राजधानी में केजरीवाल
दिल्ली विधानसभा चुनाव के नतीजों से साफ हो गया है कि वहां की जनता ने अरविंद केजरीवाल के कामकाज के तौर-तरीकों और राज्य के विकास में किए गए उनके प्रयोगों पर मुहर लगा दी है। जिस तरह से दिल्ली की जनता ने अरविंद केजरीवाल को अपना समर्थन दिया है, साफ है दिल्ली के मुख्यमंत्री के …
दिल्ली विधानसभा चुनाव के नतीजों से साफ हो गया है कि वहां की जनता ने अरविंद केजरीवाल के कामकाज के तौर-तरीकों और राज्य के विकास में किए गए उनके प्रयोगों पर मुहर लगा दी है। जिस तरह से दिल्ली की जनता ने अरविंद केजरीवाल को अपना समर्थन दिया है, साफ है दिल्ली के मुख्यमंत्री के लिए जनता की उम्मीदों पर खरा उतरना अब और चुनौतीपूर्ण होगा। एक तरह से दिल्ली की जनता ने केजरीवाल से साफ कह दिया है कि आप जैसे सरकार चलाओ, हम आपके साथ हैं।
दूसरी तरफ लोकसभा चुनाव में दिल्ली की सातों सीट जीतने वाली भाजपा विधानसभा चुनाव में अपना प्रदर्शन दोहरा पाने में विफल रही है। लोकसभा चुनाव में उसने 65 सीटों पर बढ़त बनाई थी। हालांकि उसका वोट प्रतिशत जरूर बढ़ा है, जो कि उसके लिए एक संतोष का विषय भले ही हो सकता हो, मगर पांच राज्यों के मुख्यमंत्रियों, कई पूर्व मुख्यमंत्रियों, गृह मंत्री अमित शाह तथा अन्य केद्रीय मंत्रियों को चुनाव प्रचार में लगाने के बावजूद भाजपा का प्रदर्शन निराशाजनक रहा है तो यह उसके रणनीतिकारों के लिए मंथन का विषय होगा।
इन चुनाव परिणामों से यह साफ है कि दिल्ली की जनता के लिए स्थानीय मुद्दे पहले थे और केजरीवाल सरकार ने मुफ्त बिजली, पानी समेत तमाम योजनाओं का जो पिटारा जनता के लिए खोला, जनता ने उनका स्वागत किया है। इसमें कोई दो-राय नहीं कि केजरीवाल सरकार के कार्यकाल में दिल्ली में सरकारी स्कूलों की न केवल दशा सुधरी, बल्कि कई स्कूलों का तो कायाकल्प हुआ। जनता ने इन बदलावों को अपनी आंखों से देखा, जिसका नतीजा सामने है।
कांग्रेस के लिए तो कहना पड़ेगा कि इन्हें नहीं मालूम कि ये क्या कर रहे हैं? लगता है कांग्रेस ने दिल्ली में तो बेमन से चुनाव लड़ा। कांग्रेस के पतन के लिए जो कारण जिम्मेदार बताए जा सकते हैं, उनमें शीर्ष स्तर पर निर्णय लेने में देरी, रणनीति और राज्य स्तर पर एकता में कमी, हतोत्साहित कार्यकर्ता व जमीनी स्तर पर जुड़ाव न होना आदि शामिल हैं।
केजरीवाल ने जो कहा वह सच माना जाए कि ‘यदि मतदाताओं ने उन्हें वोट नहीं दिया तो काम की राजनीति कोई नहीं करेगा’ जनता ने इस बात को समझा। हालांकि आप की सीटें इस चुनाव कम जरूर हुई हैं जिसके कारण उसे ढूंढने होंगे। बहरहाल, भाजपा हो या आप या फिर कांग्रेस। सबक तो जनता ने तीनों को दिया है।
