शशि थरूर ने कहा- भारत जोड़ो यात्रा और कांग्रेस जोड़ो दोनों लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं
तिरुवनंतपुरम। कांग्रेस नेता शशि थरूर ने नेताओं में असंतोष और उनके पार्टी छोड़कर जाने के कारण चल रहे मंथन के बीच मंगलवार को कहा कि कन्याकुमारी से कश्मीर तक पार्टी की महत्वाकांक्षी ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के जरिए ‘कांग्रेस जोड़ो’ का उद्देश्य भी हासिल किया जा सकता है और इससे पार्टी के पुनरुत्थान में मदद मिल …
तिरुवनंतपुरम। कांग्रेस नेता शशि थरूर ने नेताओं में असंतोष और उनके पार्टी छोड़कर जाने के कारण चल रहे मंथन के बीच मंगलवार को कहा कि कन्याकुमारी से कश्मीर तक पार्टी की महत्वाकांक्षी ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के जरिए ‘कांग्रेस जोड़ो’ का उद्देश्य भी हासिल किया जा सकता है और इससे पार्टी के पुनरुत्थान में मदद मिल सकती है। कहा जा रहा है कि थरूर कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए चुनाव लड़ने पर विचार कर रहे हैं।
थरूर ने यह उम्मीद जताई कि कई नेता आगामी चुनाव लड़ेंगे और उन्होंने जोर दिया कि उन्होंने अपनी उम्मीदवारी की बात न तो स्वीकार की है और न ही नकारी है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी सात सितंबर अर्थात कल से ‘भारत जोड़ो यात्रा’ शुरू करने जा रहे हैं। यह यात्रा 12 राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों से गुजरेगी और लगभग 150 दिनों की इस पदयात्रा में 3,570 किलोमीटर की दूरी तय की जाएगी।
थरूर ने ‘भारत जोड़ो’ यात्रा के एक दिन पहले कहा कि इस यात्रा का उद्देश्य यह संदेश देना भी है कि कांग्रेस ही वह पार्टी है जो भारत को जोड़कर रख सकती है और यचि जनता तक यह संदेश भली-भांति पहुंच गया, तो इससे पार्टी में फिर से जान आ जाएगी। कांग्रेस के पूर्व नेता गुलाम नबी आजाद और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेताओं ने कटाक्ष किया है कि पार्टी को ‘भारत जोड़ो’ के बजाय ‘कांग्रेस जोड़ो’ पर ध्यान देना चाहिए।
इस बारे में सवाल किए जाने पर तिरुवनंतपुरम से सांसद थरूर ने कहा कि गुलाम नबी साहब एक सम्मानित एवं वरिष्ठ नेता हैं और मैं उनकी बातों पर टिप्पणी नहीं करना चाहता। थरूर ने कहा कि लेकिन मैं यह कहूंगा कि जनता के जुड़े मुद्दे उठा कर और यह दिखा कर कि हम उनके लिए लड़ाई लड रहे हैं, भारत जोड़ो यात्रा देश भर में कांग्रेस से जुड़े पुरुषों और महिलाओं को हमारे मूल्यों और आदर्शों के इर्द-गिर्द एकजुट कर सकती है। उन्होंने कहा कि तब यह ‘भारत जोड़ो’ और ‘कांग्रेस जोड़ो’ दोनों हो सकती है।
थरूर उन 23 नेताओं के समूह में शामिल थे, जिन्होंने व्यापक स्तर पर संगठनात्मक सुधारों की आवश्यकता को लेकर 2020 में पार्टी प्रमुख सोनिया गांधी को पत्र लिखा था। थरूर का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब विभिन्न मुद्दों को लेकर कांग्रेस में उठ रहीं असंतोष की आवाजों को लेकर भाजपा ने उसे बार-बार निशाना बनाया है। थरूर के कांग्रेस अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ने की संभावनाओं के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, ‘‘मैंने केवल इस तथ्य का स्वागत किया है कि चुनाव होंगे।
मेरा मानना है कि यह पार्टी के लिए काफी अच्छा है।’’ कांग्रेस नेता ने कहा कि किस राजनीतिक दल में उसके शीर्ष पद के लिए चुनाव हुए हैं जिनमें कम से कम 10,000 मतदाताओं का बड़ा निर्वाचक मंडल हो। उन्होंने कहा, ‘‘निस्संदेह यह बात संतोष देती है कि लोकतांत्रिक सिद्धांत के इस साधारण बयान से देश भर में बड़ी संख्या में लोगों ने मेरे चुनाव लड़ने की संभावना का स्वागत किया है, लेकिन जैसा कि मैंने स्पष्ट कर दिया है, मैंने अपनी उम्मीदवारी की घोषणा नहीं की है।
कांग्रेस नेता ने कहा कि चुनाव की अधिसूचना 22 सितंबर को जारी होगी, जिसका अर्थ है कि सहयोगियों के पास अभी यह निर्णय लेने के लिए तीन सप्ताह का समय और है कि वे चुनाव में खड़े होना चाहते हैं अथवा नहीं। पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा, ‘‘उम्मीद है कि सदस्यता के व्यापक विकल्प देने के लिए कई लोग चुनाव लड़ेंगे। मैंने अभी तक अपनी उम्मीदवार की न तो पुष्टि की है और न ही इससे मना किया है। चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने की प्रक्रिया 24 सितंबर से 30 सितंबर तक चलेगी।
नामांकन वापस लेने की अंतिम तिथि आठ अक्टूबर है और यदि आवश्यक हुआ, तो चुनाव 17 अक्टूबर को होगा। चुनाव परिणाम 19 अक्टूबर को आएंगे। थरूर ने यात्रा के बारे में और विचारधाराओं की लड़ाई में इसके किसी निर्णायक चरण तक पहुंचने या नहीं पहुंचने के संबंध में कहा, ‘‘कई तरह से यह अस्तित्व का संघर्ष है, जो हम संविधान में दर्ज भारत की अवधारणा की रक्षा के लिए कर रहे हैं। हमारा जब तक अस्तित्व रहेगा, कई और निर्णायक चरण आएंगे।’’ कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘लेकिन जो भी हो, हमें बहुसंख्यवाद के समक्ष घुटने नहीं टेकने चाहिए।’’
उन्होंने कहा कि ‘भारत जोड़ो यात्रा’ इस प्रयास में महत्वपूर्ण योगदान है। उन्होंने साथ ही कहा कि उन्हें नहीं लगता कि यात्रा समाप्त होने के बाद भारत की आत्मा के लिए संघर्ष समाप्त हो जाएगा। यह पूछे जाने पर कि क्या ‘भारत जोड़ो यात्रा’ का वही सामाजिक-राजनीतिक असर हो सकता है, तो 1990 के दशक की शुरुआत में भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी की रथ यात्रा से हुआ था, भले ही उसका उद्देश्य कुछ और था, थरूर ने कहा कि यह संभव है, किंतु इसका प्रभाव केवल तभी देखा जा सकता है जब यह यात्रा आगे बढ़ेगी।
यह पूछे जाने पर कि क्या यह यात्रा आम आदमी का ध्यान खींच सकेगी, थरूर ने कहा कि इस प्रकार का देशव्यापी महत्वाकांक्षी मार्च सफलता की उम्मीद के बिना नहीं निकाला जा सकता। उन्होंने कहा, ‘‘हालांकि हमारी योजना और तैयारी पक्की है लेकिन यह कहना गलत नहीं होगा कि हम सत्तारूढ़ ताकतों की अनदेखी नहीं कर सकते।’’ कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘अगर वे देखेंगे कि यात्रा का गहरा प्रभाव पड़ रहा है तो देश का ध्यान किसी और तरफ खींचने की उनकी क्षमता पर मुझे कोई संदेह नहीं है…।’’ कांग्रेस नेता ने उम्मीद जताई कि यह यात्रा पार्टी में नयी जान लाएगी।
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