मुरादाबाद : चांदी वाले ताजिए पर हाजिरी देकर अकीदतमंदों ने मांगी मन्नतें
मुरादाबाद,अमृत विचार। नवीं मोहर्रम की रात शहर के अकीदतमंदों ने चांदी के ताजिया पर हाजिरी दी और चांदी के ताजिया की जियारत पर मन्नतें मांगी। दूसरी ओर शहर के अलग-अलग इलाकों में दसवीं मोहर्रम को निकाले जाने वाले जुलूस में शामिल होने वाले ताजिएं देर रात तक तैयार किए गए। मोहर्रम की नवीं तारीख को …
मुरादाबाद,अमृत विचार। नवीं मोहर्रम की रात शहर के अकीदतमंदों ने चांदी के ताजिया पर हाजिरी दी और चांदी के ताजिया की जियारत पर मन्नतें मांगी। दूसरी ओर शहर के अलग-अलग इलाकों में दसवीं मोहर्रम को निकाले जाने वाले जुलूस में शामिल होने वाले ताजिएं देर रात तक तैयार किए गए।
मोहर्रम की नवीं तारीख को थाना नागफनी क्षेत्र के मोहल्ला किसरोल स्थित वारसी बिल्डिंग में चांदी का ताजिया रखा जाता है। इसके लिए कई दिन पहले से तैयारी की जाती है। मोहर्रम की नवीं तारीख में हजारों लोग चांदी के ताजिए की ज्यारत करने के आते हैं। इसकी व्यवस्था के लिए प्रशासन की ओर से पुलिस फोर्स भी तैनात की जाती है। चांदी के ताजिए की जियारत करने के लिए आने वाली महिला व पुरुषों को अलग-अलग लाइन में लगाकर अंदर भेजा जाता है। यहां मुस्लिमों के साथ-साथ अन्य धर्मों के लोग भी चांदी के जातिए की जियारत करने आते हैं। 100 सालों से नवीं मोहर्रम पर रखे जाने वाले चांदी के ताजिए की जियारत कर लोग अपनी मन्नतें मांगते हैं।
सोमवार को भी नवीं मोहर्रम को चांदी का ताजिया रखा गया। शाम होते चांदी का ताजिया पर लोगों का आना शुरू हो गया। रात होते अकीदतमंदों की भीड़ हजारों में हो गई। सभी ने चांदी के ताजिया की जियारत कर अपनी मन्नत मांगी। रात के समय अन्य धर्मों के लोगों ने भी ताजिया पर सलामी दी। व्यवस्था में इलियास हुसैन वारसी, शादाब अली उर्फ आशी वारसी, फैजान हैदर वारसी, अबरार वारसी, अनस वारसी, जफर वारसी, अदीब वारसी, हमजा वारसी व पप्पू वारसी समेत अन्य लोग शामिल रहे।
आज सबसे पहले रवाना होगा कंबल का ताजिया
जुलूस की शुरुआत कंबल वाले ताजिया से होती है। इसे जिलाधिकारी और एसएसपी रवाना करते हैं। कंबल वाले ताजिया की शुरुआत 1885 में काली सुल्तान हुसैन ने की थी। काले कंबल से बनने वाले इस ताजिया को ताजियों का सरदार कहते हैं। मान्यता के अनुसार कंबल वाला ताजिया उठाकर सबसे पहले रवाना होता है। जिलाधिकारी, एसएसपी और ताजिया इंतजामिया कमेटी के लोग चलते हैं। ताजिया को हूरों की मौजूदगी में उठाया जाता है।
गमे हुसैन में शिया समुदाय ने किया छुरियों का मातम
मोहर्रम का चांद दिखते ही शिया समुदाय में मजलिसों मातमों का दौर शुरू हो जाता है। सातवीं मोहर्रम को शिया समुदाय द्वारा शहर में मातमी जुलूस निकाला गया था। सोमवार को नवीं मोहर्रम को शिया समुदाय में पूरा दिन मजलिसों का दौर चला, जिसके बाद रात को सभी लोग कोहना मुगलपुरा स्थित कुली खां के इमाम बाड़े में जमा हुए। जहां सभी अजादारों ने गमे हुसैन में छुरियों का मातम किया। इस दौरान हाय हुसैन, या हुसैन की सदाएं बुलंद की गईं। इमाम बाड़ा के आसपास भारी पुलिस फोर्स तैनात रहा।
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