बरेली: चेन स्मोकिंग से फेफड़ों के कैंसर का खतरा सबसे अधिक- डॉक्टर
बरेली, अमृत विचार। सांस की बीमारी बुजुर्गों में ही नहीं बल्कि युवाओं में भी बड़ी संख्या में सामने आ रही है। इसका मुख्य कारण है कि युवाओं में स्मोकिंग की आदत बढ़ती जा रही है। अगर समय पर इस लत को कम नहीं किया गया तो यह फेफड़ोंं के कैंसर का कारण बन जाती है। …
बरेली, अमृत विचार। सांस की बीमारी बुजुर्गों में ही नहीं बल्कि युवाओं में भी बड़ी संख्या में सामने आ रही है। इसका मुख्य कारण है कि युवाओं में स्मोकिंग की आदत बढ़ती जा रही है। अगर समय पर इस लत को कम नहीं किया गया तो यह फेफड़ोंं के कैंसर का कारण बन जाती है। यह बातें दिल्ली के साकेत स्थित मैक्स अस्पताल से आए वरिष्ठ पल्मोनोलॉजिस्ट डा. प्रशांत ने आईएमए की ओर से रविवार को आयोजित चिकित्सीय संगोष्ठी में कहीं। उनके साथ ही मैक्स से ही डा. नंदिनी और डा. मृगांका ने भी विचार रखे।
डा. प्रशांत सक्सेना ने कहा कि आजकल टीबी, अस्थमा, कैंसर के रोगियों की संख्या बढ़ रही है। लोगों को स्मोकिंग की आदत छोड़नी चाहिए। साथ ही मेट्रो सिटीज में एयर पॉल्यूशन एक बड़ी समस्या है, जिसके कारण ये बीमारियां बढ़ रही हैं। डा. नंदिनी गुलाटी ने बताया कि फेफड़ोंं को स्वस्थ्य रखने के लिए सुबह टहलना बहुत जरूरी है। दिनचर्या में सुधार की आवश्यकता है।
डा. मृगांका जुनेजा ने कहा कि यदि किसी को काफी दिन से बुखार-खांसी है तो तुरंत डॉक्टर की सलाह लें। ऐसा न करने से समय पर बीमारी का पता नहीं चलेगा और यह जानलेवा कैंसर या फिर टीबी का भी कारण बन सकता है। आईएमए अध्यक्ष डा. विमल कुमार भारद्वाज ने बताया कि पोस्ट कोविड रोगी, जिन्हें बुखार या निमोनिया होती है तो फाइब्रोसिस के कारण उनमें रिकवरी में दिक्कत होती है, इसलिए ऐसे रोगियों को बदलते मौसम में यदि सांस की दिक्कत है या थकावट हो तो डॉक्टर से सलाह लें।
वरिष्ठ फिजिशियन डा. सुदीप सरन ने बताया कि कोविड वैक्सीनेशन कराना जरूरी है। बूस्टर डोज लगवाने से शरीर में पनप रही कई बीमारियों से काफी हद तक निजात मिल सकती है। डा. मुरली छाबड़िया, आदित्य माहेश्वरी, डा. सोमेश महरोत्रा, डा. अनीस बेग, डा. पीके बॉस, डा. रवीश अग्रवाल, डा. राजीव गोयल, डा. सत्येंद्र सिंह, डा. आरके भास्कर आदि मौजूद रहे।
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