अमरनाथ यात्रा 2026: 17 अगस्त से शुरू होने की संभावना, रक्षाबंधन पर 28 अगस्त को होगा समापन

Amrit Vichar Network
Published By Muskan Dixit
On

जम्मू से रवाना होगा पहला जत्था, पुंछ प्रशासन ने तेज की तैयारियां; सुरक्षा, लंगर, चिकित्सा और आवास की व्यापक व्यवस्था

जम्मू: जम्मू-कश्मीर के सीमावर्ती पुंछ जिले में आयोजित होने वाली 12 दिवसीय श्री बाबा बुद्ध अमरनाथ यात्रा इस वर्ष 17 अगस्त 2026 से शुरू होने की संभावना है। यात्रा का समापन 28 अगस्त, रक्षाबंधन के दिन प्रस्तावित है। हर वर्ष की तरह इस बार भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के बाबा बुद्ध अमरनाथ मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचने की उम्मीद जताई जा रही है।

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, यात्रा का पहला जत्था जम्मू के भगवती नगर यात्री निवास से पुंछ के लिए रवाना होगा। यात्रा को सुरक्षित और व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए जिला प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं।

श्रद्धालुओं के लिए विशेष सुविधाओं का इंतजाम

प्रशासन की ओर से यात्रा मार्ग और मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के लिए लंगर, स्वच्छता व्यवस्था, शौचालय, वाटरप्रूफ टेंट, जल निकासी, आवास, वाहन पार्किंग, चिकित्सा सेवाएं, निर्बाध बिजली, पेयजल और सार्वजनिक उद्घोषणा प्रणाली जैसी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

प्रशासन ने तैयारियों की समीक्षा की

पुंछ के उपायुक्त अशोक कुमार शर्मा ने 12 जुलाई को यात्रा तैयारियों की समीक्षा बैठक की थी। इस दौरान श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर स्वामी विश्वात्मानंद सरस्वती जी महाराज ने कहा कि पिछले वर्षों में सामने आई कमियों को इस बार दूर कर श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।

उपायुक्त ने भरोसा दिलाया कि यात्रा शुरू होने से पहले सभी आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी कर ली जाएंगी।

सुरक्षा व्यवस्था रहेगी चाक-चौबंद

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शफकत हुसैन भट ने कहा कि यात्रा के शांतिपूर्ण और सुरक्षित संचालन के लिए व्यापक सुरक्षा प्रबंध किए जाएंगे, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

क्या है बाबा बुद्ध अमरनाथ मंदिर का महत्व?

समुद्र तल से करीब 4,600 फीट की ऊंचाई पर स्थित बाबा बुद्ध अमरनाथ मंदिर पुंछ जिले की लोरन घाटी में पुलस्ता नदी के किनारे स्थित है। यह मंदिर जम्मू से लगभग 290 किलोमीटर दूर है। स्थानीय मान्यता के अनुसार, अमरनाथ गुफा की यात्रा बाबा बुद्ध अमरनाथ के दर्शन के बिना अधूरी मानी जाती है, इसलिए इस यात्रा का विशेष धार्मिक महत्व है।

संबंधित समाचार