रहा है। जिन छोटे-छोटे मसलों में पुलिस फरियादियों को थाने से टरका देती है। मसलन गुमशुदी, मोबाइल चोरी …

अमृत विचार, लखनऊ। तकनीकी के दौर में सोशल मीडिया ने गुमशुदा लोगों की तलाश में पुलिस की कार्यशैली को पीछे छोड़ दिया है। पुलिस को भी अपराध नियंत्रण करने के लिए सोशल नेटवर्किंग का सहारा लेना पड़ा रहा है। जिन छोटे-छोटे मसलों में पुलिस फरियादियों को थाने से टरका देती है।

मसलन गुमशुदी, मोबाइल चोरी और छोटे वाहनों का गुम हो जाना और पुलिस क्राइम कंट्रोल के चलते बच्चों की गुमशुदगी को भी इतनी प्राथमिकता नहीं दे पाती है। वहीं बीते एक साल में सिटी चाइल्ड लाइन ने फेसबुक, ट्विटर, व्हाट्सएप की मदद से करीब 30 प्रतिशत बिछुड़े बच्चों को परिजनों से मिलवाया है। जबकि राजधानी के कई थानों में गुमशुदगा लोगों के मामले लंबित पड़े हैं। जो आज भी उम्मीदों में जिंदा है।

केस-एक

18 अप्रैल 22 को एक नाबालिग फुटपाथ पर भटकता हुआ विकासनगर पुलिस को मिला। जिसके बाद पुलिस ने नाबालिग को चाइल्डलाइन टीम को सौंप दिया था। उधर परिजनों ने नाबालिग को तलाश कर रहे थे। इस बीच नाबालिग के पिता ने बेटे की तस्वीर फेसबुक पर अपलोड कर दी। इसके बाद लोगों ने नाबालिग की फोटो इस कदर शेयर की वह चाइल्ड लाइन टीम तक जा पहुंची। इसके बाद चाइल्ड लाइन ने नाबालिग के पिता से संपर्क कर बच्चे को सुपुर्द कर दिया था।

केस-दो

मई 22 को मडियांव पुलिस ने एक मानसिक बच्चे को सिटी चाइल्ड लाइन हवाले किया था। बेटे की तलाश पिता ने भटक रहे पिता ने उसकी तस्वीर सोशल मीडिया के व्हाट‌्सअप ग्रुप पर वायरल ग्रुप पर वायरल कर दी थी। जैसे ही मानसिक मंदित की फोटो चाइल्ड लाइन टीम को मिली। तब टीम के सदस्यों ने नाबालिग के पिता से संपर्क कर बच्चे को सुपुर्द कर दिया था।

केस-तीन

21 मई को बिहार के मुज्जफरनगर के एक नाबालिग को बाजारखाला पुलिस ने पकड़ा था। जिसके बाद पुलिस ने उसे सिटी चाइल्ड लाइन सौंप दिया था। नाबालिग मालगाड़ी में बैठकर लखनऊ आ गया था। कुछ दिनों बाद सोशल मीडिया पर नाबालिग गुमशुदगी मिली तो चाइल्ड लाइन टीम ने गूगल की मदद से उसका पता ट्रेस किया। फिर परिजनों को बुलाकर उसकी कांउसलिंग कराई गई। इसके बाद सीडब्ल्यूसी के आदेश पर घर वालों को नाबालिग की सुपुदर्गी दी गई ।

लोगों में फैल रही जागरुकता

सिटी चाइल्ड लाइन के काउंसलर कृष्णा शर्मा ने बताते हैं कि सोशल मीडिया का इस्तेमाल लाखों-करोड़ों यूजर्स करते हैं। जो एक दूसरे की पोस्ट को शेयर भी करते हैं। इन सबके बीच सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर गुमशुदगी शेयर करने का प्रचलन काफी बढ़ चुका है।

पुलिस की कार्यशैली को देखते हुए लोगों के जेहन में खाकी के प्रति अविश्वास पैदा हो चुका है। यही वजह है कि अपनों की तलाश में लोग सोशल मीडिया के सभी प्लेटफार्म का सहारा लेते हैं । जो कहीं हद तक मददगार भी साबित हुई है।

वहीं इस मामले में बाल कल्याण समिति की सदस्या डॉ संगीता शर्मा ने बताया कि बच्चों की तलाश में सोशल मीडिया मददगार साबित है। सोशल मीडिया की मदद से चाइल्डलाइन टीम ने कई बच्चों को सुरक्षित घर तक पहुंचाया है। ऐसे में लोगों को जागरुक होना चाहिए।

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