बरेली: मूर्ति बनाने की ऐसी कला…हर कोई देख रह जाए दंग, 62 साल पहले पिता ने शुरू किए काम को बेटे ने बनाई जीविका
बरेली, अमृत विचार। गणेश चतुर्थी को लेकर शहर में तैयारियां जोरो पर हैं। वहीं 62 साल से भगवान की सुंदर मूर्तियां बनाने वाले पिंटू पाल ने बताया कि इस समय उनके पास भगवान गणेश जी की मूर्तियां बनाने से फुर्सत नहीं है। अपने पिता से सीखे इस हुनर से वह अपनी जीविका चला रहे हैं। …
बरेली, अमृत विचार। गणेश चतुर्थी को लेकर शहर में तैयारियां जोरो पर हैं। वहीं 62 साल से भगवान की सुंदर मूर्तियां बनाने वाले पिंटू पाल ने बताया कि इस समय उनके पास भगवान गणेश जी की मूर्तियां बनाने से फुर्सत नहीं है। अपने पिता से सीखे इस हुनर से वह अपनी जीविका चला रहे हैं। बरेली शहर ही नहीं आस-पास के जिलों में भी उनके हाथ की बनाई हुई मूर्तियों की डिमांड है।
सिविल लाइन प्रभा टॉकिज के पास रहने वाले पिंटू पाल ने बताया कि पिता कलकत्ता से दुर्गाबाड़ी रामपुर गार्डन में मूर्तियां बनाने आते थे। इस दौरान लोगों को उनके द्वारा बनाई गई मूर्तियां बहुत पसंद आती थीं। सन 1960 में वह कलकत्ता से अपने परिवार के साथ आकर बरेली में रहने लगे। जब वह छोटे थे तो उनके पिता मूर्तियां बनाते थे। उस समय पिता के काम में हाथ बटाने के साथ-साथ वह भी मूर्तियों को बनाना सीख गए। पिता जी के खत्म होने के बाद उन्होंने अपने पुस्तैनी काम को जारी रखा। अब वह मूर्तियां बना कर अपनी जीविका चला रहे हैं।

विसर्जन के लिए बनाते हैं मिट्टी की मूर्तियां
पिंटू पाल ने बताया कि वह पीली, चिकनी मिट्टी व रेतीली मिट्टी से मूर्तियों को बनाते हैं। लेकिन गणेश चतुर्थी व दुर्गा पूजन के लिए वह मिट्टी की मूर्तियों को तैयार करते हैं। इस समय गणेश चतुर्थी को लेकर तैयारियां चल रहीं हैं।
डेढ़ फीट की मूर्ति होती है एक हजार रुपये में तैयार
गणेश चतुर्थी को लेकर तैयारियां जोरो पर हैं। इस समय गणेश भगवान की मूर्तियों की डिमांड ज्यादा है। पिंटू पाल ने बताया कि उनके पास डेढ़ फीट से लेकर सात फीट तक की गणेश जी की मूर्ति है। डेढ़ फिट की मूर्ति बनाने में एक हजार रुपये की लागत आती है। बाजार में जो 15 सौ रुपये की बिकती है। वहीं मूर्ति की सजावट के ऊपर भी निर्भर करता है। जितनी ज्यादा सजावट का सामान लगाया जाएगा उसकी कीमत उतनी ही बढ़ जाती है। वहीं सीमेंट की मूर्तियों की कीमत फीट के हिसाब से लगाई जाती है। जिसकी कीमत तीन हजार रुपये फीट से लेकर चार हजार रुपये फीट तक है।
बांस की लकड़ी से लेकर प्याल तक लगाया जाता है मूर्ति बनाने में
एक मूर्ति बनाने मे मूर्तिकार को काफी मेहनत करना पड़ती है। मूर्ति बनाने के लिए उन्हें बांस, लकड़ी प्याल, भूसा, मिट्टी, कपड़ा रंग आदि की जरूरत पड़ती है। मिट्टी के साथ ही ये सारी चीजों को मिलाकर मूर्ति तैयार की जाती है। बहुत ही सावधानी से मिट्टी पर आकृति तराशने के बाद मूर्ति तैयार होती है।
कोविड में करना पड़ा था परेशानी का सामना
पिंटू पाल मूर्ति बनाने का पुस्तैनी काम करते हैं। वह इसी से अपनी जीविका चला रहे हैं। कोविड में सारे काम बंद होने के साथ ही उनका काम भी बंद था। दो साल तक उन्हें भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ा था। छोटी मूर्तियों के कुछ ऑर्डर से ही उनके परिवार का गुजारा चला था।
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