बरेली: पलक झपकते ही थम रहीं सांसें, कहीं कोविड तो नहीं जिम्मेदार
बरेली, अमृत विचार। कोविड की दस्तक से पहले हार्ट अटैक के मामले कम सामने आते थे, लेकिन कोविड के बाद से हार्ट अटैक से होने वाली मौतों की संख्या लगातार बढ़ रही है। गौर करने वाली बात यह है कि यह मौतें आम नहीं हैं, कभी कोई नाचते हुए दम तोड़ रहा है तो कोई …
बरेली, अमृत विचार। कोविड की दस्तक से पहले हार्ट अटैक के मामले कम सामने आते थे, लेकिन कोविड के बाद से हार्ट अटैक से होने वाली मौतों की संख्या लगातार बढ़ रही है। गौर करने वाली बात यह है कि यह मौतें आम नहीं हैं, कभी कोई नाचते हुए दम तोड़ रहा है तो कोई रात में सोने के बाद सुबह उठा ही नहीं। हाल ही में कई ऐसे मामले सामने आए। विशेषज्ञों के अनुसार अचानक हृदयघात से होने वाली मौतों पर कोविड को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराना ठीक नहीं है। इस तरह सांसें थमने के कई और भी कारण हो सकते हैं।
यह कहना है विशेषज्ञों का
वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. पंकज बंसल के अनुसार अचानक नाचते हुए या फिर खेलने या फिर कोई अन्य एक्टिविटी के दौरान किसी की मौत हो रही है तो इसका कारण दिल की धड़कन प्रभावित होने से है। कोविड के बाद से ही नहीं बल्कि इससे पहले भी इस प्रकार की मौतें हुई हैं, जिसका मुख्य कारण मायोकार्डिटिस है जो कि शरीर में किसी भी संक्रमण के बाद हो सकती है। मायोकार्डिटिस मौतों में मुख्य कारण बन कर सामने आई है।
वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डा. एके चौहान के अनुसार हृदय में रक्त संचार तीन नलियों से होता है। अगर एक भी नली में ब्लॉकेज होता है तो इससे धड़कन प्रभावित होती है और अचानक व्यक्ति की मौत हो जाती है। वहीं नसों और धमनियों की आंतरिक सतह को भी प्रभावित करता है, जिससे रक्त वाहिका में सूजन हो सकती है।
संक्रमण की स्थिति में छोटी वाहिकाओं के क्षति और रक्त के थक्के बनने की भी समस्या देखी जाती रही है, ये सभी स्थितियां हृदय और शरीर के अन्य भागों में रक्त के प्रवाह को प्रभावित कर देती हैं। हृदय में रक्त का संचार प्रभावित होने से कई प्रकार की गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के विकसित होने का खतरा हो सकता है।
वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अतुल अग्रवाल के अनुसार कोविड के बाद अचानक व्यक्ति की हृदय गति रुकने से मौत हो रही हैं, इसका क्या कारण है, इसके लिए सामान्य पोस्टमार्टम से पता लगाना संभव नहीं है, इस प्रकार की मौत की फॉरेंसिक एक्सपर्ट की टीम से जांच करानी चाहिए, जिससे पता लग सके कि आखिर शरीर में किस प्रकार की दिक्कत रही या फिर बनी, क्या संक्रमण इसकी वजह बना इस तरह से जांच होने पर ही ठीक प्रकार से इस प्रकार की मौतों का सटीक कारण की जानकारी हो सकेगी।
स्वस्थ रहने के टिप्स
- संतुलित आहार लें: ऐसा खाना खाएं जिसमें कार्बोहाइड्रेट कम हो। बायोलॉजिकल क्लॉक के हिसाब से चलें। ब्रेकफास्ट से लेकर लंच, डिनर तक सभी तय वक्त पर लें।
- रोजाना एक्सरसाइज करें: स्मार्ट वॉच या स्मार्टफोन के एप की मदद से रोज हिसाब रखें कि कितने कदम चले हैं। रोजाना कम से कम 7 हजार कदम चलें।
- समय- समय पर कराए जांच: साल में एक बार या हर दो साल में एक बार फुल बॉडी चेकअप जरूर करवाना चाहिए, ताकि किसी बीमारी का पता चले तो उसका इलाज समय पर हो सके।
- अच्छे लोगों के संपर्क में रहे: जिंदगी में हमें बहुत सारे समझौते करने पड़ते हैं। अगर अच्छे लोग साथ हों तो मुश्किल वक्त भी आसानी से कट जाता है।
रोका जा सकता है हार्ट अटैक
इन दिनों कई ऐसे मामले सामने आए जब किसी न किसी सेलिब्रिटी को हार्ट अटैक आया। इनमें कई ऐसे मामले थे जब हार्ट अटैक जिम में एक्सरसाइज करते समय आया। ऐसे हार्ट अटैक को हर साल, दो साल में हेल्थ चेकअप कराकर और बीमारी पता चलने पर लाइफस्टाइल में बदलाव करके रोका जा सकता है।
हार्ट अटैक का सबसे बड़ा कारण यह है
- कोरोनरी आर्टरी धीरे-धीरे ब्लॉक होना शुरू होती है। पहले 10, 20 फिर 30 प्रतिशत…इसी प्रकार यह पूरी तरह ब्लॉक हो जाती है।ॉ
- अगर यह आर्टरी अभी 50 प्रतिशत ब्लॉक है और लाइफस्टाइल में कोई बदलाव नहीं करते हैं तो कुछ वर्षों में यह 70 से 80 प्रतिशत ब्लॉक हो जाएगी।
- इसके बाद दिल में खून का बहाव कम हो जाता है। फिर कुछ समय बाद जब यह ज्यादा या पूरी तरह ब्लॉक हो जाती है तो हार्ट अटैक आ जाता है।
ऐसे पता चलेगा ब्लॉकेज
हर शख्स की कोरोनरी आर्टरी कुछ न कुछ ब्लॉक जरूर हो सकती है। दुनिया में दिल के 50 फीसदी मरीजों में गंभीर ब्लॉकेज है। यह इस तरह का ब्लॉकेज है जिसके बारे में तब तक पता नहीं चलता जब तक कि टेस्ट न कराया जाए।
आर्टरी में ब्लॉकेज का पता दिल के सीटी स्कैन से लगाया जा सकता है। ब्लॉकेज 50 या 60 प्रतिशत है तो लाइफस्टाइल में बदलाव करके इसे बढ़ने से रोक सकते हैं। इसे न तो खत्म किया जा सकता है और न ही कम। हां, इसके बढ़ने की रफ्तार पर कंट्रोल जरूर किया जा सकता है यानी अगर किसी की कोरोनरी आर्टरी में 60 प्रतिशत ब्लॉकेज है तो इसे 90 या 100 प्रतिशत तक होने से रोका जा सकता है।
ब्लॉकेज को ऐसे करें कंट्रोल
- लाइफस्टाइल में बदलाव करें। फिजिकल ऐक्टिविटी बढ़ाएं। इससे मेटाबॉलिजम बैलेंस रहता है।
- अगर स्मोकिंग करते हैं तो तुरंत छोड़ दें।
- डायबिटीज है तो शुगर कंट्रोल रखें।
- अगर हाइपरटेंशन हैं तो हाई बीपी कंट्रोल में रखें।
- मोटापा है तो उसे कम करें।
ये 7 टेस्ट हैं सबसे जरूरी
ब्लड टेस्ट, ईसीजी, इकोकॉर्डियोग्राम, हार्ट का सीटी स्कैन, पेट का अल्ट्रासाउंड, चेस्ट एक्सरे, कैंसर मार्कर टेस्ट।
कब कराएं ये टेस्ट
- 40 वर्ष की उम्र के बाद हार्ट और ब्लड के टेस्ट दो साल में एक बार जरूर कराएं।
- 10 वर्ष में एक बार सीटी एंजियो जरूर कराएं। अगर ब्लॉकेज आए तो हर 3 या 4 साल में इसे कराएं।
देशभर में हुई हार्ट अटैक से मौतें
साल मौत
2021 28449
2020 28680
2019 28500
2018 25764
2017 23246
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