Alert: स्मार्टफोन और विज्ञापनों ने युवाओं को बनाया जुए का शिकार, रिसर्च में हुआ चौंकाने वाला खुलासा

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Published By Muskan Dixit
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विशेषज्ञों का कहना है कि स्मार्टफोन, ऑनलाइन बेटिंग और जुए के बढ़ते विज्ञापनों के कारण युवाओं में कम उम्र में जुए की लत का जोखिम तेजी से बढ़ रहा है। अध्ययन में सरकार से कड़े नियमन और परिवारों से बच्चों को जागरूक करने की अपील की गई है।

डिजिटल डेस्क: युवाओं में कम उम्र में जुए की बढ़ती लत को लेकर विशेषज्ञों ने गंभीर चिंता जताई है। मोनाश यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञ चार्ल्स लिविंगस्टोन द्वारा साझा किए गए अध्ययन के अनुसार, ऑनलाइन सट्टेबाजी, पोकर मशीनों और जुए के बढ़ते विज्ञापनों ने युवाओं को पहले की तुलना में अधिक जोखिम में डाल दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस समस्या से निपटने के लिए सरकार को जुआ उद्योग पर सख्त नियमन लागू करने के साथ-साथ परिवारों को भी बच्चों को इसके दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक करना होगा।

18 से 34 वर्ष के युवाओं में अधिक खतरा

अध्ययन के मुताबिक, ऑस्ट्रेलिया में आठ प्रतिशत से अधिक वयस्क किसी न किसी रूप में जुए के दुष्प्रभावों का सामना कर रहे हैं, जबकि लगभग एक प्रतिशत वयस्क अत्यधिक जोखिम वाले स्तर पर जुआ खेलते हैं। विशेष रूप से 18 से 34 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं में जुए की लत का खतरा अधिक पाया गया है।

विशेषज्ञों का कहना है कि जो युवा नियमित रूप से पोकर मशीन (पोकी) या ऑनलाइन सट्टेबाजी में शामिल होते हैं, उनमें से लगभग 90 प्रतिशत को आर्थिक नुकसान, रिश्तों में तनाव और अन्य गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ता है असर

अध्ययन में बताया गया है कि जुए की लत केवल आर्थिक नुकसान तक सीमित नहीं रहती। इससे अपराधबोध, शर्म, तनाव, अवसाद और चिंता जैसी मानसिक समस्याएं भी बढ़ सकती हैं। शोध में जुए और आत्महत्या के बढ़ते जोखिम के बीच भी संबंध का उल्लेख किया गया है।

परिवार और समाज भी होते हैं प्रभावित

विशेषज्ञों के अनुसार, जुए का असर केवल जुआ खेलने वाले व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता। इसका प्रभाव परिवार, जीवनसाथी, बच्चों, दोस्तों और कार्यस्थल तक पहुंचता है। अध्ययन में माता-पिता की जुए की लत को पारिवारिक विवाद, घरेलू हिंसा, बच्चों की उपेक्षा और दुर्व्यवहार जैसी समस्याओं से भी जोड़ा गया है।

स्मार्टफोन और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म ने बढ़ाया जोखिम

शोधकर्ताओं का कहना है कि स्मार्टफोन और ऑनलाइन बेटिंग प्लेटफॉर्म के कारण अब युवा घर बैठे आसानी से जुआ खेल सकते हैं। कई मामलों में परिवार को इसकी जानकारी भी नहीं होती। किशोरावस्था में मस्तिष्क के विकास के दौरान जोखिम लेने की प्रवृत्ति अधिक होने से इस उम्र में जुए की लत लगने की संभावना बढ़ जाती है।

विज्ञापनों और डिजिटल डेटा पर भी चिंता

अध्ययन में कहा गया है कि जुआ कंपनियां उपयोगकर्ताओं के व्यवहार से जुड़ा डेटा एकत्र कर लक्षित विज्ञापन दिखाती हैं, जिससे लोगों को दोबारा जुआ खेलने के लिए प्रेरित किया जाता है। विशेषज्ञों ने जुए के विज्ञापनों पर कड़े प्रतिबंध और उद्योग के लिए अधिक प्रभावी नियामक व्यवस्था की आवश्यकता बताई है।

इलाज संभव, लेकिन लोग नहीं लेते मदद

विशेषज्ञों ने बताया कि कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी (CBT) जैसी उपचार पद्धतियां जुए की लत से बाहर निकलने में प्रभावी साबित हो सकती हैं। हालांकि, सामाजिक कलंक और शर्म के कारण अधिकांश लोग समय पर उपचार नहीं कराते।

माता-पिता के लिए विशेषज्ञों की सलाह

बच्चों से खेलों को मनोरंजन के रूप में देखने की बात करें, जुए को खेल का हिस्सा न मानें।
रात 8:30 बजे के बाद खेल प्रसारण देखने से बचें, क्योंकि इस समय जुए के विज्ञापन प्रसारित हो सकते हैं।
बच्चों के मोबाइल और अन्य उपकरणों में जुआ वेबसाइटों और भुगतान विकल्पों को ब्लॉक करने वाले डिजिटल टूल्स का उपयोग करें।

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