अयोध्या : तपस्वी छावनी के 11वीं पीढ़ी के महंत सर्वेश्वर दास का निधन

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अमृत विचार, अयोध्या। वैष्णव नगरी की चार प्रसिद्ध छावनियों में सबसे प्राचीन तपस्वी छावनी के 11वीं पीढ़ी के महंत सर्वेश्वर दास का इलाज के दौरान मंगलवार को पीजीआई लखनऊ में निधन हो गया। वह तीन माह से बीमार थे। मंगलवार को पूर्वाह्न करीब साढ़े 11 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके पार्थिव शरीर को मंदिर …

अमृत विचार, अयोध्या। वैष्णव नगरी की चार प्रसिद्ध छावनियों में सबसे प्राचीन तपस्वी छावनी के 11वीं पीढ़ी के महंत सर्वेश्वर दास का इलाज के दौरान मंगलवार को पीजीआई लखनऊ में निधन हो गया। वह तीन माह से बीमार थे। मंगलवार को पूर्वाह्न करीब साढ़े 11 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके पार्थिव शरीर को मंदिर परिसर में दर्शनार्थ रखा गया है। बुधवार को सरयू तट पर उनकी अंतेष्टि होगी।

मध्यप्रदेश के रीवा निवासी महंत की गिनती यहां के विद्वान आचार्यों में थी। उन्होंने संस्कृत व्याकरण में आचार्य की डिग्री ली थी और वृंदावन में दस वर्षों तक अध्यापन कार्य किया। उनके गुरु महंत रामगुलाम दास ऊर्फ बलुईया बाबा का निधन 1998 में होने के बाद सर्वेश्वर दास को उत्तराधिकारी महंत बनाया गया।

मंदिर में अकूत चल-अचल संपदा के बाद भी वह वीतरागी संत के रुप में रहते थे। गोण्डा जिले में स्थित मंदिर की विवादित जमीन बेचने के कारण वह कुछ दिनों के भूमिगत हो गये थे। इस दौरान उनके दो गुरुभाइयों हरिवंश दास औलिया, भावनगर गुजरात व रघुवंश दास कोटपुतली राजस्थान को संयुक्त महंत बनाया गया लेकिन सर्वेश्वर दास जब दोबारा मंदिर लौटे तो उनके स्थानापन्न दोनों महंत अपने गंतव्य पर लौट गये।

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