CBSE की डिजिटल कॉपी जांच पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी, छात्रों की 'हताशा' पर जताई चिंता

Amrit Vichar Network
Published By Muskan Dixit
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ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली को लेकर दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने व्यवस्था में सुधार की जरूरत बताई, केंद्र सरकार से मांगी स्थिति रिपोर्ट।

नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली (On-Screen Marking- OSM) को लेकर छात्रों की बढ़ती शिकायतों पर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर चिंता व्यक्त की है। अदालत ने कहा कि डिजिटल मूल्यांकन प्रक्रिया में कुछ व्यवस्थित और लगातार बढ़ती समस्याएं सामने आ रही हैं, जिन पर गंभीरता से ध्यान देने की आवश्यकता है।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा, "छोटे बच्चों में हताशा का स्तर देखिए।" इसके साथ ही अदालत ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से इस मामले में सहयोग देने और सरकार की ओर से उठाए जा रहे कदमों की जानकारी उपलब्ध कराने को कहा।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला एक जनहित याचिका (PIL) से जुड़ा है, जिसमें केंद्र सरकार और CBSE को निर्देश देने की मांग की गई है कि वे ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली के तहत बोर्ड परीक्षाओं के मूल्यांकन के लिए स्पष्ट नियम और दिशानिर्देश तैयार करें।

OSM प्रणाली में परीक्षकों को छात्रों की मूल उत्तर पुस्तिकाओं की बजाय उनकी स्कैन की गई डिजिटल कॉपियां कंप्यूटर स्क्रीन पर उपलब्ध कराई जाती हैं, जिनका मूल्यांकन ऑनलाइन किया जाता है।

कोर्ट ने जताई प्रणालीगत खामियों पर चिंता

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना भी शामिल थे, ने कहा कि डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली में कुछ ऐसी समस्याएं दिखाई दे रही हैं जो धीरे-धीरे गंभीर रूप ले रही हैं।

न्यायमूर्ति बागची ने सॉलिसिटर जनरल से कहा कि अदालत सरकार को विरोधी पक्ष के रूप में नहीं देख रही, बल्कि समाधान तलाशने के लिए उसकी सहायता चाहती है। अदालत ने इस मामले में स्थिति रिपोर्ट (Status Report) भी मांगी है।

सरकार ने क्या कहा?

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि याचिका में छात्रों के व्यक्तिगत अंकपत्रों से जुड़ी कई शिकायतों का समाधान किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि सरकार इस मुद्दे को गंभीरता से ले रही है।

उन्होंने यह भी जानकारी दी कि डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली की समीक्षा और आवश्यक सुधारों के सुझाव देने के लिए एस. राधा चौहान की अध्यक्षता में एक सदस्यीय समिति गठित की गई है।

याचिका में क्या-क्या मांगें की गई हैं?

राकेश बिंजोला की ओर से अधिवक्ता लक्ष्मीकांत शुक्ला के माध्यम से दायर जनहित याचिका में मांग की गई है कि—

  • OSM मूल्यांकन प्रणाली के लिए स्पष्ट नियम और दिशा-निर्देश बनाए जाएं।
  • सुधारों की निगरानी और क्रियान्वयन के लिए उच्चस्तरीय समिति गठित की जाए।
  • जिन छात्रों को अस्थायी प्रवेश मिल चुका है या जिन्होंने प्रवेश परीक्षाएं पास कर ली हैं, उन्हें न्यूनतम अंकों की अनिवार्यता में राहत दी जाए।
  • कक्षा 12 में 75 प्रतिशत या अन्य न्यूनतम अंकों की अनिवार्यता से भी आवश्यक परिस्थितियों में छूट दी जाए।

अगले सप्ताह होगी अगली सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल से CBSE द्वारा किए जा रहे सुधारात्मक प्रयासों की विस्तृत जानकारी मांगी है। मामले की अगली सुनवाई अगले सप्ताह निर्धारित की गई है।

यह भी पढ़ेंः CBSE का बड़ा बदलाव: 9वीं के छात्रों के लिए तीसरी भाषा का नया नियम लागू, जानिए किसे देनी होगी बोर्ड परीक्षा और किसे मिलेगी छूट

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