सीतापुर: अनुराग सहफसली से उगा रहे उन्नति की पौध, परंपरागत खेती से हटकर अलग बनाई पहचान
पिसावां/सीतापुर। कोरोना काल ने जिंदगी की रफ्तार में वो बदलाव लाए जो तमाम से लोगों के लिए एक प्रेरणा भी बने। कुछ ऐसा ही जिले में पिसावां इलाके के एक किसान ने कर दिखाया है। फिलहाल किसान के सहफसली नींबू, आंवला आदि की खेप लखनऊ की बाजारों में धड़ल्ले से खप रही है। उन्नतिशील किसान …
पिसावां/सीतापुर। कोरोना काल ने जिंदगी की रफ्तार में वो बदलाव लाए जो तमाम से लोगों के लिए एक प्रेरणा भी बने। कुछ ऐसा ही जिले में पिसावां इलाके के एक किसान ने कर दिखाया है। फिलहाल किसान के सहफसली नींबू, आंवला आदि की खेप लखनऊ की बाजारों में धड़ल्ले से खप रही है। उन्नतिशील किसान अब इलाके में ग्रामीणों को जागरूक भी कर रहे हैं।
जिले के पिसावां विकास खण्ड क्षेत्र के कुइयांखेरा गांव वासी किसान अनुराग पाल कहते हैं कि कोरोना काल से पहले उनकी स्नातक की पढ़ाई पूरी हुई। फिर खेती में हाथ आजमाना शुरू किया तो कोरोना आ गया, ऐसे में तमाम सी समस्याएं आने लगीं। कभी फसल बिकने में दिक्कत तो कभी खाद-बीज का टोटा। कहते हैं कि इसी बीच रेडियो पर एक संदेश सुना, फिर कुछ अलग करने का मन बना लिया। अनुराग बताते हैं कि छह एकड़ के खेत में नीबू, अमरूद, आंवला, अनार और मौसमी का पौधा एक साथ रोप दिया।
कम खपत की सहफसली को तैयार करने में दिन-रात एक कर दिया। बीते साल से फसल भी तैयार होने लगी। बताते हैं कि पहले सीतापुर की मण्डियों में शुद्ध देसी खाद से निर्मित फलों को हाथों-हाथ लिया गया, अब यहीं फसल लखनऊ की मण्डियों तक भेजी जा रही है। तैयार हुए नींबू की डिमाण्ड अधिक है। कहते हैं कि वे अब इलाके के किसान परिवार के बच्चों को पढ़ने के साथ सहफसली फसल उगाने के लिए भी प्रेरित कर रहे हैं।
एक पौधे में आठ से दस किलो नींबू
ढाई साल की मेहनत में किसान अनुराग आठ से दस किलो नींबू तैयार कर लेते हैं। बाकी फल और फूल वे तोड़कर अलग करते हैं। कहते हैं कि नींबू की फसल में इस बार तीन गुना मुनाफा हुआ है क्योंकि जब बाहर से आने वाले नींबू के दाम आंसमान छू रहे थे, तो इन्ही देसी नींबूओं ने खूब राहत दी है।
13 से 14 लाख का हो चुका है मुनाफा
अनुराग बताते हैं कि अब पारम्परिक खेती को बदलकर सहफसली का समय आ चुका है। इसी खेती में उन्होनें 13 से 14 लाख का माल तैयार कराया और मुनाफा भी कमाया है। इस समय 1700 नींबू के पेड़ हैं। जो दस से बारह फिट की लंबाई और चौड़ाई के अनुपात में लगे हैं।
यह भी पढ़ें:-बरेली: गो-आधारित प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने का दिया प्रशिक्षण
