मुरादाबाद : दिव्यांगता को मात दे कंचन ने जगाई शिक्षा की अलख
मुरादाबाद,अमृत विचार। सलाम है कंचन खन्ना के हौसले को। शारीरिक कमजोरी की वजह से शहर के सभी पब्लिक स्कूलों ने उन्हें अपने यहां प्रवेश देने से मना कर दिया था मगर इसके बाद भी इस बेटी ने हिम्मत नहीं हारी। अपने मजबूत इरादों और दृढ़ इच्छाशक्ति की बदौलत कुछ ऐसा कर दिखाया कि आज हजारों …
मुरादाबाद,अमृत विचार। सलाम है कंचन खन्ना के हौसले को। शारीरिक कमजोरी की वजह से शहर के सभी पब्लिक स्कूलों ने उन्हें अपने यहां प्रवेश देने से मना कर दिया था मगर इसके बाद भी इस बेटी ने हिम्मत नहीं हारी। अपने मजबूत इरादों और दृढ़ इच्छाशक्ति की बदौलत कुछ ऐसा कर दिखाया कि आज हजारों बेटियां उन्हें अपना प्रेरणा स्रोत मानकर आगे बढ़ रही हैं।
नमो देव्यै
- आज कंचन की लिखी व्याकरण की पुस्तक को पढ़ा रहे वही स्कूल
- स्वाध्याय से अंग्रेजी में एमए करके ट्यूशन से संवार रहीं बच्चों
का भविष्य - काव्य संग्रह भी हो चुका है प्रकाशित परिवार की आजीविका चलाने में भी की मदद
कोठीवाल नगर निवासी हरिकृष्ण लाल खन्ना की बेटी कंचन खन्ना बचपन से ही दिव्यांग हैं। वह ठीक से बैठ भी नहीं पाती हैं। अपना कॅरियर बनाने के लिए उन्हें बहुत संघर्ष करना पड़ा। प्राइमरी शिक्षा के लिए परिवार वालों ने उन्हें लेकर शहर के सभी पब्लिक स्कूलों के चक्कर काटे मगर, किसी भी स्कूल ने उनकी शारीरिक अक्षमता के कारण दाखिला नहीं दिया। तभी कंचन के बालमन ने कुछ ऐसा करने का ठान लिया जिससे लोग उन्हें सम्मान की नजरों से देखें। इसके लिए कंचन ने घर पर ही पढ़ाई शुरू कर दी। उन्होंने अंग्रेजी से एमए किया। इतना ही नहीं अंग्रेजी व्याकरण की पांच किताबें भी लिखीं। इसके अलावा उनका एक काव्य संग्रह भी प्रकाशित हो चुका है। इस दौरान उन्होंने बच्चों को ट्यूशन पढ़ाना शुरू किया। इसके साथ ही रुद्रपुर में एक कंप्यूटर सेंटर भी खोला। मगर कोरोना काल में उसे बंद करना पड़ा।
शहर की यह बेटी सामाजिक कार्यों में भी बढ़ चढ़कर हिस्सा लेती है। कई सम्मान भी पा चुकी है। आज उन पब्लिक स्कूलों में कंचन की लिखी इंग्लिश ग्रामर की किताब पढ़ाई जा रही है, जिन्होंने कभी उन्हें अपने यहां पढ़ाने से मना कर दिया था। ट्यूशन से हजारों बच्चों की जिंदगी में शिक्षा की अलख जगाने वाली कंचन खन्ना अन्य बेटियों के लिए प्रेरणास्रोत बनी हैं। परिवार वाले भी गर्व से कहते हैं कंचन अपने नाम के अनुरूप खरा सोना है।
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