बरेली: प्रतिदिन 25 हजार क्विंटल गन्ने के रस से एथेनॉल बनाएगी ये मिल, जानें कब होगी शुरू

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अनुपम सिंह/बरेली, अमृत विचार। जिले की फरीदपुर चीनी मिल में गन्ने के रस से सीधे एथेनॉल बनाया जाएगा। शासन से मंजूरी मिलने के बाद मंडल का सबसे बड़ा प्लांट बनकर तैयार हो चुका है। ट्रॉयल भी सफल रहा है। नवंबर के पहले सप्ताह से ही एथेनॉल बनने की पूरी संभावना है। रोजाना होने वाले गन्ने …

अनुपम सिंह/बरेली, अमृत विचार। जिले की फरीदपुर चीनी मिल में गन्ने के रस से सीधे एथेनॉल बनाया जाएगा। शासन से मंजूरी मिलने के बाद मंडल का सबसे बड़ा प्लांट बनकर तैयार हो चुका है। ट्रॉयल भी सफल रहा है। नवंबर के पहले सप्ताह से ही एथेनॉल बनने की पूरी संभावना है।

रोजाना होने वाले गन्ने की पेराई का एक चौथाई हिस्से का एथेनॉल बनेगा। दरअसल, कुछ सालों से चीनी का उत्पादन अधिक और मांग कम होने से दिक्कतें आने लगी थीं। इसको देखते हुए केंद्र सरकार ने चीनी मिलों को गन्ने के रस से सीधे एथेनॉल बनने की अनुमति दे दी है। इसके बाद मिलों ने एथेनॉल के प्लांट लगाने शुरू कर दिए हैं। फरीदपुर चीनी मिल ने भी शासन की मंजूरी मिलने के बाद प्लांट बनाकर तैयार कर दिया है। प्लांट का ट्रायल हो चुका है।

प्रतिदिन 75 हजार क्विंटल गन्ने की पेराई की क्षमता
एथेनॉल बनाकर मिल ने ट्रायल सफल कर लिया है। मिल से जुड़े जानकारों के अनुसार सीजन में इस मिल की प्रतिदिन 75 हजार क्विंटल गन्ने की पेराई की क्षमता है। इसके अनुसार, करीब 25 हजार क्विंटल गन्ने के रस से सीधे एथेनॉल बनाने की तैयारी में मिल है। माना जा रहा है कि 3 से 4 नवंबर के बीच एथेनॉल बनना शुरू हो जाएगा। सबसे अच्छी बात यह है कि मंडल का सबसे अधिक क्षमता वाला सुपर और हाईटेक सुविधाओं से लैस प्लांट है।

एथेनॉल बनने से ये होंगे फायदे
गन्ने के रस से सीधे एथेनॉल बनने से आने वाले समय में मिल मांग के अनुरूप ही चीनी का उत्पादन करेगी। इससे मुनाफा ज्यादा होगा। उत्पादन होने के बाद चीनी की बिक्री समय से नहीं होने और पैसे नहीं मिल पाने की वजह से भुगतान अटक जाता है, लेकिन एथेनाॅल का पैसा तत्काल मिल जाएगा। पैसों से समय से किसानों का भुगतान भी हो जाएगा, इससे किसानों को बड़ी राहत मिलेगी। वहीं पर्यावरण में कुछ हद तक सुधार की बात कही जा रही है।

…तो कीमत और मांग बढ़ेंगी
मिल से जुड़े जानकारों के अनुसार, चीनी का उत्पादन कम होने से बाजार में भी सुधार होगा। कीमत और मांग दोनों बढ़ने लगेंगी। एक क्विंटल गन्ने से औसतन 12 किलोग्राम चीनी बनाई जा सकती है। बताया जाता है कि विदेशों को निर्यात करने के बाद भी मिलों के पास मांग से ज्यादा स्टाक रह जाता है। इसी वजह से किसानों का समय से भुगतान नहीं हो पाता है।

पेट्रोल-डीजल में मिलाते हैं एथेनॉल
फरीदपुर चीनी मिल के यूनिट हेड राकेश गुप्ता बताते हैं कि, शीरे से एथेनॉल बनाने के बाद उसे पेट्रोल, डीजल में मिलाया जाता है। पेट्रोल में एथेनॉल का प्रतिशत बढ़ने के बाद इसकी मांग में और इजाफा होने की उम्मीद है। एथेनॉल की बाजार में डिमांड तेजी से बढ़ भी रही है। पेट्रोल की तुलना में एथेनॉल सस्ता भी रहता है। एथेनाॅल एक तरह का एल्कोहल ही है। मिल में गन्ने के रस और चीनी के शीरे दोनों से एथेनॉल बनने का प्लांट है।

उत्तर भारत की पहली मिल होगी फरीदपुर
जिला गन्ना अधिकारी के अनुसार, फरीदपुर मिल गन्ने के रस से सीधे एथेनॉल बनाने वाली उत्तर भारत की पहली चीनी मिल है। पहले पेट्रोल में पांच प्रतिशत एथेनॉल मिलाने की मंजूरी थी, लेकिन अब इसे बढ़ाकर 20 प्रतिशत कर दिया गया है। पेट्रोल की लगातर बढ़ती कीमतों से लोगों को हो रही परेशानी को लेकर पेट्रोल के विकल्प के रूप में एथेनॉल बनाने की कोशिश है। पेट्रोल की अपेक्षा एथेनॉल सस्ता है।

फरीदपुर की द्वारिकेश चीनी मिल में एथेनॉल बनाने का प्लांट बनकर तैयार हो चुका है। इस सत्र से एथेनाॅल बनने लगेगा। 25 हजार क्विंटल गन्ने से प्रतिदिन एथेनॉल बनेगा। इसके उत्पादन के लिए 175 केएलपीडी की क्षमता का प्लांट मिल ने लगाया है- यशपाल सिंह, जिला गन्ना अधिकारी

प्लांट की खासियत

  • 07 जुलाई 2021 से बनना शुरू हुआ था यह प्लांट
  • 11 माह में बनकर तैयार हुआ है प्लांट
  • 75 लाख लीटर प्रतिदिन एथेनॉल बना सकेगा यह प्लांट
  • 05 मेगावट बिजली का भी उत्पादन करेगा यह प्लांट
  • 04 मेगावट बिजली खुद इस्तेमाल करेगा प्लांट
  • 01 मेगावट बिजली पॉवर कारपोरेशन को दिया जाएगा
  • 150 परिवारों को प्लांट बनने से रोजगार मिला है

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