Ayodhya Ram Mandir Trust : ट्रस्ट में बड़े बदलाव के संकेत, यतींद्र मिश्र की बढ़ी दावेदारी; संतों ने मांगी नेतृत्व में भागीदारी

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Published By Deepak Mishra
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श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में अयोध्या के दो प्रमुख संतों व अयोध्या राज परिवार के यतींद्र मिश्र भी चर्चा में हैं। संतों ने बुधवार को ट्रस्ट के पदाधिकारियों से मुलाकात कर बड़े बदलाव का इशारा किया है। चंपत राय व अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार किए जाने के बाद ट्रस्ट में तीन पद खाली हो गए हैं।

अयोध्या, अमृत विचार : श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में अयोध्या के दो प्रमुख संतों व अयोध्या राज परिवार के यतींद्र मिश्र भी चर्चा में हैं। संतों ने बुधवार को ट्रस्ट के पदाधिकारियों से मुलाकात कर बड़े बदलाव का इशारा किया है। चंपत राय व अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार किए जाने के बाद ट्रस्ट में तीन पद खाली हो गए हैं।

इनमें अयोध्या राज परिवार के दिवंगत सदस्य बिमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र का पद भी शामिल है, जिनका 2025 में निधन हो गया था। बताया जा रहा है कि 22 जुलाई को ट्रस्ट की संभावित बैठक में नए सदस्यों का मनोनयन किया जा सकता है। नए सदस्यों में सबसे अधिक चर्चा के केंद्र हैं पूर्व सदस्य स्व. विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र के पुत्र यतींद्र मिश्र। उन्होंने बुधवार सुबह ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी से मुलाकात की।

बताया जा रहा है कि उन्हें मिलने के लिए बुलाया गया था। यतींद्र राम मंदिर से जुड़े सांस्कृतिक और धार्मिक कार्यों में सक्रिय रहे हैं। राज परिवार की परंपरा को देखते हुए उनका ट्रस्ट में शामिल होना प्रतीकात्मक और व्यावहारिक दोनों रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वहीं, बुधवार को अयोध्या के संतों ने ट्रस्ट के पदाधिकारियों से मुलाकात की।

बैठक में संतों ने एकमत से मांग की कि ट्रस्ट की कमान संत समुदाय के हाथ में हो। कहा कि राम मंदिर जैसे पवित्र स्थल के प्रबंधन में धार्मिक गुरुओं की भूमिका केंद्रीय होनी चाहिए। राम वल्लभा कुंज के अधिकारी राजकुमार दास ने बैठक के बाद बाहर आने पर कहा कि आने वाले समय में कुछ बड़ा परिवर्तन होगा, जो सभी को दिखाई देगा। राम मंदिर आस्था का केंद्र है। इसलिए यहां की व्यवस्था भी महत्वपूर्ण है। जानकी घाट बड़ा स्थान मंदिर के महंत जन्मेजयशरण ने बताया कि राम मंदिर ट्रस्ट में संतों का भी नेतृत्व भी रहे, इसके लिए बल दिया गया है।

संतों ने रखी यह बड़ी मांग

अयोध्या के प्रमुख संतों ने ट्रस्ट पदाधिकारियों से मुलाकात कर मांग की कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के नेतृत्व में संत समाज की प्रभावी भागीदारी सुनिश्चित की जाए। संतों का कहना है कि राम मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है, इसलिए इसके संचालन और निर्णय प्रक्रिया में संतों की केंद्रीय भूमिका होनी चाहिए। संत राजकुमार दास ने बड़े बदलाव के संकेत दिए, जबकि महंत जन्मेजयशरण ने ट्रस्ट में संत नेतृत्व को समय की आवश्यकता बताया।

ट्रस्ट में क्यों खाली हुए तीन पद?

  • महामंत्री चंपत राय के इस्तीफे के बाद एक पद रिक्त हुआ।
  • ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफे से दूसरा पद खाली हुआ।
  • अयोध्या राज परिवार के सदस्य स्व. बिमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र के 2025 में निधन के बाद तीसरा पद रिक्त है।
  • अब इन तीनों पदों पर नए सदस्यों के मनोनयन को लेकर मंथन तेज हो गया है। सूत्रों के अनुसार, 22 जुलाई को प्रस्तावित ट्रस्ट बैठक में इस पर निर्णय लिया जा सकता है।

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