UP में ब्लॉक प्रमुख ही संभालेंगे प्रशासक की कुर्सी : नीतिगत फैसलों पर डीएम की मंजूरी जरूरी

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Edited By Virendra Pandey
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लखनऊ, अमृत विचार: उत्तर प्रदेश में क्षेत्र पंचायत अध्यक्षों (ब्लॉक प्रमुखों) का कार्यकाल रविवार को समाप्त होने के बाद प्रशासनिक व्यवस्था में किसी तरह का व्यवधान न आए, इसके लिए योगी सरकार ने अंतरिम व्यवस्था लागू कर दी है। शासन ने निर्णय लिया है कि नई क्षेत्र पंचायतों के गठन और पहली बैठक होने अथवा अधिकतम छह माह की अवधि तक निर्वर्तमान ब्लॉक प्रमुख ही सोमवार से प्रशासक के रूप में कार्य करेंगे। इस संबंध में पंचायती राज विभाग ने सभी जिलाधिकारियों को शासनादेश जारी कर दिया है।

शासनादेश के अनुसार, उत्तर प्रदेश क्षेत्र पंचायत एवं जिला पंचायत अधिनियम-1961 के प्रावधानों के तहत वर्ष 2021 में गठित क्षेत्र पंचायतों का कार्यकाल 19 जुलाई 2026 को समाप्त हो रहा है। नई क्षेत्र पंचायतों के गठन में लगने वाले समय को देखते हुए संबंधित जिलाधिकारी या जिला मजिस्ट्रेट निर्वर्तमान ब्लॉक प्रमुखों को प्रशासक के रूप में नामित करेंगे, ताकि विकास कार्य और प्रशासनिक गतिविधियां निर्बाध रूप से जारी रह सकें।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि प्रशासक के रूप में कार्यरत 826 ब्लॉक प्रमुख केवल नियमित और आवश्यक प्रशासनिक कार्यों का ही संचालन करेंगे। किसी भी प्रकार का नीतिगत या विशेष महत्व का निर्णय बिना जिलाधिकारी की स्वीकृति के नहीं लिया जाएगा। नई क्षेत्र पंचायतों की पहली बैठक होते ही यह अंतरिम व्यवस्था स्वतः समाप्त हो जाएगी। इस फैसले से प्रदेश की सभी क्षेत्र पंचायतों में विकास योजनाओं और दैनिक प्रशासनिक कार्यों की निरंतरता बनी रहेगी। साथ ही नई निर्वाचित क्षेत्र पंचायतों के गठन तक प्रशासनिक शून्यता की स्थिति भी नहीं बनेगी।

अधिकतम छह माह तक रहेगी व्यवस्था

शासनादेश के अनुसार, यदि किसी कारण नई क्षेत्र पंचायतों का गठन तत्काल नहीं हो पाता है तो निर्वर्तमान ब्लॉक प्रमुख अधिकतम छह माह तक प्रशासक के रूप में कार्य करेंगे। इस अवधि में केवल नियमित कार्यों का संचालन होगा, जबकि नीतिगत निर्णयों के लिए जिलाधिकारी की अनुमति अनिवार्य रहेगी। 

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