अयोध्या: तीन माह में सर्पदंश से 22 मौत, लेकिन परिजनों को अब तक नहीं मिला मुआवजा, जानें क्यों

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अयोध्या। उत्तर प्रदेश में एक वर्ष पहले सर्पदंश को दैवीय आपदा घोषित कर 4 लाख के मुआवजे का ऐलान किया गया था, लेकिन जानकारी के अभाव में अयोध्या जनपद के लोग इस योजना का लाभ उठाने से वंचित रह जा रहे हैं। आलम यह है कि पिछले दो माह में करीब 6 लोगों ने मुआवजे …

अयोध्या। उत्तर प्रदेश में एक वर्ष पहले सर्पदंश को दैवीय आपदा घोषित कर 4 लाख के मुआवजे का ऐलान किया गया था, लेकिन जानकारी के अभाव में अयोध्या जनपद के लोग इस योजना का लाभ उठाने से वंचित रह जा रहे हैं। आलम यह है कि पिछले दो माह में करीब 6 लोगों ने मुआवजे के लिए अप्लाई किया है, जबकि तीन माह में ही जनपद में तकरीबन 22 लोगों की मौत हो चुकी है। सबसे बड़ी बात यह है कि लंबी प्रक्रिया के चलते सरकारी सहायता दूर की कौड़ी साबित हो रही है।

सांप काटने के मामले वैसे तो साल भर सामने आते रहते हैं, लेकिन बरसात के मौसम में तेजी से इजाफा होता है। उत्तर प्रदेश में सर्पदंश को दैवीय आपदा घोषित किया गया है। इसके तहत सर्पदंश से मौत पर पीड़ित परिवार को चार लाख रुपए का मुआवजा दिया जाता है। अभी हाल ही में जनपद के पूराबाजार व मिल्कीपुर से सर्पदंश से मौत का केस सामने आया, जिसमें परिवारीजनों ने बताया कि उन्हें इस योजना के बारे में मालूम ही नहीं है। जनपद की क्षेत्रों की सीएचसी व पीएचसी से मिली रिपोर्ट के अनुसार सर्पदंश से लगभग तीन माह में लगभग 22 लोगों की मौत हो चुकी है। कई केस ऐसे भी आते हैं, जो उपचार के बाद स्वस्थ हो जाते हैं।

जिला अस्पताल में प्रतिदिन आते हैं औसत चार केस

जिला अस्पताल के इमरजेंसी से मिली सूचना के मुताबिक सर्पदंश के प्रतिदिन तीन से चार केस आते हैं। बरसात के दौरान केसों की संख्या भी बढ़ जाती है। ईएमओ एके शुक्ला ने बताया कि जिला अस्पताल आने वाले सभी मरीजों को बेहतर ट्रीटमेंट देकर बचाने की कोशिश की जाती है। हालांकि तबीयत बिगड़ते देख उन्हें दर्शननगर टामा सेंटर रेफर कर दिया जाता है।

सदर तहसील से 3 ने ही किया है अप्लाई

जिले में पिछले दो माह में सर्पदंश से मृत 6 लोगों के परिवारीजनों ने ही मुआवजे के लिए अप्लाई किया है, जिन्हें अभी तक मुआवजा राशि नहीं मिली है। विभागीय आंकड़ों की मानें तो सदर तहसील से 3, बीकापुर से 2 व रुदौली तहसील से 1 आवेदन आया है, जबकि नियमानुसार 7 दिन के भीतर मुआवजा राशि मिल जानी चाहिए।

पोस्टमार्टम के बाद ही मिलता है मुआवजा

दैवीय आपदा योजना का लाभ लेने के लिए नियमता सर्पदंश से जिस किसी की भी मौत होती है उसका पोस्टमार्टम कराना जरूरी होता है। बिसरा प्रिजर्व करने की आवश्यकता नहीं होती है तो मृतक के आश्रितों को सात दिन के भीतर आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाती है। कई बार पोस्टमार्टम में मौत का कारण स्पष्ट न होने पर संबंधित शवों का बिसरा सुरक्षित रख लिया जाता है।

ऐसी स्थिति में मृतक के परिजनों को तब तक सरकारी मदद नहीं मिल सकती है, जब तक विसरा की जांच विधि विज्ञान प्रयोगशाला से आ नहीं आ जाती। इसमें लंबा वक्त लग जाता है, जिसके चलते पीड़ित परिवार को समय पर मुआवजा नहीं मिल पाता। कई बार तो सर्पदंश से घर में ही या रास्ते में ही मौत हो जाती है। जानकारी के अभाव में लोग मृतक का दाह संस्कार कर देते हैं।

पिछले पांच दिन में हो चुकी है तीन की मौत

थाना महाराजगंज क्षेत्र के पुलिस चौकी पूरा बाजार अंतर्गत ग्राम ऐमी घाट निवासी विद्यावती 52 वर्ष पत्नी स्वर्गीय राम नयन की बुुुधवार को सर्प दंश से मौत हो गई थी। वहीं शुक्रवार को इनायतनगर थाने के हैरिंग्टनगंज पुलिस चौकी क्षेत्र में सर्पदंश से दो लोगों की मौत हो चुकी है, जिसमें एक को सांप ने टैक्टर पर काटा था। भाऊपुर निवासी अनिल तिवारी उर्फ राजू का 26 वर्षीय पुत्र राहुल जानवरों के लिए बुधवार को चरी काटने गया था। चरी काटने के बाद बोझ बना रहा था। उसी में बैठे विषैले जानवर ने काट लिया, जिसकी ट्रामा सेंटर लखनऊ में मौत हो गई। हालांकि तीनों का पोस्टमार्टम कराया गया है।

विभिन्न तहसीलों से दो माह में 6 केस आए हैं, जिनको गाइडलाइन के मुताबिक राशि प्रदान किए जाने के लिए शासन को संदर्भित कर दिया गया है। लोग जागरुकता के अभाव में इस योजना के तहत क्लेम नहीं कर पा रहे हैं…महेंद्र कुमार सिंह, दैवीय आपदा प्रबंधन के नोडल अधिकारी व एडीएम वित्त एवं राजस्व।

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