सड़कें टूट रहीं, रनवे पिघल रहे…गर्मी से बेहाल यूरोप, सिर्फ स्पेन-पुर्तगाल में 1000 लोगों की मौत
लंदन/नई दिल्ली। यूरोप में भीषण गर्मी ने लोगों के जनजीवन को बुरी तरह से प्रभावित कर दिया है। भयानक हीटवेव के कारण यूरोप के अधिकांश हिस्से में आगजनी की घटनाएं बेहद तेजी से बढ़ रही है। बढ़ते तापमान की वजह से जहां फ्रांस, स्पेन, पुर्तगाल और ग्रीस के जंगलों में आग लग गई, तो वहीं ब्रिटेन …
लंदन/नई दिल्ली। यूरोप में भीषण गर्मी ने लोगों के जनजीवन को बुरी तरह से प्रभावित कर दिया है। भयानक हीटवेव के कारण यूरोप के अधिकांश हिस्से में आगजनी की घटनाएं बेहद तेजी से बढ़ रही है। बढ़ते तापमान की वजह से जहां फ्रांस, स्पेन, पुर्तगाल और ग्रीस के जंगलों में आग लग गई, तो वहीं ब्रिटेन की सड़कें और रेलवे ट्रैक पिघल रहे हैं। इतिहास में पहली बार यहां पारा 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया। पूरे महाद्वीप में अब तक एक हजार से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है।
मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि तापमान अभी भी बढ़ रहा है। ब्रिटेन, स्पेन, फ्रांस, पुर्तगाल, इटली और टर्की में गर्मी सारे रिकॉर्ड तोड़ रही है। केवल पुर्तगाल में गर्मी से पिछले सात दिनों में 659 लोगों की मौत हो चुकी है। स्पेन और फ्रांस के जंगलों में लगी आग ने तापमान को और बढ़ा दी है। बताया जा रहा है कि हीटवेव की वजह से दर्जनों जंगलों में भीषण आग लग गई है।
सड़कें पिघलीं, ट्रैक फैल रहे, रनवे पिघल रहा
ब्रिटेन में गर्मी से हालात इतने बिगड़ गए हैं, जिससे वहां का ट्रांसपोर्ट सिस्टम गड़बड़ा गया है। खबर के मुताबिक, ब्रिटेन में सड़कों पर डामर पिघलने लगा है। लूटन एयरपोर्ट का रनवे भी पिघल गया। वहीं, रेलवे ट्रैक भी बढ़ते तापमान को सह नहीं पा रहे हैं और फैल रहे हैं। इस कारण कई ट्रेनें कैंसिल हो चुकीं हैं। इंग्लैंड में लोगों को ट्रेन से यात्रा न करने की सलाह दी गई है। परिवहन मंत्री ग्रांट शैप्स ने बताया कि यूके का रेल नेटवर्क इस भीषण गर्मी का सामना नहीं कर सकता। इसे अपग्रेड करने में सालों लग जाएंगे। उन्होंने बताया कि पारा 40 डिग्री सेल्सियस होने पर ट्रैक का तापमान 50 डिग्री, 60 डिग्री और यहां तक कि 70 डिग्री तक पहुंच जाता है। इस कारण ट्रैक पिघल सकते हैं और ट्रेन के पटरी से उतरने का खतरा बढ़ जाता है।
क्या है हीट वेव?
जब किसी इलाके में तापमान सामान्य से कहीं ज्यादा बढ़ जाए और ऐसा कई दिनों तक बना रहे, तब उसे हीट वेव कहते हैं। इस दौरान इलाके की ह्यूमिडिटी में भी इजाफा होता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, दुनियाभर में तापमान बढ़ने के कारण हमें पानी, खाना और ऊर्जा की कमी के साथ-साथ गंभीर बीमारियां, वक्त से पहले मौत और अपंगता का सामना करना पड़ सकता है।
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