उत्तराखंड: ऋषिकेश से 25 किमी दूर इस सिद्धपीठ की है विशेष मान्यता, शारदीय नवरात्र में श्रद्धालुओं से रहता है गुलजार
देहरादून, अमृत विचार। देवभूमि उत्तराखंड के कण-कण में देवों का वास है। अनुपम प्रकृति के सौंदर्य के साथ यहां मौजूद देवों के धाम लोगों को बरबस ही अपनी ओर खींचते हैं। ऋषिकेश-गंगोत्री नेशनल हाईवे पर टिहरी जनपद के हिडोलाखाल कस्बे के पास घने जंगल के बीच स्थित सिद्धपीठ कुंजापुरी धाम भी इन्हीं शक्तिपीठों में से …
देहरादून, अमृत विचार। देवभूमि उत्तराखंड के कण-कण में देवों का वास है। अनुपम प्रकृति के सौंदर्य के साथ यहां मौजूद देवों के धाम लोगों को बरबस ही अपनी ओर खींचते हैं। ऋषिकेश-गंगोत्री नेशनल हाईवे पर टिहरी जनपद के हिडोलाखाल कस्बे के पास घने जंगल के बीच स्थित सिद्धपीठ कुंजापुरी धाम भी इन्हीं शक्तिपीठों में से एक है। ऋषिकेश से 25 किलोमीटर दूर मां के इस धाम में यूं तो साल भर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा है लेकिन खासतौर पर नवरात्रि पर यहां भक्तों की चहलपहल देखते ही बनती है।

शास्त्रों के अनुसार, मां के इस धाम में देवी सती के बाल गिरे थे। इस कारण मां के इस धाम का नाम कुंजापुरी पड़ा। यहां पर शारदीय नवरात्र में भव्य मेला लगता है। नवरात्र पर जौ की हरियाली बोई जाती है। बाद में हरियाली प्रसाद के रूप में दी जाती है। यही वजह है कि श्रद्धालुओं की बीच यह मान्यता प्रबल है कि सच्चे मन से दर्शन करने से मां मनोकामनाएं पूरी करती है।
मान्यता और परंपरा के अनुसार यहां के पुजारी भंडारी जाति के लोग होते हैं यहां देवी के दर्शनों से अध्यात्मिक ऊर्जा मिलती है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु वर्षभर यहां पर आते हैं। मां कुंजापुरी के इस धाम से ऋषिकेश, स्वर्गाश्रम का विहंगम दृश्य नजर आता है। शीतकाल में यहां से बर्फ से ढकी पहाड़ियां दिखाई देती हैं। कुंजापुरी प्रसिद्ध सिद्धपीठों में शामिल है।

कैसे पहुंचे मां के सिद्धपीठ कुंजापुरी धाम
कुंजापुरी देवी मंदिर तक पहुंचने के लिए ऋषिकेश-गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग से बस या कार से हिडोलाखाल आना होगा। इसके बाद छोटे वाहनों से मंदिर परिसर तक पहुंच सकते हैं। नई टिहरी जिला मुख्यालय से भी आगराखाल होते हुए यहां पहुंचा जा सकता है। वहीं नजदीकी हवाई अड्डा जौलीग्रांट हवाई अड्डा देहरादून है। यहां से सड़क मार्ग से मंदिर तक आसानी से पहुंचा जा सकता है।
