Noida Supertech Twin Towers Demolition: पलक झपकते ही जमींदोज हुई करप्शन की बहुमंजिला इमारत
नोएडा। उत्तर प्रदेश के नोएडा का सेक्टर-93 A, ये जगह आजाद भारत के इतिहास की कई बड़ी घटनाओं का गवाह बनी। यहां रविवार को 32 मंजिल की दो बहुमंजिला या 103 मीटर ऊंचे ट्विन टावर (T-16 और T-17 (Apex और Ceyane) ) को ही नहीं ढहाया गया, बल्कि देश में आसमान की बुलंदियों तक पहुंचे …
नोएडा। उत्तर प्रदेश के नोएडा का सेक्टर-93 A, ये जगह आजाद भारत के इतिहास की कई बड़ी घटनाओं का गवाह बनी। यहां रविवार को 32 मंजिल की दो बहुमंजिला या 103 मीटर ऊंचे ट्विन टावर (T-16 और T-17 (Apex और Ceyane) ) को ही नहीं ढहाया गया, बल्कि देश में आसमान की बुलंदियों तक पहुंचे भ्रष्टाचार को भी जमींदोज किया गया। सुपरटेक ट्विन टावरों को गिराने के बाद आस-पास के क्षेत्र में धूल के बादल छा गए।
सुपरटेक ट्विन टावरों को गिराने के बाद आस पास जमे धूल को स्थिर करने के लिए पानी को स्प्रे करने के लिए एंटी-स्मॉग गन का इस्तेमाल किया जा रहा है। नोएडा पुलिस आयुक्त आलोक सिंह ने कहा कि पूरे प्लान के साथ काम किया गया और टावर को गिराया गया। सुरक्षा के पूरे इंतज़ाम थे जिस कारण से सब कुछ सही से हुआ। हम अवशेष और बचे हुए विस्फोटकों का आकलन करने के लिए साइट पर जा रहे हैं यदि वे वहां छोड़े गए हैं।
नोएडा की CEO रितु माहेश्वरी ने कहा कि आस-पास की हाउसिंग सोसाइटियों को कोई नुकसान नहीं हुआ है। अभी कुछ मलबा सड़क की तरफ आया है। हमें एक घंटे में स्थिति का बेहतर अंदाजा हो जाएगा।
Following the orders of the apex court, today the Supertech twin towers located in Sector 93A in Noida were demolished after ensuring stringent safety protocols. #TwinTowers pic.twitter.com/4N8Ujz96XT
— Pankaj Singh (@PankajSinghBJP) August 28, 2022
नोएडा (उत्तर प्रदेश) में सुपरटेक के 318-फीट और 338-फीट ऊंचाई वाले ट्विन टावर को 9 साल की कानूनी लड़ाई के बाद रविवार को ढहा दिया गया। 32 व 29 मंज़िला ट्विन टावर को धमाका कर ढहाने के लिए करीब 3,700 किलोग्राम विस्फोटक इस्तेमाल किया गया। दोनों टावर के निर्माण में अग्नि सुरक्षा नियमों समेत कई मानदंडों का उल्लंघन मिला था। विध्वंस के बाद प्रदूषण स्तर की निगरानी के लिए विध्वंस स्थल पर स्पेशल डस्ट मशीन लगाई गई।
ट्विन टावरों पर सुपरटेक ने कहा कि SC ने तकनीकी आधार पर निर्माण को संतोषजनक नहीं पाया और तदनुसार दोनों टावर को ध्वस्त करने के आदेश जारी किए हैं। हम सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों का सम्मान करते हैं, इसे लागू करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
सुपरटेक ने नोएडा में अपने ट्विन टावर को ढहाए जाने पर एक बयान जारी कर कहा है, हम शीर्ष न्यायालय के आदेशों का सम्मान करते हैं और इसे लागू करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। सुपरटेक ने दावा किया कि टावर्स को 2009 में नोएडा अथॉरिटी ने स्वीकृति दी थी और बिल्डिंग के प्लान में कोई बदलाव नहीं किया गया था।
Noida Supertech Twin Towers Demolition: पलक झपकते ही जमींदोज हुई करप्शन की बहुमंजिला इमारत@CP_Noida@noida_authority@noidapolice#NoidaTowerDemolition #Noida #NoidaTwinTower #Noidatwintowers #NoidaTwinTowerDemolition pic.twitter.com/A1pp3MjeT4
— Amrit Vichar (@AmritVichar) August 28, 2022
सुपरटेक ट्विन टावर्स विध्वंस पर अपर मुख्य सचिव(गृह) अवनीश कुमार अवस्थी ने कहा कि इन अवैध ट्विन टावरों को सुप्रीम कोर्ट द्वारा सख्त कार्रवाई में ध्वस्त करने का आदेश दिया गया था। यह एक संदेश देगा कि राज्य में अवैध काम बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
ट्विन टावर्स के विध्वंस पर यू.बी.एस. तेवतिया (RWA अध्यक्ष, एमराल्ड कोर्ट और याचिकाकर्ता) ने कहा कि 10 साल की लड़ाई के बाद अगर जीत मिलती है तो उसका कितना आनंद आता है वो हर आदमी जानता है। हमने 2012 में हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। विध्वंस के दीर्घकालिक लाभ 3 महीने में दिखाई देंगे।
बता दें कि नोएडा (उत्तर प्रदेश) में सुपरटेक के 318 फीट और 338 फीट ऊंचाई वाले ट्विन टावर 9 साल की कानूनी लड़ाई के बाद रविवार को ढहाए गए। सुपरटेक के ट्विन टावर को ढहाने की लागत ₹20 करोड़ आंकी गई है। इन दोनों इमारतों को बनाने में करीब ₹70 करोड़ लगे थे। सुपरटेक इसे ढहाने के लिए करीब ₹5 करोड़ का भुगतान कर रहा है जबकि बाकी ₹15 करोड़ की रकम इसके लगभग 80,000 टन के मलबे को बेचकर प्राप्त की जाएगी।
2014 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पाया था कि इनके निर्माण के दौरान अग्नि सुरक्षा नियमों सहित कई मानदंडों का उल्लंघन किया गया। 2021 में सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा था।
नोएडा में सुपरटेक के ट्विन टावर को ढहाए जाने के बाद अनुमानित 80,000 टन मलबा निकलेगा। नोएडा अथॉरिटी के जनरल मैनेजर (योजना) इश्तियाक अहमद ने बताया है कि 21,000 क्यूबिक मीटर मलबे को एक खाली ज़मीन पर डंप किया जाएगा और बाकी बचे मलबे को टावरों के बेसमेंट सेक्शन में बनाए गए गड्ढे में ही छोड़ दिया जाएगा।
खरीदारों का क्या होगा?
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में सुपरटेक को दो महीने के भीतर 12 फीसदी सालाना ब्याज के साथ ट्विन टावरों में फ्लैट खरीदारों को सभी राशि वापस करने का निर्देश दिया था। इसके साथ ही बिल्डर को रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन को 2 करोड़ का भुगतान करने का भी निर्देश दिया था।
हालांकि, मार्च 2022 में सुपरटेक कंपनी को नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने दिवालिया घोषित कर दिया है। कंपनी पर करीब 1200 करोड़ रुपये का कर्ज है. इस फैसले के बाद से 25 हजार से ज्यादा ग्राहकों को झटका लगा है, जिन्होंने सुपरटेक से घर खरीदा है और डिलीवरी का इंतजार कर रहे हैं. इसमें ट्विन टावर के ग्राहक भी शामिल हैं।
क्या है ‘वॉटरफॉल इम्प्लोशन’ तकनीक ?
नोएडा में सुपरटेक ट्विन टावर को ढहाने में ‘वॉटरफॉल इम्प्लोशन’ तकनीक इस्तेमाल किया गया, जिसके तहत ढांचा अंदर की ओर और अपने ऊपर गिरेगा जो एक वॉटरफॉल के इफेक्ट को दर्शाएगा। यह इम्प्लोशन गुरुत्वाकर्षण के सिद्धांत का इस्तेमाल करता है और इसमें विस्फोटक और डेटोनेटर्स की ज़रूरत पड़ती है। यह तरीका लागत, समय और सुरक्षा के आधार पर इस्तेमाल होता है।

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