बरेली: बिन गुरु के भविष्य बनाने को विवश स्कूलों के विद्यार्थी
बरेली, अमृत विचार। स्कूल-कॉलेजों में शैक्षिक गुणवत्ता पर जोर दिया जा रहा है, मगर शासन स्तर पर शिक्षकों की कमी को दूर नहीं किया जा रहा है। इससे छात्र-छात्राओं की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। स्कूली शिक्षा का ढांचा चरमराता दिख रहा है। जनपद के राजकीय स्कूलों में प्रवक्ता, सहायक अध्यापक सहित लिपिक और चतुर्थ …
बरेली, अमृत विचार। स्कूल-कॉलेजों में शैक्षिक गुणवत्ता पर जोर दिया जा रहा है, मगर शासन स्तर पर शिक्षकों की कमी को दूर नहीं किया जा रहा है। इससे छात्र-छात्राओं की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। स्कूली शिक्षा का ढांचा चरमराता दिख रहा है। जनपद के राजकीय स्कूलों में प्रवक्ता, सहायक अध्यापक सहित लिपिक और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की भारी कमी है।
जनपद में कुल 61 राजकीय विद्यालय हैं। इनमें 260 प्रवक्ताओं के पद हैं। वर्तमान में महज 61 पदों पर ही प्रवक्ता तैनात हैं। 199 पद रिक्त हैं। आंकड़ों के अनुसार सहायक अध्यापकों के 470 पद स्वीकृत हैं, लेकिन 252 ही सहायक अध्यापक तैनात हैं। 218 पद रिक्त हैं। लिपिक के 94 पद स्वीकृत हैं, 56 पर तैनाती है। 38 पद रिक्त हैं। चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के 211 पद स्वीकृत हैं, लेकिन 37 पदों पर तैनाती है।
174 पद रिक्त हैं। सात ऐसे राजकीय इंटर कॉलेज हैं, जो पहले चरण में मॉडल इंटर कॉलेज के रूप में स्थापित किए गए थे। इसके बाद राजकीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के अंतर्गत 37 राजकीय हाईस्कूल और सात इंटर कॉलेजों का निर्माण हुआ। एमएसडीपी (बहु क्षेत्रीय विकास कार्यक्रम) के तहत 10 राजकीय इंटर कॉलेज संचालित हो रहे हैं।
छात्र संख्या के पीछे शिक्षकों की कमी
सभी कॉलेजों में वर्तमान में पंजीकृत छात्र संख्या कुल 187627 है, जो औसतन बेहद कम है। इसके पीछे शिक्षकों की कम संख्या को माना जा रहा है। यही वजह है कि राजकीय विद्यालयों में कम संख्या में छात्रों के पंजीकरण हो रहे हैं।
डीआईओएस सोमारू प्रधान ने कहा कि कॉलेजों में शिक्षकों की तैनाती को लेकर शासन को निरंतर पत्र भेजा जा रहा है। शिक्षकों की कमी के कारण इन विद्यालयों में छात्र संख्या भी बेहद कम है। हालांकि, शैक्षिक गुणवत्ता से लेकर छात्र संख्या बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।
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