इमाम हुसैन ने उतार दी बातिल के चेहरे से नकाब : मौलाना तालिब हुसैन
रामपुर,अमृत विचार। दिल्ली से आए मौलाना तालिब हुसैन ने कहा कि अगर शऊर इंसानी नहीं हो तो कायनात की हर चीज बेमायनी हो जाएगी। हक और बातिल के महाज पर मारफत और शऊर इंसानी है जो उसकी रहनुमाई करता है। कहा कि हजरत इमाम हुसैन ने बातिल के चेहरे से नकाब उतार दी। शहर के …
रामपुर,अमृत विचार। दिल्ली से आए मौलाना तालिब हुसैन ने कहा कि अगर शऊर इंसानी नहीं हो तो कायनात की हर चीज बेमायनी हो जाएगी। हक और बातिल के महाज पर मारफत और शऊर इंसानी है जो उसकी रहनुमाई करता है। कहा कि हजरत इमाम हुसैन ने बातिल के चेहरे से नकाब उतार दी।
शहर के मोहल्ला लाल कबर स्थित इमामबाड़ा मिर्जा मोहम्मद जफर बेग में अशरा-ए-मजालिस को खिताब करते हुए मौलाना ने कहा कि आज के आधुनिक दौर में भी सबसे अह्म चीज मारफत और शऊर ए इंसानी है। शऊर और मारफत की बुनियाद पर हक को पहचान कर हक के साथ रहना है और बातिल से दूर रहना है। शैतान के नुमाइंदे हक को छिपाने की अपनी तमाम कोशिशों में मसरूफ हैं। लेकिन, इमाम हुसैन वह चिरागे हिदायत हैं जिन्होंने बातिल के चेहरे से नकाब उतार दी। हर अजादार को पैगामे हुसैन अपनी जिम्मेदारी का अहसास दिलाता है।
इससे पहले मिर्जा तकी अब्बास ने सोज ख्वानी की। मजलिस में मुज्तबा आब्दी, अजहर हसन अब्बास, रजा अब्बास, मोहसिन हुसैन समेत काफी अकीदतमंद मौजूद रहे।
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