चीन के 1.5 करोड़ युवा बेरोजगार, इंजीनियरिंग की डिग्री वाले सरकारी दफ्तरों में बन रहे बाबू

चीन के 1.5 करोड़ युवा बेरोजगार, इंजीनियरिंग की डिग्री वाले सरकारी दफ्तरों में बन रहे बाबू

बीजिंग। बेरोजगारी का असर दुनियाभर के युवाओं पर पड़ा है। अच्छे डिग्री वाले स्टूडेंट्स को भी सरकारी दफ्तर के बाबू बनने पड़ रहे हैं। चीन में 16 से 24 साल के युवाओं में बेरोजगारी तेजी से बढ़ रही है। लिहाजा, 2022 में हुई कई रिसर्च में यह डेटा सामने आया कि इंजीनियरिंग की डिग्री वाले …

बीजिंग। बेरोजगारी का असर दुनियाभर के युवाओं पर पड़ा है। अच्छे डिग्री वाले स्टूडेंट्स को भी सरकारी दफ्तर के बाबू बनने पड़ रहे हैं। चीन में 16 से 24 साल के युवाओं में बेरोजगारी तेजी से बढ़ रही है। लिहाजा, 2022 में हुई कई रिसर्च में यह डेटा सामने आया कि इंजीनियरिंग की डिग्री वाले युवा अब सरकारी दफ्तरों में बाबू बनने के लिए मजबूर हैं। करीब 1.5 करोड़ युवाओं ने सरकारी नौकरी के लिए आवेदन दिए हैं।

संभावना है कि इस साल चीन में नौकरी के क्षेत्र में आने वाले नए डिग्री होल्डर छात्रों की संख्या 1.2 करोड़ है। कोरोना के समय सरकार की कड़ी नीतियों से कई कंपनियों में कर्मचारियों की छंटनी हुई। इससे कई लोग सड़क पर आ गए। वहीं, रियल एस्टेट और शिक्षा से जुड़ी कंपनियों पर भी सरकार नीतियों का असर पड़ा है।

इस साल 1.76 करोड़ कॉलेज ग्रैजुएट निकले हैं, जिससे नौकरियों का संकट पैदा हो गया है। चीन में करीब 8 करोड़ युवा बेरोजगार हैं। बीजिंग की सिंघुआ यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर झेंग युहुआंग ने कहा कि 2022 चीन के लिए मुश्किल साल है। झेंग के अनुसार, 2022 के पहले क्वॉर्टर में चीन में 4.60 लाख कंपनियां बंद हो चुकी हैं। 31 लाख बिजनेस परिवार दिवालिया हो गए हैं।

हाल ही में चीन में कई बैंकों से पैसे निकालने पर रोक लगा दी गई है। बैंक ऑफ चाइना का कहना है कि यहां जमा पैसा एक निवेश है। इसे निकाला नहीं जा सकता। इस फैसले के खिलाफ चीन में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। चीन की कम्युनिस्ट सरकार ने भारी संख्या में सेना के टैंकों को सड़कों पर उतार दिया है, ताकि लोगों को पैसा निकालने से रोका जाए।

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